BLOG: फुटबॉल के बेताज बादशाह ‘पेले’ ने कुछ इस तरह बिखेरा दुनिया में अपना जलवा

A Profile of The Legendary Brazilian striker Pelé -Wikileaks4india Report

आज विश्वभर में फुटबॉल का गेम अन्य गेम्स के मुकाबले काफी लोकप्रिय माना जाता है है ये बात अलग है कि भारत कभी भी इस खेल के महाकुंभ यानी विश्वकप के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाया लेकिन फुटबॉल को चाहने वालों की कमी इस देश में भी नहीं है। जब भी फुटबॉल का विश्वकप होता है लोगों की दीवानगी देखते ही बनती है। लेकिन इस खेल को दुनियाभर में एक खास पहचान दिलाने का श्रेय उस महान खिलाड़ी को जाता है जिसने कभी अपने जादुई खेल से पूरी दुनिया को अपना दीवाना बना दिया था। हम बात कर रहे हैं ब्राजील (Brazil) के स्टार फुटबॉलर पेले (Pele) की जिनका नाम आते ही लोग फुटबॉल के बारे में सोचना शुरू कर देते हैं। अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में कई कीर्तिमान बनाने वाले पेले को फुटबॉल के विशेषज्ञ और पूर्व खिलाड़ी सर्वकालीन महान फुटबॉलर मानते हैं। पेले (Pele) द्वारा किए गए गोल्स के रिकॉर्ड इतने हैं कि उन्हें तोड़ना आज भी किसी खिलाड़ी के बस की बात नहीं।

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पेले का जन्म

पेले का पूरा नाम एडिसन “एडसन” अरांटिस डो नैसिमेंटो है। ब्राजील के इस महान फुटबॉल खिलाड़ी का जन्म 23 अक्टूबर 1940 को ब्राजील (Brazil)के ट्रेस कोराकोस में हुआ था उनके पिता का नाम जो रैमोस डो नैसिमैंटो और माता का नाम सेलेस्टे अरांटिस था। उनका नाम अमरीकी साइनटिस्ट थामस एडीसन (Thomas Alva Edison)के नाम पर एडीसन रखा गया लेकिन उनके माता-पिता ने नाम में से अंग्रेजी अक्षर ‘i’ को निकाल कर ‘एडसन’ ऱखने का फैसला किया, पेले (Pele) के जन्म प्रमाणपत्र में एक त्रुटि रह गई जिससे कई कागजातों में उनका नाम एडसन न होकर एडीसन (Edison)ही रहा।

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जब ब्राजील की एक महान हस्ती ने पेले की प्रतिभा को पहचाना

पेले (Pele)जब 15 साल के थे तभी से उनमें फुटबॉल का कौशल दिखाने की जादुई कला थी। पेले एक बार मैदान पर अपना गेम खेल रहे थे तभी ब्राजील (Brazil) के मशहूर फॉरवर्ड ब्रीटो (Brito) की पारखी नजर उनपर पड़ी। ब्रीटो (Brito) पेले (Pele)का खेल देखकर उनसे इतना प्रभावित हुए कि उनसे रहा ना गया और उन्होंने तुरंत ही ये कह दिया कि आने वाले समय में ये लड़का विश्व फुटबॉल में राज करेगा। ब्रेटो होनहार पेले को ब्राजील (Brazil) की क्लब सैंटोस ले गये। जहां से उनके फुटबॉल करियर को एक नई दिशा दी।

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1958 के विश्वकप में किया डेब्यू

पेले (Pele)को पहली बार 1958 विश्वकप में ब्राजील (Brazil)की टीम का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला था। फुटबॉल के इस बादशाह का पहला मैच यूएसएसआर (USSR)के विरूद्ध था। पेले इस विश्वकप में पहले ऐसे खिलाड़ी थे जिन्होंने सिर्फ 17 साल और 239 दिनों की छोटी सी उम्र में विश्वकप का पहला गोल किया था। पेले ने वेल्स के विरूद्ध क्वार्टरफाइनल में अपना पहला विश्व कप गोल किया था उनके इसी गोल की बदौलत ब्राजील (Brazil) ने सेमीफाइनल में प्रवेश किया। पेले ने सेमीफाइनल में अपने करिश्माई खेल से फुटबॉल के कई दिग्गजों को हैरत में डाल दिया, उन्होंने  फ्रांस के विरूद्ध इस बड़े मैच में एक के बाद एक लगातार तीन गोल दाग दिए और सबसे कम उम्र में हैट्रिक बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। इस विश्वकप में वो ऐसे पहले खिलाड़ी थे जो इतनी कम उम्र में ब्राजील (Brazil)की तरफ से फाइनल मुकाबला खेल रहे थे। फाइनल में भी उन्होंने स्वीडेन के खिलाफ दो गोल किए और अपनी टीम को 5-2 से विश्वकप का खिताब दिलाने में बड़ा रोल अदा किया।

