लोकसभा चुनाव से पहले पीएम मोदी ला पाएंगे सवर्ण आरक्षण? जानिए क्या है सबसे बड़ी चुनौती 

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मोदी सरकार द्वारा मंगलवार को लिए गए बड़े फैसले से राजनीति में काफी गहमागहमी छा गई है। आपको बता दें कि मोदी सरकार ने सवर्ण जाति के लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने की बात की है और यह आरक्षण आर्थिक रुप से कमजोर सवर्णों को ही दिया जाएगा। ऐसा पहली बार होगा कि आरक्षण जाति नहीं बल्कि आर्थिक आधार पर होगा। इसलिए संविधान में संशोधन की जरुरत पड़ेगी। आपको बता दें साल 1950 में संविधान के लागू होने का बद अब तक 101 संशोधन किए जा चुके हैं। हालांकि सवर्ण जाति के लिए संशोधन की प्रक्रिया कितनी जटिल इसके लिए ये बातें जरुरी हैं।

आपको बता दें कि, संशोधन की जरूरत इसलिए है क्योंकि सवर्ण आरक्षण मौजूदा 49.5 फीसदी आरक्षण की सीमा के ऊपर जा रहा है। इसके लिए संविधान की धारा 15 और 16 में बदलाव करना जरुरी होगा। भारत के संविधान में संशोधन की मुश्किलों के बावजूद यह दुनिया में सबसे ज्यादा बार संशोधित किया जाने वाला दस्तावेज है। इसमें हर साल में औसतन दो संशोधन किए जाते हैं।

भारत के सविंधान में कुछ भी बदलाव करने के लिए बिल लाया जाता है जिसका अधिकार देश की संसद के पास है। वहीं भारत के संविधान में कुछ भी बदलाव करने के प्रक्रिया भी जटिल मानी जाती है। क्योंकि इसके लिए संशोधन विधेयक संसद के दोनों सदनों में जरुरत मुताबिक बहुमत से पास होना जरुरी है। यही वजह है कि जब तक सत्ता और विपक्षी पार्टी इस पर सहमत नहीं होंगी तब तक विधेयक का पारित होना मुश्किल है। कुछ मामलों में ऐसे संशोधन को राज्यों के विधानमंडल में भी पारित करना पड़ता है।

जानिए क्या है संशोधन की प्रक्रिया

संशोधन की प्रक्रिया संसद में होती है, पहले इसे लोकसभा में पेश किया जाता है फिर राज्यसभा में। दोनों सदनों में इसे विधेयक के रूप में पेश किया जाता है। एक के बाद एक दोनों सदनों में विधेयक का पास होना जरुरी है। हर सदन में दो-तिहाई बहुमत से इसका अनुमोदन होना जरूरी है, इसके बाद कुछ खास संशोधन को राज्यों की विधायकों में भी पारित करना होता है। यह सारी प्रक्रिया होने के बाद विधेयक को राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है। राष्ट्रपति इसे मंजूर कर दें तो यह कानून में बदल जाता है। हालांकि राष्ट्रपति के पास जाने पर रुकावट की संभावनाएं न के बराबर होती हैं।

अनुच्छेद 15 में संशोधन

सवर्णों को आरक्षण देने के लिए सरकार को संविधान के अनुच्छेद 15 में संशोधन करना होगा। 10 फीसदी कोटा तय करने के लिए इसमें धारा चार जोड़ी जाएगी। संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए दोनों सदनों में कम से कम दो-तिहाई बहुमत जरूरी है। सरकार को लेकसभा में तो बहुमत है लेकिन राज्यसभा में नहीं। बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने अपने सांसदों को व्हिप जारी कर लोकसभा में मौजूद रहने को कहा है।

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