सिर्फ धूप में ही नहीं बल्कि घर बैठे भी हो रहा है इस गंभीर किस्म के स्किन कैंसर का खतरा, पढ़े पूरी रिपोर्ट

आज के समय में किसी को भी कैंसर की बीमारी होना बड़ी आम सी बात हो गयी है। एक समय था जब कैंसर को जानलेवा बीमारी माना जाता था क्योंकि उस समय कैंसर से बचने के लिए उतने साधन नहीं थे, जितना की आज हैं। आज मेडीकल साइंस ने इतनी ज्यादा तरक्की कर ली है कि उसके पास इंसान के बड़े से बड़े मर्ज की दवा है। हालांकि कैसर उन बीमारियों में से है, जिसका अगर समय रहते न पता लगाया जाए तो उससे बचना मुश्किल हो जाता है लेकिन डॉक्टर समय-समय पर लोगों को इस बीमारी से बचने के लिए जागरुक करते रहतें हैं।

वैसे तो कैंसर कई तरह के होते है लेकिन उनमें सें 8 ऐसे कैंसर है, जो लोगों में सबसे ज्यादा पाए जाते है। जिनमें से एक स्किन कैंसर भी है। एक शोध के मुताबिक भारत में महिलाओं के मुकाबले पुरषों में स्किन कैंसर के होने के मामले 70 प्रतिशत अधिक देखे जाते हैं।

आपको बता दें कि स्किन कैंसर में इंसान की त्वचा के किसी एक हिस्से में, उसकी कोशिकाएं (cells) या ऊतकाएं (tissue)  बाकी शरीर की त्वचा के मुकाबले तेजी से बढ़ने लगती है। ऐसा होने के दो कारण होते हैं, पहला या तो परिवार में पहले भी किसी को यह बीमारी हो चुकी है या दूसरा कि सूरज की हानिकारक अल्ट्रावायलट किरणों  के एक्सपोजर में शरीर का आना। स्किन कैंसर भी कारणों को देखते हुए अलग-अलग तरह के होते है। जिसमें में से एक है मेलेनोमा, जो कि सबसे घातक स्किन कैंसर माना जाता है।

हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (HCFI)  के डॉकटर के. के. अग्रवाल बताते हैं, ‘त्वचा कैंसर के सबसे घातक रूपों में से एक है मेलेनोमा। यह त्वचा में मौजूद वर्णक कोशिकाओं (pigment cells)  में विकसित होता है। शरीर के अन्य हिस्सों में फैलने की प्रवृत्ति के कारण स्किन कैंसर के अन्य रूपों से अधिक गंभीर हो सकता है। साथ ही गंभीर बीमारी या मृत्यु का कारण बन सकता है।’

साथ ही उन्होंने बताया, ‘मेलेनोमा के संकेतों को पकड़ने के लिए ABCDE नियम का उपयोग किया जाता है। एसिमेट्री – तिल या बर्थमार्क के एक हिस्से का दूसरे से मेल न खाना, बॉर्डर– अनियमित किनारे, कलर – पूरी त्वचा का रंग एक जैसा नहीं रहता, कहीं कहीं पर भूरे, काले, गुलाबी, लाल, सफेद या नीले रंग के धब्बे हो सकते हैं, डायामीटर– एक चैथाई इंच से अधिक, इवॉल्विंग– तिल के आकार, बनावट या रंग में बदलाव हो रहा हो।’

डॉ. अग्रवाल ने आगे बताया, ‘त्वचा में मेलेनिन होने का मतलब है कि आप यूवी किरणों के हानिकारक प्रभावों से सुरक्षित नहीं हैं। यदि आपके बाल सुनहरे या लाल है और अाप आसानी से सनबर्न  के शिकार हो जाते हैं, तो आप डार्क कलर वाले लोगों के मुकाबले मेलेनोमा के ज्यादा जल्दी शिकार हो सकते हैं। कमजोर इम्यून सिस्टम  वाले लोगों में स्किन कैंसर का खतरा अधिक होता है। इसमें ज्यादातर ऐसे लोग शामिल हैं जिन्हें एचआईवी  या एड्स  हैं और साथ ही जिन्होंने ऑर्गन ट्रांसप्लांट  करवाया है।’

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