कभी स्कूल में पढ़ाया करती थी मायावती, इस तरह टीचर से बसपा सुप्रीमो बनने का सफर किया तय

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बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती आज यानी 15 जनवरी मंगलवार को अपना 63वां जन्मदिन मना रही हैं। मायावती आज की भारतीय राजनीति में एक जाना माना चेहरा है, जिन्होंने उत्तर प्रदेश की जमीन से सियासी पारी खेलनी शुरु की थी और आज देश में उन्हें बड़े राजनेता के तौर पर जाना जाता है। आपको बता दें कि मायावती चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। साल 1995 में मायावती पहली बार यूपी के मुख्यमंत्री पद पर बैठी थी। आज उनके जन्मदिन के मौके पर जानते हैं उनकी जिंदगी के कुछ खास पहलू..

मायावती का जन्म 15 जनवरी 1956 को दिल्ली के श्रीमति सुचेता कृपलानी अस्पताल में हुआ था। उनके पिता प्रभु दास गौतमबुद्ध नगर के बादलपुर के एक पोस्ट ऑफिस में काम किया करते थे। मायावती ने 1975 में दिल्ली की कालिंदी कॉलेज से बीए की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से ही एलएलबी की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद मायावती ने बीएड की पढ़ाई की और दिल्ली के इंद्रपुरी जेजे कॉलोनी में बतौर टीचर पढ़ाना शुरु कर दिया। इसके साथ ही बसपा सुप्रीमो आईएएस के लिए भी तैयारी कर रही थी।

अपनी पढ़ाई और काम के बीच ही उनकी मुलाकात नेता कांशीराम से हो गई। जिसके कुछ सालों बाद यानी 1984 में मायावती बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गई। अपने राजनीति सफर शुरु करने के बाद साल 1989 में वो पहली बार सांसद चुनी गई। 15 दिसंबर 2001 को लखनऊ की एक रैली को संबोधित करते हुए कांशी राम ने मायावती को उत्तराधिकारी बताया था।

इसके बाद मायावती राजनीति में सक्रिय रही और 18 सितंबर 2003 को उन्हें बसपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया। इसके बाद 27 अगस्त 2006 को दूसरी बार और 30 अगस्त 2014 को लगातार तीसरी बार मायावती को पार्टी अध्यक्ष चुना गया।

कैराना से लड़ा पहला लोकसभा चुनाव

मायावती ने अपना पहला चुनाव साल 1984 में उत्तर प्रदेश में कैराना लोकसभा सीट से लड़ा था। इसके बाद दूसरी बार साल 1985 में बिजनौर और फिर 1987 में हरिद्वार से मायावती चुनावी मैदान में थी। साल 1989 में मायावती को बिजनौर से जीत मिली। मायावती को कुल 183,189 वोट मिले थे और हार जीत का अंतर 8,879 वोटों का था।

1994 में पहली बार बनीं राज्यसभा सांसद

मायावती पहली बार साल 1994 में राज्यसभा सांसद बनीं थी। इसके बाद 1995 में गठबंधन की सरकार बनाते हुए मुख्यमंत्री बनीं। उस समय तक मायावती राज्य की सबसे कम उम्र में मुख्यमंत्री बनने वाली महिला थीं।

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