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B’day Spl : जब शबाना के प्यार के लिए बीवी और दो बच्चों को छोड़ गए जावेद अख्तर

भारतीय सिनेमा को बेहद यादगार फिल्मे शोले, जंजीर और अंदाज जैसी बेहतरीन फिल्में देने वाले जावेद अख्तर आज अपना 73वां जन्मदिन मना रहे हैं। अख्तर का जन्म 17 जनवरी 1945 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में हुआ था। जावेद के पिता जान निसार अख्तर हिंदी सिनेमा के फेमस संगीतकार थे और उनकी मां सैफिया अख्तर गायिका-लेखिका थीं। जाहिर है जावेद ऐसे परिवार में पले बड़े जहां शब्दों की जादूरगी सीखी जा सके। ऐसी परवरिश के बीच एक बेहतरीन लेखक बनना तो लाजमी था। जावेद बचपन के समय से ही कविताएं और गाने लिखा करते थे।

जावेद अख्तर का असली नाम ‘जादू’ है। ये नाम जावेद के पिता ने उनकी एक कविता की लाइन पढ़कर उन्हें दिया था जो कुछ इस तरह थीं, ‘लम्हा-लम्हा किसी जादू का फसाना होगा’। बाद में उनका नाम जावेद पड़ गया। शुरुआत के समय से ही जावेद के लिखने में काफी दम था। अपने एक इंटरव्यू में जावेद कहते हैं कि स्कूल के समय लोग उनसे लव लेटर लिखवाने आया करते थे।

जावेद ने उन लोगों के भी लव लेटर लिखे थे जिन्‍हें वो जानते तक नहीं थे। लव लेटर लिखने के लिए उन्हें काफी याद किया जाता था। 1964 में जब जावेद अख्तर ने मुंबई की तरफ रुख किया तब उनके पास कुछ नहीं था। जब तक उनके पास काम नहीं था तब तक उन्होंने पेड़ के नीचे सोकर अपनी रातें गुजारी थीं। हिंदी सिनेमा में काम पाने के लिए उन्होंने काफी मेहनत की थी। कुछ समय बाद जावेद को फिल्मों में क्लैपर ब्वॉय का काम मिल गया।

फिल्म ‘सरहदी लुटेरा’ की शूटिंग के दौरान ही जावेद सलीम खान से मिले। इस मुलाकात के बाद ही वे दोनों अच्छे दोस्त बन गए। इसके बाद जावेद कैफी आजमी के असिस्टेंट बन गए और सलीम लेखक/निर्देशक अबरार अलवी के सहायक बन गए। कैफी और अलवी पड़ोसी थे। अक्सर दोनों की मुलाकात होती रहती थी। इन्‍हीं के सपोर्ट से सलीम-जावेद की भी जोड़ी बन गई और फिल्म ‘हाथी मेरे साथी’ की एक जबरदस्त स्क्रिप्ट तैयार हुई।

फिल्म ‘सीता और गीता’ के दौरान जावेद हनी ईरानी से मिले। इस फिल्म में हनी सपोर्टिंग रोल प्ले कर रही थीं। इस दौरान हनी और जावेद एक-दूसरे को पसंद करने लगे थे। एक इंटरव्यू में हनी ने बताया था कि ‘एक बार ताश खेलते हुए जावेद हार रहे थे। तो उन्होंने जावेद से कहा कि लाओ मैं तुम्हारे लिए कार्ड निकालती हूं। तब जावेद ने उनसे कहा कि अगर ये पत्ता अच्छा निकला तो मैं तुमसे शादी कर लूंगा। खुशकिस्मती से पत्ता अच्छा था। तब जावेद बोले, ‘चलो-चलो’ अभी शादी कर लेते हैं।’

जावेद को उस समय इंडस्ट्री में ज्यादा समय भी नहीं हुआ था और उनके पास अपना घर भी नहीं था। दूसरी तरफ हनी भी इस समय महज 17 साल की ही थीं और जावेद उनसे 10 साल बड़े थे। इस दौरान जावेद ने सलीम खान से मदद मांगी और हनी की मां से बात करने के लिए कहा। जब सलीम जावेद का रिश्ता लेकर हनी के घर पहुंचे तो उनकी मां ने कहा, ‘ठीक है दोनों को शादी करने दो, जब ठोकर लगेगी तो हनी खुद ही घर वापस आ जाएगी।’ कुछ समय बाद दोनो की शादी हो गई। उस समय वह दोनों हनी की बहन के घर पर एक कमरे में रहने लगे।

कुछ समय बाद ही दोनों की जिंदगी में जोया ने उनकी पहली बेटी के रुप में जन्म लिया। जिसके बाद जावेद को भी अच्छा काम मिलने लगा। यहां से दोनों एक अच्छे घर में भी शिफ्ट हो गए। 1974 में हनी और जावेद की जिंदगी में बेटे फरहान अख्तर ने दूसरे बच्चे के रुप में जन्म लिया। हनी जावेद के लिए बहुत लकी साबित हुईं। लेकिन हनी की किस्मत शायद इतनी अच्छी नहीं थी।

1970 में जावेद का दिल कैफी आजमी की बेटी और उस समय की मशहूर एक्ट्रेस शबाना आजमी के लिए धड़कने लगा। इनके रिश्ते की खबर हनी को मिली तो उनके घर में रोज झगड़े होने लगे। शबाना के साथ रिश्ते के बावजूद जावेद को अपने दोनों बच्चों जोया और फरहान से बहुत प्यार करते था। इसलिए वो हनी को छोड़ना नहीं चाहते थे लकिन हनी ने उनसे कहा कि वो शबाना के पास जाएं और बच्चों की चिंता ना करें। जिसके बाद जावेद और हनी के बीच तलाक हो गया। 6 साल के अफेयर के बाद 1984 में जावेद और शबाना ने भी शादी कर ली।

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