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सुनिए गुलजार की आवाज में आज की नज्म

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गुलजार का असली नाम संपूर्ण सिंह कालरा है। वह एक प्रसिद्ध गीतकार है। इसके अतिरिक्त वह एक कवि, पटकथा लेखक, फिल्म निर्देशक तथा नाटककार हैं। उनकी रचनाए ज्यादातर हिंदी उर्दू तथा पंजाबी में हैं, लेकिन ब्रज भाषा, खड़ी बोली, मारवाड़ी और हरियाणवी में भी इन्होंने रचनाये की।

गुलजार को 2002 में सहित्य अकादमी पुरस्कार और 2008 में भारत सरकार के द्वारा दिया जाने वाला तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से भी सम्मानित किया जा चुका है। 2009 में डैनी बॉयल निर्देशित फिल्म स्लम्डॉग में उनके द्वारा लिखे गीत जय हो के लिये उन्हे सर्वश्रेष्ठ गीत का अॉस्कर पुरस्कार मिल चुका है। इसी गीत के लिये उन्हें ग्रैमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

गुलजार का जन्म झेलम जिला पंजाब के दीना गांव में, जो अब पाकिस्तान में है। गुलजार अपने पिता की दूसरी पत्नी की इकलौती संतान हैं। उनकी मां उन्हें बचपन में ही छोङ कर चल बसीं। मां के आंचल की छांव और पिता का दुलार भी नहीं मिला। वह नौ भाई-बहन में चौथे नंबर पर थे। बंट्वारे के बाद उनका परिवार आकर बस गया, वहीं गुलजार साहब मुंबई चले गये। वर्ली के एक गेरेज में वे बतौर मेकेनिक काम करने लगे और खाली समय में कवितायें लिखने लगे। फिल्म इंडस्ट्री में उन्होंने बिमल राय, हृषिकेश मुखर्जी और हेमंत कुमार के सहायक के तौर पर काम शुरू किया। बिमल राय की फिल्म बंदनी के लिए गुलजार ने अपना पहला गीत लिखा। गुलजार त्रिवेणी छ्न्द के सृजक हैं।

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