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जानिए क्यों किया जाता है मुस्लिम लड़कियों का खतना, सच्चाई जो कर देगी आपके हैरान

जहां देशभर में लोगों ने तीन तलाक के खिलाफ अपनी आवाज उठाई है इसके बाद से ही अब मुस्लिम महिलाएं खुल कर सामने आ रही है। अब मुस्लिम महिलाएं खतने को लेकर भी बोलने लगी हैं। बोहरा मुस्लिम समुदाय की एक महिला जिनका नाम मासूमा रानाल्वी, उन्होंने पीएम के नाम एक खुला लेटर लिखा जिसमें खतना की इस अशुभ रिवाज को रोकने की मांग उठाई है।

बोहरा मुस्लिम समुदाय की मासूमा रानाल्वी ने लेटर में लिखा कि बोहरा समुदाय में सालों से ‘खतना’ (ख़फ्ज़) के रिवाज को चलाया जा रहा है। बोहरा जात से शिया मुस्लिम है। उन्होंने कहा कि उनके समुदाय में आज भी छोटी बच्चियों के साथ ये बदसलूकी की जाती है। वो बताती है कि जैसे ही किसी भी बच्ची की उम्र 7 साल की हो जाती है वैसे ही उसकी मां, दादी या कोई अपनी घर की महिला उसे एक दाई या फिर लोकल डॉक्टर के पास ले जाती है।

दाई या फिर लोकल डॉक्टर के पास ले जाते वक्त किसी भी बच्ची को ये नहीं बताया जाता कि उसे कहां ले जाया जा रहा है या उसके साथ क्या होने वाला है। वहां जाते ही दाई, आया या फिर डॉक्टर उस बच्ची के प्राइवेट अंग को काट देते है। जिसके बाद इस घटिया रिवाज का दर्द हमेशा के लिए उस बच्ची के साथ रह जाता है। कई सालों से इस रिवाज को इसलिए चलाया जा रहा है ताकि कोई भी बच्ची या महिला अपनी यौन इच्छाओं को जाहिर ना कर सके।

जानकारी के लिए बता दें कि महिलाओं के खतना के खिलाफ 6 फरवरी को यूएन ने जीरो टॉलरेंस का अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किया है। इस पिछले साल की थीम ‘साल 2030 तक एफजीएम को हटाने के जरिए नए ग्लोबल लक्ष्यों को पाना रखा गया है। दुनियाभर में करीब 20 करोड़ से ज्यादा बच्चियों और लड़कियों का हर साल बेरहमी से खतना किया जाता है। अजीब बात ये है कि मिस्र, इथियोपिया और इंडोनेशिया जैसे तीन देशों में सबसे ज्यादा आधी से ज्यादा बच्चियां का खतना किया जाता है।

भारत में दाऊदी बोहरा एक मजबूत व्यापारी मुस्लिम समुदाय से है जो इसे मानते हैं। मुंबई और इसके आसपास के इलाकों में करीब 10 लाख लोग रहते है। साउथ मुंबई के मालाबार हिल इलाके में इनका हेडक्वार्टर है। यहां भारत के कुछ सबसे अमीर लोग रहते है। यहीं सैयदना बैठते है जो बोहरा के धर्म गुरु है।

पीएम को खुला खत लिखने वाली रानालवी कहती है, “वे हमेशा कहते है, छोटा सा कट है, बस मामूली सा कट है। छोटी सी बात है। लेकिन ऐसी घटनाएं हो चुकी है जहां ये छोटे से कट खतरनाक साबित हुए है।”

असल में इस खतने की वजह से बहुत ज्यादा खून बह जाता है और कई तरह के हेल्थ प्रॉबलम्स भी हो जाते है। इनमें सिस्ट बनना, संक्रमण, बांझपन और बच्चे के जन्म के समय पेरशानी बढ़ जाती है और इसमें नवजात की मृत्यु का जोखिम भी बढ़ जाता है।

एक इंटरव्यू के दौरान रानालवी ने बताया कि जब वह 7 साल की थी तो उनकी मां ने उनसे टॉफी का वादा किया और उन्हें घर के पीछे के रास्ते से एक अंधेरे से कमरे में ले गई जहां उन्हें कसकर पकड़ लिया गया और फिर उन्हें बस वो भयानक दर्द ही याद है।

घर आते हुए पूरा रास्ता वो रोती रही। यहां तक कि अगले 20-25 साल तक उन्हें समझ नहीं आया कि उनके साथ आखिर हुआ क्या था। फिर एक दिन उन्होनें महिला खतना के बारे में पढ़ा तब वो इस बात को समझी। भारत में अब तक इस बारे में कोई कानून नहीं बना है।

साल 2015 में बोहरा समुदाय की कुछ महिलाओं ने एकजुट होकर ‘We Speak Out On FGM’ नाम से एक कैंपेन शुरू किया और वहां उन्होनें आपस में अपने दुख और कहानियां एक-दूसरे को बताई। बाद में इन्होंने Change.org पर एक कैंपन की शुरुआत की जिसमें इस रिवाज को बंद करने के लिए 9 हजार से भी ज्यादा साइन मिल गए है।

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