जानिए… सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल सरकार और केंद्र सरकार को क्या-क्या दिए अधिकार

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दिल्ली की केजरीवाल सरकार और उपराज्यपाल के बीच चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की पीठ ने कुल 6 मुद्दों पर अपना फैसला सुनाया। लेकिन जिस मामले पर सबकी नज़र थी वह मामला अभी लटका हुआ है। दिल्ली में केंद्रीय कैडर के अधिकारियों की ट्रांसफर और पोस्टिंग का मुद्दा अभी बड़ी बेंच के हवाले कर दिया गया है और इस पर फैसला आना अभी बाकी है।

अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग का मामला

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि ग्रेड 1, ग्रेड 2 लेवल के अधिकारियों का मामला केंद्र सरकार के पास और ग्रेड 3, ग्रेड 4 के अधिकारियों का मामला दिल्ली सरकार के पास रहेगा। दोनों जजों के बीच इस मुद्दे पर एक सहमति नहीं बन पाई है, यही कारण है कि इस मसले को बड़ी बेंच के हवाले कर दिया है। अब तीन जजों की बेंच मामले की सुनवाई करेगी।

एंटी करप्शन ब्रांच
एंटी करप्शन ब्रांच के अधिकारियों का मुद्दे पर केजरीवाल सरकार लगातार आवाज उठाती रही है। लेकिन इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट से दिल्ली सरकार को झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने ACB का अधिकार केंद्र सरकार को सौंप दिया है।

कमीशन ऑफ इन्क्वायरी
किसी भी मामले में जांच बिठाने का अधिकार यानी कमीशन ऑफ इन्क्वायरी का अधिकार भी सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को दिया है।

बिजली सुधार का मुद्दा
राजधानी में इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड का मुद्दा काफी अहम है, सुप्रीम कोर्ट ने इससे जुड़े सभी अधिकार दिल्ली सरकार को दिए हैं।

सर्किल रेट किसका?
सुप्रीम कोर्ट ने राजधानी में जमीन का अधिकार भले ही केंद्र सरकार को दिया हो, लेकिन राजधानी में सर्किल रेट तय करने अधिकार दिल्ली सरकार के पास ही रहेगा। यानी जमीन का सर्किल रेट केजरीवाल सरकार तय करेगी। इसके अलावा किसानों को मिलने वाला मुआवजा और अन्य मसलों का अधिकार भी दिल्ली सरकार के पास होगा।

सरकारी वकील की नियुक्ति
किसी भी मामले में दिल्ली की ओर से सरकारी वकील की नियुक्ति करने का अधिकारी दिल्ली सरकार को होगा। यानी राज्य की ओर से किसी भी कोर्ट में अगुवाई कौन करेगा, इस पर दिल्ली सरकार फैसला लेगी।

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