जानिए आखिर, डॉ. मनमोहन सिंह ने अपने धुर विरोधी अरुण जेटली को किस बात के लिए दिया अवॉर्ड

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लोकसभा चुनाव का तारीखों के ऐलान के बाद से ही सियासी गलियारों में सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सभी पार्टियां अपनी-अपनी जीत का दावा कर रही हैं। लेकिन देश की जनता किसके हाथ में सत्ता की चाबी सौंपेगी ये तो चुनाव के बाद ही पता चलेगा। बात करें बीजेपी-कांग्रेस की तो दोनों ही पार्टियां एक-दूसरे को हराने के लिए नए-नए हथकंडे अपना रही है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी आए दिन पीएम मोदी पर निशाना साधते रहते हैं। बार-बार उनके खिलाफ चौकीदार चोर है का नारा लगाते हैं। लेकिन बीजेपी और कांग्रेस के बीच ऐसा किया हुआ। जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।

जी हां, आपको बता दें कि राजनीतिक मतभेदों से अलग दिल्ली में एक अवॉर्ड्स समारोह में अलग ही नजारा देखने को मिला। इस समारोह में वित्त मंत्री अरुण जेटली को अवॉर्ड दिया गया और वो आवॉर्ड देने वाला कोई और नहीं बल्कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह थे। मीडिया ग्रुप हिन्दू बिजनेस लाइन की ओर से आयोजित चेंजमेकर अवॉर्ड्स में जीएसटी काउंसिल को ‘चेंजमेकर ऑफ द ईयर अवार्ड’ दिया गया। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बतौर जीएसटी काउंसिल के चेयरमैन इस अवॉर्ड को रिसीव किया। बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जीएसटी को लागू करने के तरीके पर बेहद हमलावर रहे हैं। राहुल गांधी जीएसटी की तुलना गब्बर सिंह टैक्स से कर चुके हैं।

बता दें कि पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह ने कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की थी। जब GST काउंसिल की ओर से जेटली अवॉर्ड लेने आए तो मंच पर अगल ही नजारा देखने को मिला। आपको बता दें कि अरुण जेटली को ये अवॉर्ड जीएसटी काउंसिल ‘वन नेशन वन टैक्स’ की दिशा में काम करने के लिए दिया गया है। जीएसटी काउंसिल ने संघवाद के सिद्धांतों पर काम करते हुए अलग-अलग राजनीतिक दलों को एक छतरी के नीचे लाया और जीएसटी को पूरे देश में सफलतापूर्वक लागू करवाया। जीएसटी काउंसिल की कामयाबी का सबसे अच्छा उदाहरण ये है कि इसे विवादित मुद्दों को सुलझाने के लिए कभी भी वोटिंग का सहारा नहीं लेना पड़ा। इस काउंसिल के सामने विवाद या असहमति के जितने भी मुद्दे आए सभी सदस्यों ने मिल बैठकर ही इसका समाधान किया। जीएसटी काउंसिल का चेयरमैन होने के नाते वित्त मंत्री अरुण जेटली को ये अवॉर्ड दिया गया।

आपको बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी GST को गब्बर सिंह टैक्स बता कर इसको लागू करने के ढंग पर नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधते रहे हैं। हालांकि GST का विचार सबसे पहले यूपीए सरकार के दौरान ही सामने आया था

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