सुनिए नुसरत फतेह अली खान की आवाज में आज की नज्म

by rohit patwal Posted on 79 views 0 comments
today nazm nusrat

नुसरत फतेह अली खान न सिर्फ एक सिंगर थे बल्कि वह अपने आप में ही एक कमाल की शख्सियत भी थे। नुसरहत साहब को सुनना खुद को सुकुन देने के बराबर होता है। इस बात से कोई भी फर्क नहीं पड़ता कि आप उन्हें कितनी बार सुन चुके हैं, उन्हें हर बार सुनना पिछले से भी ज्यादा अलग और अच्छा अनुभव कराता है।

बॉलीवुड के जाने माने डायरेक्टर ने एक बार कहा था, ”नुसरत फतेह अली जी के साथ काम करना भगवान को बेहद करीब से मिलने जैसा था।” इससे ज्यादा बेहतर क्या हो सकता है कि हम एक बेहद खास पर्सनैलिटी को बयां कर रहे हैं। नुसरत साहब की आवाज का जादू ऐसा है कि बस अगर कोई उन्हें सुन ले तो वो उनका ही होकर रह जाता है। उनके गाए हुए ‘मेरे रश्के कमर’, ‘ये जो हल्का हल्का सुरुर है’ उनकी कुछ ऐसी पेशकर है जो पीढ़ी दर पीढ़ी गुनगुनाते ही जाएंगे।

एक बार लंदन 1985 में वर्ल्ड ऑफ म्यूजिक आर्ट एंड डांस फेस्टिवल में नुसरत फतेह अली खान ने जब गाना गाया था, तो उस समय सभी उनकी आवाज के दिवाने हो गए। जिसने भी उनकी आवाज को सुना उनके रोंगटे खड़े हो गए और सभी नुसरत साहब की आवाज पर झुमने लगे। उनके पिता नहीं चाहते थे कि उनका बेटा भी एक कव्वाल बने लेकिन वो एक हुनर जो नुसरत साहब के पास था छुपाए नहीं छुपा।

नुसरत साहब की आवाज में वो जादू था कि जिन्हें पंजाबी और उर्दू की जबान नहीं आती वो भी उनके गाए हुए गानों पर सब भूलकर बस उनके गाए गानों पर थरकने लगता है। उन्होंने ‘मेरा पिया घर आया’, ‘पिया रे-पिया रे’,‘सानू एक पल चैन, ‘तेरे बिन’, ‘प्यार नहीं करना’, ‘साया भी जब साथ छोड़ जाये’, ‘सांसों की माला पे’ ‘अफरीन अफरीन’, जैसे अनेक गाने गाएं है। जो सभी अपने समय के हिट गानों में से एक हैं।

आरत में भी नुसरत साहब के फैंस की कमी नहीं है। नुसरत साहब ने बॉलीवुड इंडस्ट्री में गायिकी के लिए अपना एक अहम योगदान दिया है। पूरी दुनिया एक अलग ही शोक की कश्ती में डूब गई थी जब नुसरत साहब इस दुनिया को छोड़ कर चले गए थे। नुसरत साहब 16 अगस्त 1997 को अपनी आवाज का जादू पूरी दुनिया में बिखेर कर सबको अलविदा कह गए।

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