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मिलिए ऐसे कुत्तों से जो असल जिंदगी में है करोड़पति, देखकर रह जाएंगे हैरान

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सभी लोगों ने अक्षय कुमार की बॉलीवुड फिल्म ‘एंटरटेंमेंट’ तो देखी ही होगी, इस फिल्म में एक कुत्ते को करोड़पति बनते हुए दिखाया गया है। यह तो सिर्फ एक फिल्मी की कहानी है लेकिन अगर हम आपको यह बात बताए कि हमारी असल जिंदगी में भी एक ऐसा गांव है जहां का हर एक कुत्ता करोड़पति है तो शायद आपको इस बात पर विश्वास नहीं होगा। इसलिए हम आपको बताने जा रहे है एक सच्ची कहानी।

हमारी इतनी बातों के बाद तो आपके मन में यही विचार आ रहा होगा कि दुनिया कितनी बदल रही है। इंसानों को छोड़कर जानवर करोड़पति बन रहे हैं और यह कमाल का मामला गुजरात के मेहसाणा से सामने आया है लेकिन उससे भी बड़ा कमाल यह हुआ कि ‘एंटरटेंमेंट’ नामक फिल्म में सिर्फ एक कुत्ता करोड़पति बनता है लेकिन यहां तो 70 कुत्ते करोड़पति हैं।

टीओआई द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात के मेहसाणा के पास वाले पंचोट गांव ‘करोड़पति कुत्तों के गांव’ के नाम से काफी फेमस है। यहां बाइपास से सटे हुए ‘मढ़ नी पती कुतरिया ट्रस्ट’ के चर्चे आज पुरी दुनिया में हो रहे हैं और यही वो जगह है जहां इन 70 करोड़पति कुत्तों का बसेरा है। इसके साथ ही आपको बता दें कि इस ट्रस्ट के पास कम से कम 21 बीघा जमीन है और इस जमीन की कीमत कम से कम 3.5 करोड़ रुपए प्रति बीघा है। तो इसका हिसाब लगाए तो वहां का हर एक कुत्ता करोड़पति है। इस जमीन की कीमत के हिसाब से यहां का हर एक कुत्ता लगभग 1 करोड़ रुपए का मालिक है। इस ट्रस्ट को छगनभाई पटेल नाम का एक शख्स चलाता हैं और वह इस ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। छगनभाई इन कुत्तों की बहुत देखभाल करते हैं और इस ट्रस्ट की शुरुआत अमीरों ने जमीन के छोटे-छोटे टुकड़ों को दान देकर की थी। जो आज तक चली आ रही है। यह जीवदया को दर्शाती है।

असल में जिस समय की यह बात है उस समय जमीनों की ज्यादा कीमत नहीं हुआ करती थी। कुछ मामलों में लोगों ने टैक्स न दे पाने की वजह से अपनी जमीनें ही दान कर दी। पटेल किसानों के एक समूह ने 70-80 साल पहले इस जमीन का रख-रखाव करना शुरू किया था। 70 साल पहले जमीन ट्रस्ट के पास गई लेकिन आज भी जमीन के कागजों में उनके मालिकों का ही नाम दर्ज है। इस घटना की सबसे अच्छी बात तो यह है कि जमीनों के दाम बढ़ने के बाद भी किसी ने अपनी दान की हुई जमीन को वापस नहीं लिया। यहां के लोगों का मानना है कि सामाजिक कार्य के लिए दिया गया दान वापस नहीं लेना चाहिए।

 

यह काम किस प्रकार करता है

इसमें सिर्फ एक ही इंसान नहीं बल्कि पूरा गांव ही स्थानीय कुत्तों की सेवा में शामिल है। यहां ट्रस्ट से संबंधित प्रत्येक प्लॉट हर साल नीलाम होता है। जो सबसे ज्यादा बोली लगाता है उसे एक साल के लिए इस जमीन का अधिकार सौंप दिया जाता है। इसके जरिए ट्रस्ट धनोपार्जन करता है, जो इन कुत्तों की सेवा में खर्च किया जाता है। ट्रस्ट में 15 लोग स्वैच्छिक रूप से कुत्तों को खिलाने पिलाने की जिम्मेदारी लेते हैं। ट्रस्ट के लिए आटा चक्की मालिक आटा के लिए कोई शुल्क नहीं लेता है।

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