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1962 के विश्कप में भी दिखा पेले का जादू

1962 विश्व कप के पहले मैच में मेक्सिको (Mecciko)के विरूद्ध पेले ने पहला गोल बनाने में मदद की और फिर चार रक्षकों के आगे दौड़ कर दूसरा गोल बना डाला, जिससे उन्हें2-0 की बढ़त मिल गई। चेकोस्लोवाकिया (Czechoslovakia)के विरूद्ध एक लंबी दूरी के शॉट की कोशिश करते समय वे जख्मी हो गए।[इसके कारण वे टूर्नामेंट के शेष भाग में न खेल सके।

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1966 विश्वकप में पेले को रोकने के लिए रची गई खतरनाक साजिश

1966 विश्व कप में पेले (Pele) के गेम को फीका करने के लिए विपक्षी टीम के खिलाड़ियों ने उनके खिलाफ खतरनाक साजिश रची। ये विश्वकप बल्गेरियन और पुर्तगाली रक्षकों द्वारा पेले (Pele) पर किये गए खूंखार हमले के लिये आज भी याद किया जाता है। ब्राजील (Brazil) इस विश्वकप में केवल तीन मैच खेल कर पहले ही राउंड में बाहर हो गया। पेले ने बल्गेरिया के विरूद्ध पहला गोल एक ‘फ्री किक’ के जरिये किया, लेकिन बल्गेरियन खिलाड़ियों द्वारा सतत हमले के कारण आई एक चोट के कारण वह हंगरी के विरूद्ध दूसरे खेल में भाग न ले सके। ब्राज़ील (Brazil) वह गेम हार गया और हालांकि पूरी तरह से स्वस्थ न होने पर भी पेले को वापस पुर्तगाल (Pele) के विरूद्ध अंतिम महत्वपूर्ण मैच के लिये बुला लिया गया। उस खेल में जोआओ मोरेस ने पेले को बुरी तरह से घायल कर दिया, लेकिन फिर भी रेफरी जार्ज मैक्काबे द्वारा उन्हें मैदान में रहने दिया गया। उन दिनों स्थानापन्न खिलाड़ियों को लाने की अनुमति नहीं थी इस लिए पेले को जख्मी हालत में ही खेलना पड़ा, इस वाकिए के बाद से उन्होंने कसम खाई कि वो विश्वकप जैसे टूर्नामेंट में नहीं खेलेंगे, हालांकि बाद में उन्हें अपने चाहने वालों के दवाब के चलते उन्हें आपना ये फैसला बदलना पड़ा।

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1970 में पेले ने ब्राजील को फिर दिलाया विश्वकप

पेले (pele) को राष्ट्रीय टीम में 1969 के शुरू में बुलाया गया तो, पहले तो उन्होंने इनकार कर दिया, लेकिन बाद में हामी भर दी और विश्व कप के छह प्रवेश मैचों में खेले और छह गोल बनाए। मेक्सिको (Mecciko) में हुआ 1970 विश्व कप पेले का आखरी विश्व कप था। टूर्नामेंट में पेले (pele) ने 6 गोल जो किए वो सभी उन्होंने निर्णायक मौकों पर किए उनके शानदार खेल की बदौलत फाइनल मुकाबले में ब्राजील (Brazil)ने इटली (Itli))को 4-1 से रौदकर विश्वकप का खिताब तीसरी बार अपने नाम किया।

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जब पेले का खेल देखने के लिए नाइजीरिया में थमा गृह युद्ध

बात 1967 के उस वक्त की है जब नाइजीरिया (Nigeria)में फेडरल और बागी सेना के बीच भीषण युद्ध चल रहा था इस युद्ध में दोनों की सेनाओं के कई सैनिक मारे जा चुके थे। इस के दौरान पेले ने नाइजीरिया (Nigeria) का दौरा किया। नाइजीरिया (Nigeria)के लोग पेले के खेल के इस कदर दिवाने थे कि दोनों सेनाओं ने पेले का खेल देखने के लिए 48 घंटे का सीजफायर घोषित कर दिया। पेले की इस लोकप्रियता को देखकर यूएन में ब्राजील (Brazil)के राजदूत ने ये कह दिया कि पेले ने 22 साल फुटबॉल खेला है और इस दौरान दुनिया में उनसे बेहतर दूसरा कोई राजदूत ना हुआ होगा।

