अखिलेश संग गठबंधन के बाद भी मायावती को सता रहा है इन दो चीजों का ‘डर’, पढ़ें पूरी खबर

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लोकसभा चुनाव में मोदी की बीजेपी को मात देने के लिए दो कट्टर विरोधी मानी जाने वाली पार्टियां अब एक साथ होती नजर आ रही हैं। किसी ने सही कहा है कि राजनीति अवसरों का खेल है, यहां कोई हमेशा के लिए दोस्त या दुश्मन नहीं होता। कल तक जो एक दूसरे की शक्ल नहीं देखना चाहते थे आज वो अपनी 23 साल पुरानी दुश्मनी भुलाकर एक साथ मंच पर आने के लिए तैयार हैं। शनिवार को लखनऊ में ऐसी ही एक ऐतिहासिक तस्वीर देखने को मिली, जहां समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने गठबंधन का औपचारिक ऐलान किया। इसके साथ ही उन्होंने सीटों के बंटवारे भी कर लिया है। दोनों ही पार्टियां 38-38 सीटों पर यूपी लोकसभा चुनाव लड़ेगी।

हालांकि अपने गठबंधन का ऐलान करने के साथ ही सपा और बसपा यह सोच रही हैं कि अब वे 80 सीटों वाले यूपी में लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान बीजेपी को रोकने में कामयाब हो पाएगी और केंद्र से वे बीजेपी की सत्ता को उखाड़ फेंकेंगी लेकिन साथ में उन्होंने यह भी कह दिया है कि अगर पूर्व की तरह वोटिंग मशीन में गड़बड़ी नहीं की गई और राम मंदिर के मामले में जनभावनाओं को भड़काया नहीं गया तो बेशक वे ही बहुमत हासिल करेंगे। मायावती के बयान से यह साफ है कि वे राम मंदिर मामले और ईवीएम को लेकर अब भी चिंतित हैं।

इससे पहले मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि, 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने बेईमानी से सत्ता हासिल की थी। हमारा गठबंधन इस जनविरोधी सरकार को सत्ता में आने से रोकेगा। बीजेपी की अहंकारी सरकार से लोग परेशान हैं। जिस तरह हमने मिलकर उपचुनावों में बीजेपी को हराया है, उसी तरह हम आगामी लोकसभा चुनाव में बीजेपी को हराएंगे।

वहीं, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा है कि, पूरे देश में अराजकता का माहौल है। प्रदेश में भूखमरी और गरीबी चरम पर है। बीजेपी धर्म के नाम पर राजनीति कर रही है। बीजेपी ने समाज को नाम पर बांटा, बीजेपी के राज में हर वर्ग परेशान है। हमारे गठबंधन से बीजेपी के अन्याय और अत्याचार का अंत होगा।

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