मायावती और तेजस्वी की मुलाकात के क्या हैं मायने?

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यूपी में सपा और बसपा के गठबंधन की घोषणा के बाद आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने मायावती से रविवार देर रात मुलाकात की और उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दी।    उसके बाद तेजस्वी यादव ने सपा अध्यक्ष और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने बहुत से मुद्दों पर चर्चा की। दोनों नेताओं की इस मुलाकात को इस साल होने वाले लोकसभा चुनावों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। वहीं, दोनों ही नेताओं ने इस मुलाकात को औपचारिक बताया है लेकिन जानकारों की माने तो माया-तेजस्वी-अखिलेश की इस मुलाकात के पीछे तीनों राजनीतिक दलों का सियासी मकसद छिपा हुआ है।

बता दें कि मायावती और तेजस्वी यादव के बीच करीब डेढ़ घंटे तक मुलाकात चली। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मुलाकात के दौरान तेजस्वी यादव और बसपा अध्यक्ष के बीच बिहार में महागठबंधन को लेकर बातचीत भी हुई। इस दौरान तेजस्वी ने उन्हें बिहार में महागठबंधन में शामिल होने का न्योता दिया। तेजस्वी यादव ने कहा कि कांग्रेस हमारे साथ है और अगर आप भी इसका हिस्सा बने तो हमारे लिए काफी बेहतर होगा।

वहीं, तेजस्वी यादव ने बसपा के लिए बिहार में एक से दो सीटें देने की रजामंदी भी दिखाई। हालांकि तेजस्वी ने कहा कि इसके बदले आरजेडी के उम्मीदवार को कैराना उपचुनाव के मॉडल पर चुनाव लड़वाया जाए, यानी आरजेडी उम्मीदवार को सपा और बसपा गठबंधन अपने चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़वाए। इसके लिए आरजेडी ने यूपी की एक लोकसभा सीट पर अपनी दावेदारी भी पेश की है।

बिहार प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र प्रसाद यादव

सूत्रों के मुताबिक समाजवादी पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र प्रसाद यादव को झंझारपुर लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में उतार सकती है। देवेंद्र यादव सपा से पहले आरजेडी और जेडीयू के कद्दावर नेता रहे हैं। वो झंझारपुर से 5 बार लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं। सपा-बसपा गठबंधन आरजेडी के यूपी अध्यक्ष अशोक सिंह को फतेहपुर लोकसभा सीट से अपने उम्मीदवार के तौर पर चुनावी मैदान में उतार सकती है।

 

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