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फुटबॉल करियर में लगाई गोलों की छड़ी

ब्राजील (Brazil) को तीन वर्ल्‍ड कप, दो वर्ल्‍ड कप चैंपियनशिप और नौ साओपोलो स्टेट चैंपियनशिप खिताब दिलाने वाले विजेता पेले के नाम 1363 मैचों में 1283 गोल है, जिसमें से 77 गोल उन्होंने अपने देश ब्राजील के लिए किए हैं। इस सूची के जरिए आप देख सकते हैं पेले (Pele) द्वारा किए गए गोल्स को।

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फैन्स से मिले पेले को कई नाम

पेले (Pele) के खेल की पूरी दुनिया दिवानी थी वे “फुटबॉल के शहंशाह” (ओ रे डू फूटेबॉल), “शहंशाह पेले” (ओ रे पेले) या केवल “शहंशाह” (ओ रे) के नाम से जाने जाते थे। पेले अपने क्लब की तरफ से दुनिया के जिस भी कोने में फुटबॉल खेलने जाते थे उनकी एक झलक पाने के लिए उनके चाहने वालों में होड़ सी मच जाती थी। कई बार फैन्स उनको छूने के लिए मैदान तक पहुंच जाते थे। उनका क्लब सेंटोस पूरा दुनिया में टूर करता था।

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करियर में अवॉर्डों की लगाई लंबी लाइन

पेले (pele) ने अपने फुटबॉल करियर के शुरूआत में अवॉर्डों को जीतने का सिलसिला शुरू किया था उसे उन्होंने रिटायर होने के बाद भी सालों तक जारी रखा। उनके पुरस्कार जीतने का सूची काफी लंबी है। आईए आपको बताते हैं कि पेले को उनके जादुई खेल के लिए कौन सा सम्मान कब मिला।

11-फीफा (FIFA) विश्व कप सिल्वर बूट: 1958

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22-फीफा (FIFA) विश्व कप सिल्वर बॉल: 1958

33-फीफा (FIFA) विश्व कप के गोल्डन बॉल : 1970

44-साउथ अमेरिकन फुट्बॉलर ऑफ़ द इयर: 1973

55-1981 में ब्राजील (Brazil) की सरकार को जब यह लगा कि वे दूसरे देश चले जायेंगे तब उसने नींद से तुरंत जागते हुए उन्हें ‘राष्ट्रीय खजाना’ घोषित कर दिया गया जो कि पेले के लिए एक अदभुत उपल्ब्धी थी।

66-1989 में डीपीआर (DPR) कोरिया ने पेले को चित्रित करते हुए उनपर एक डाक टिकट जारी किया।

77-रायटर्स समाचार एजेंसी द्वारा पेले को 1999 में एथलीट ऑफ द सेंचुरी अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

88-रायटर्स समाचार एजेंसी के अलावा इंटरनैशनल ओलंपिक कमिटी द्वारा भी 1999 में पेले कोएथलीट ऑफ द सेंचुरी अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

99-यूनीसेफ फुटबॉल आफ द सेंचुरी अवॉर्ड : 1999

110-1995 में क्रीड़ा के क्षेत्र में विशेष सेवाओं के लिये ब्राज़ील (Brazil)के स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।

111-1999 में टाइम्स मैगज़ीन ने पेले को 100 मोस्ट पॉपुलर लोगों की सूची में शामिल किया।

112-1999 में फ़्रांस (France) फुटबॉल के गोल्डन बॉल विजेता बने पेले।

113-आईएफएफएचएस (IFFHS) इंटरनैशनल फेडरेशन ऑफ़ फुटबॉल हिस्ट्री एंड स्टैटिस्टिक्स फुटबॉल प्लेयर ऑफ द सेंचुरी

114-आईएफएफएचएस (IFFHS) इंटरनैशनल फेडरेशन ऑफ़ फुटबॉल हिस्ट्री एंड स्टैटिस्टिक्स द्वारा पेले को 1999 में साउथ अमेरिका फुटबॉल आफ द सेंचुरी अवॉर्ड।

115-सन 2000 में दक्षिण अफ़्रीकी राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला (Nelson Rolihlahla Mandela)द्वारा पेले (pele) को लौरियस वर्ल्ड स्पोर्ट्स अवॉर्ड्स लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड्स से सम्मानित किया गया।

