कुछ तो करो साहब… अब तो कलम भी गोलियां बरसा रही है

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जम्मू कश्मीर के पुलवामा जिले में हुए आतंकी हमले को लेकर देशभर में रोष है। हर कोई हमले की कड़ी निंदा कर रहा है। लोग तरह-तरह की मांग कर रहे हैं। हर कोई इस हमले के पीछे के मास्टरमाइंड को सबक सिखाने की बात कर रहा है। देश के हर व्यक्ति का एक ही कहना है कि खून का बदला खून। हर कोई पाकिस्तान से बदला लेना चाहता है। लोग अलग-अलग तरह से अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। कोई पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन कर के तो कोई नारेबाजी कर अपना गुस्सा दिखा रहा है। तो कोई सोशल मीडिया के जरिए अपना गुस्सा जाहिर कर रहा है लेकिन मांग सबकी एक ही है कि खून का बदला खून, पाकिस्तान अब तुझे छोड़ेंगे नहीं।

देश की जनता का गुस्सा एक तरफ है। अब हम बात करते हैं देश की सरकारों और उन राजनीतिक पार्टियों की, जो चुनाव से पहले बड़ी-बड़ी बातें करती हैं। लेकिन सत्ता की कुर्सी पर बैठने के बाद उनके वादों की ये किताब न जानें कहा खो जाती है। कुछ तो ऐसे नेता भी हैं जो इस दुखद घड़ी में शहीद के परिवारों के साथ होने की बात तो कर रहे हैं लेकिन राजनीति करने से बाज़ नहीं आ रहे हैं। अब तो शर्म आती है अपने देश की सियासत पर। मुझे शर्म आती है, आपको शर्म आती है, देश के बच्चे-बच्चे को शर्म आती है। लेकिन उन नेताओं को कब शर्म आएगी? जो ऐसी गंभीर स्थिति में भी सियासत करते हैं।

देश का बच्चा-बच्चा पाकिस्तान से दो-दो हाथ करने को तैयार है। लेकिन हमारी सरकार कब तैयारी होगी। कब हमारे जवानों की शहादत का बदला लिया जाएगा? या हमारे जवानों की शहादत यूं ही बेकार जाएगी? अब तो कुछ करो सरकार, अब तो कलम भी बोलने लगी है। कुछ तो करो। सिर्फ शहीदों को फूलों या मोमबत्ती की श्रद्धांजलि देने से बदला पूरा नहीं होगा। हमारे शहीदों की आत्मा को शांति तो उनकी शहादत का बदला लेने के बाद ही मिलेगी साहब। उस मां, उस पत्नी, उस पिता का दर्द अब तो समझो जिसने देश की सेवा के लिए अपने इकलोते बेटे को खो दिया। कुछ तो करो साहब….

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