विधानसभा हार से सबक लेते हुए मोदी का बड़ा एक्शन प्लान, सरकारी खजाने पर बढ़ेगा करोड़ों का बोझ

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लोकसभा चुनाव का दबाव मोदी सरकार पर साफ तौर से नजर आ रहा है। यही वजह है कि मोदी सरकार एक के बाद एक जीएसटी से लेकर किसानों के कर्ज और सवर्ण आरक्षण जैसे बड़े मुद्दों पर फैसला कर रही है। वहीं मोदी सरकार की आगे भी यही कोशिश है कि वो किसी तरह से जनता को कुछ आकर्षण दिखाकर उन पर अपनी बेहतरीन छाप छोड़ने में कामयाब हो जाए। अब खबर है कि चुनाव से पहले पीएम मोदी लुभावनी घोषणाओं से देश की अर्थव्यवस्था पर 1 लाख करोड़ रुपये का बोझ बढ़ा सकते हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इन अतिरिक्त खर्चों और राजस्व के नुकसान का बोझ चुनाव के बाद आने वाली नई सरकार को उठाना पड़ेगा।

सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, अंतरिम बजट में सरकार किसानों के लिए बड़े ऐलान कर सकती है। किसानों के खातों में सीधे रकम ट्रांसफर और ब्याज मुक्त कर्ज की घोषणा किए जाने की भी संभावना है। ब्याज मुक्त कर्ज की योजना लागू की गई तो सरकारी खजाने पर हर साल 12,000 करोड़ रुपए का बोझ बढ़ जाएगा। इसके अलावा दूसरी योजनाओं के लिए 40,000 करोड़ रुपए की जरूरत पड़ेगी।

रिपोर्ट की माने तो सरकार किसानों को प्रति हेक्टेयर जमीन के हिसाब से 2,000 से 4,000 रुपए देने की योजना पर विचार कर रही है। यह स्कीम फायदेमंद साबित हो सकती है लेकिन इसके परिणाम भी बेहद खर्चीले होंगे। अगर इस योजना को लागू किया जाता है तो ब्याज मुक्त कर्ज जैसी दूसरी योजनाएं नहीं लाई जाएंगी। निजी और व्यावसायिक टैक्स छूट की घोषणा करने से 25,000 करोड़ रुपए तक का वित्तीय घाटा सरकारी खजाने पर पड़ सकता है। सीमेंट पर जीएसटी की दर 28% से घटाकर 18% किए जाने का प्रस्ताव है। इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने से हर साल 13,000 करोड़ रुपए का राजस्व घाटा होगा।

पिछले महीने राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में बीजेपी की हार के बाद मोदी सरकार की अगले चुनाव को लेकर चिंता बढ़ गई है। फसलों की कम कीमतों की वजह से किसानों की नाराजगी विधानसभा चुनावों में एक अहम मुद्दा रही थी। बीजेपी के आर्थिक मामलों के प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने बताया है कि, किसानों की समस्याओं का समाधान सबसे अहम है। इकोनॉमी में वित्तीय घाटे जैसे पैमाने नहीं बल्कि ग्रोथ देखी जाती है।

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