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इंसानी जगत के लिए आने वाली सबसे बड़ी चुनौती ‘ग्लोबल वार्मिंग’ बहुत कम रह गया है वक्त

ग्लोबल वार्मिंग जिसकी चपेट में आज दुनिया का हर देश जूझ रहा है। इसका मुख्य वजह लगातार पृथ्वी के तापमान के बढ़ने को बताया जा रहा है। मौजूदा समय में इस मुद्दे पर वैज्ञानिकों की आम राय यही है कि 1950 के समय से तेजी से होता औद्योगिकरण इस समस्या के लिए मुख्य रुप से जिम्मेदार है। 1950 से अब तक 0.8 डिग्री सेल्सियस पृथ्वी के तापमान में बढ़ौतरी हुई है। इसका सीधे असर आज हमारी पृथ्वी के मौसम चक्र पर पड़ रहा है, जिसकी वजह से मौसम में बदलाव भी असंतुलित हो गया है।

तापमान के लगातार इस तरह बढ़ने से दुनियाभर के देश चिंतित है और इस पर एकसाथ आकर कोई बड़ा कदम उठाने की कोशिश में है। अगर जल्द ही ऐसा नहीं किया गया तो आने वाले 50-100 सालों में तापमान के बढ़ने से पृथ्वी पर जनजीवन पूरी तरह से मुश्किल हो जाएगा। वैज्ञानिकों का दावा है कि आने वाले कुछ दशकों में ही 2-4 डिग्री सेल्सियस तापमान का बढ़ना तय है जिसकी वजह से पृथ्वी पर जीवन का खत्म होना भी संभव है।

आपको बता दें कि अगर ऐसे ही औद्योगिक गतिविधियां बढ़ती रही और जल्द ही इन पर काबू नहीं किया गया तो आने वाले दशकों में पृथ्वी पर चलने वाली हवाएं पहले से अधिक गर्म हो जाएंगी और पृथ्वी के कई हिस्से लू की चपेट में आ जाएंगे। साथ ही साथ कई स्तर पर पर्यावरण का विकास भी इससे प्रभावित होगा जिसकी वजह से समुन्द्र-तल में 2-4 फीट का बढ़ सकता है, ऐसे में समुन्द्र किनारे बसे देश व इलाकों का बाढ़ की चपेट में आना तय है।

जहां एक ओर तापमान बढ़ रहा है वहीं दूसरी ओर समुन्द्र तल का स्तर बढ़ना ऐसे में मॉनसून के दौरान जरुरत से ज्यादा बारिश और बाढ़ आना भी संभव है। वहीं अधिक बारिश और लंबे मॉनसून से गर्मी का मौसम लंबा हो जाएंगा जिससे सूखे जैसी स्थिती का भी सामना करना पड़ सकता है।

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