116-2005 में  बीबीसी (BBC) द्वारा पेले को  स्पोर्ट्स पर्सनालिटी ऑफ दि इयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

वहीं पेले को अपने देश ब्राजील (Brazil)की तरफ से भी कई सम्मान मिले।

फुटबॉल के बाद पेले का जीवन

फुटबॉल के बाद पेले के जीवन का सबसे खास क्षेत्र है, विभिन्न संस्थाओं के साथ उनका राजदूतात्मक कार्य जो कि अभी भी जारी है। 1992 में पेले (Pele)को पारिस्थिकी और पर्यावरण के लिये संयुक्त राष्ट्र का राजदूत नियुक्त किया गया था  उन्हें 1995 में क्रीड़ा के क्षेत्र में विशेष सेवाओं के लिये ब्राज़ील (Brazil)के स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। ब्राज़ीली राष्ट्रपति फर्नांडो हेनरिक कार्दोसो ने उन्हें क्रीड़ा के विलक्षण मंत्री के पद पर नियुक्त किया और उन्हें युनेस्को सद्भावना राजदूत बना दिया गया। उस समय उन्होंने ब्राज़ीली फुटबॉल में भ्रष्टाचार को कम करने के लिये एक कानून प्रस्तावित किया, जिसे पेले (Pele) कानून के नाम से जाना जाता है। पेले ने एक भ्रष्टाचार के मामले में लिप्त होने के आरोप के बाद 2001 में वह पद छोड़ दिया, हालांकि अभी तक कुछ भी सिद्ध नहीं हो पाया है। 1997 में उन्हें एक सम्माननीय नाइट कमांडर ऑफ दि आर्डर ऑफ दि ब्रिटिश एम्पायर बनाया गया। पेले ने 2002 में प्रीमियर लीग क्लब फुलहैम के लिये स्काउट का कार्य किया। इसके अलावा पेले ने कई आत्मकथाओं का भी प्रकाशन किया है।

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फिल्मों में दिखा पेले का जलवा

पेले (Pele) ने कई डाक्यूमेंटरी और अर्ध-डाक्यूमेंटरी फिल्मों में काम किया है इसके अलावा उन्होंने अनेकों संगीत रचनाएं बनाई हैं, जिनमें 1977 की फिल्म पेले का समूचा संगीत शामिल है। पेले जर्मन युद्ध के कैदियों के शिविर से बच निकलने की कोशिश के बारे में बनाई गई 1981 की फिल्म एस्केप टू विक्टरी में, समेत कई फिल्मों में देखे गए हैं। फिल्मों के अलावा पेले ने व्यवसाए के क्षेत्र में भी हाथ आजमाया।

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जब फुटबॉल को पेले ने कहा अलविदा

1971 को मारकाना स्टेडियम में 2 लाख लोगों की उपस्थिति में युगोस्लाविया के विरुद्ध खेलते हुये पेले (Pele) ने खेल जगत से संन्यास ले लिया।

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पेले (Pele) विश्व के सबसे चहेते खिलाड़ी माने जाते हैं। ‘काले हीरे’ के नाम से विख्यात पेले ने इंटली और अल्जीरिया व्दारा दी जा रही भारी प्रलोभन राशि को ठुकरा कर देशप्रेम का उत्तम उदाहरण प्रस्तुत किया है। मैदान पर गेंद को गोल में बदलने का अंदाज, उनकी दौड़ने की काबिलियत, कब कहा पर साथी खिलाड़ियों को पास देना है सभी विभागों में पेले (Pele) का कोई सानी नहीं था वे ब्राजील के सभी फुटबॉल खिलाड़ी के में सबसे अधिक पहचाने जाने वाला चेहरा है, पेले (Pele) 1958 से ब्राजीलियन फुटबॉल के लिए एक आइकॉन रहे है। इस बात पर हमेशा बहस होती है कि पेले और माराडोना (Maradona) में से कौन बेहतर है लेकिन अंत में यही माना गया कि पेले का कोई जवाब नहीं है। आज पेले को ब्राजील में कई बड़े टूर्नामेंटों के दौरान मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया जाता है। पिछले वर्ष रियों में हुए ओलंपिक खेलों के उद्धाटन समारोह में भी वो मुख्य अतिथि थे। पेले का नाम एक तरफ से फुटबॉल से पूरी तरह से जुड़ चुका है। पेले का नाम आते ही लोगों को फुटबॉल का मैदान दिखाई देने लगता है। वाकई में पेले (Pele) एक वो लीजेंट खिलाड़ी हैं जो विरलय ही इस धरती पर जन्म लेते हैं।

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