यूपी में टूट सकता है सपा-बसपा गठबंधन, बस अगर ये महिला एक बार कर दे अखिलेश को इशारा

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उत्तर प्रदेश में इन दिनों राजनीति का सियासी पारा तेजी से चढ़ता जा रहा है और चढ़े भी क्यों ना.. इस साल लोकसभा चुनाव जो हैं  और देश की सत्ता पर काबिज होने का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर ही गुजरता है। वैसे भी इन दिनों मोदी सरकार को केंद्र से बेदखल करने को लिए वो सारी राजनीतिक पार्टियां एक हो गईं हैं जो कभी एक-दूसरे को फूटी आंख देखना पसंद नहीं करती थी। ऐसा ही कुछ उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी देखने को मिल रहा है। पिछले 23 सालों से एक दूसरे की धुर विरोधी रही सपा-बसपा अब मिल गए हैं। दोनों ने उत्तर प्रदेश में साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया है। जिसमें दोनों ही पार्टियां 38-38 सीटों पर मिलकर चुनाव लड़ेंगी तो वहीं उन्होंने 2 सीटें अमेठी और रायबरेली सोनिया गांधी और राहुल गांधी के लिए छोड़ दी है। अब आप सोच रहे होंगे कि मुद्दे की बात पर हम कब आएंगे। तो चलिए आ जाते हैं।

दरअसल, आज बसपा सुप्रीमो मायावती का 62वां जन्मदिन है। तो अखिलेश यादव हाथ में फूलों का गुलदस्ता लेकर पहुंच गए उनसे मिलने। भईया बुआ-बबुआ में नया-नया सियासी प्यार जो हुआ है तो दिखाना तो पड़ेगा ही। वहीं अगर दूसरे शब्दों में कहे तो अखिलेश अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूत करने के लिए मायावती की हर बात मान रहे हैं। हर तरह से वह अपने प्यार और सम्मान से 1995 में हुए ‘गैस्ट हाउस कांड’ के जख्मों पर मरहम लगा रहे हैं और बुआ भी जानती हैं कि उत्तर प्रदेश में अब उनकी सियासी चूले भी हिल चुकी हैं तो वो भी सब कुछ भुला बबुआ को दुलार रहीं हैं।

वैसे देखा जाए तो दोनों को ही उत्तर प्रदेश की राजनीति का दमदार खिलाड़ी माना जाता है। अखिलेश अपनी साफ छवि और दमदार फैसलों के लिए जाने जाते हैं और किसी के दबाव में नहीं आते हैं फिर चाहे वो उनके पिताजी सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव और चाचा शिवपाल यादव ही क्यों ना हो।

लेकिन आपको बता दें कि एक लेडीज ऐसी भी हैं जिसका कहा कभी अखिलेश नहीं टालते हैं उनका एक इशारा मिलते ही वह सारे काम निपटा लेते हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि हम किसकी बात कर रहे हैं.. तो चलिए अब तो बता ही देते हैं। दरअसल, हम अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव की बात कर रहे हैं। जी हां.. आज डिंपल यादव अपना 41वां जन्मदिन मना रही हैं। अब आप ये तो जानते ही हैं कि भईया चाहे कोई कितना ही बड़ा नेता हो..अभिनेता हो.. खिलाड़ी हो.. बिजनेसमैन हो या फिर आम आदमी बाहर चाहे किसी की कितनी ही चलती हो लेकिन घर में तो घरवाली के आगे सरेंडर करना ही पड़ता है। तो ऐसा ही कुछ अखिलेश के साथ भी है और उन्होंने एक इंटरव्यू में ऐसा माना भी है। तो अगर हंसी-मजाक में कहा जाए तो डिंपल यादवी ही एकमात्र वह शख्स हैं जो यूपी में अखिलेश-मायावती के गठबंधन को तोड़ सकती हैं।

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