एक ऐसी खूबसूरत जगह, जहां घर से भागे हुए प्रेमी जोड़ों को दी जाती है पनाह

by Renu Arya Posted on 0 comments
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हिमाचल प्रदेश में जितना ही अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर है उतना ही यहां भारतीय परंपराओ और मानयताओं को माना जाता है। लोग ज्यादातर हिमाचल यहां की सुंदरता को निहारने आते है। लेकिन आज हम आपको हिमाचल की सुंदरता के अलावा भी वहां की एक ऐसी खासियत के बारे में आपको बता रहे है जिसे शायद ही कोई जानता होगा। हिमाचल प्रदेश में कुल्लू के शांघड़ गांव के देवता शंगचूल महादेव के बारे में जहां घर भागे हुए प्रेमी जोड़ों को पनाह दी जाती है।

शांघड़ गांव कुल्लू की सेंज वैली में है।

पांडव के जमाने के शांघड़ गांव में कई इतिहास से जुड़ी धरोहरें है। इन्ही में से एक हैं यहां का शंगचुल महादेव मंदिर।

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डलहौजी के खज्जियार की तरह ग्रास फील्ड

शंगचूल महादेव के यहां किसी भी जाति या धर्म के प्रेमी जोड़ें अगर एक बार आ जायें फिर जब तक वह इस मंदिर की सीमा में हैं उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

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शंगचुल देवता का मंदिर

यहां तक की उनके परिवार वाले भी उन्हें कुछ नहीं कह सकते। शंगचुल महादेव मंदिर करीब 100 बीघा के मैदान तक फैला हुआ है। जब इस सीमा में कोई प्रेमी जोड़ा पहुंचता है तब से ही उसे देवता की शरण में आया हुआ मान लिया जाता है।

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जले हुए मंदिर को दोबारा बनाया गया

अपनी विरासत के नियमों का पालन कर रहे इस गांव में पुलिस के आने पर भी रोक है। साथ ही यहां शराब, सिगरेट और चमड़े जैसी चीजें नहीं ले जायी जा सकती, और न कोई हथियार लेकर यहां आ सकता है। यहां किसी तरह की लड़ाई या झगड़ा करना या फिर ऊंची आवाज में बात करना भी मना है। यहां देवता का ही फैसला माना जाता है।

शंगचुल देवता की प्रतिमा

यहां घर से भागकर आए प्रेमी जोड़ों के मामले जब तक निपट नहीं जाते तब तक मंदिर के पंडित उन लोगों की खातिरदारी करते हैं

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शंगचुल देवता का एरिया

गांव में ऐसा कहा जाता है कि अज्ञातवास के समय पांडव यहां कुछ समय के लिए रूके थे। कौरव उनका पीछा करते हुए यहां आए थे। तब शंगचूल महादेव ने कौरवों को रोका और कहा कि यह मेरा क्षेत्र है और जो भी मेरी शरण में आएगा उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। इस समय महादेव के डर से कौरव वापस लौट गए थे।

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पूरे 100 बीघा में फैला है

तब से लेकर आज तक जब कभी समाज का ठुकराया हुआ कोई शख्स या प्रेमी जोड़ा यहां पनाह लेने के लिए आता है, तो महादेव ही उसकी देखरेख करते हैं।