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क्यों इस एक हिरन की वजह से जेल पहुंच गए सलमान खान

जोधपुर हाई कोर्ट ने आज 20 साल पुराने काला हिरण मामले पर सुनवाई कर दी है। सुनवाई के साथ ही यह मामला एक बार फिर से सुर्खियों में आ गया है। आपको बता दें कि 20 साल पुराने इस केस में एक आरोपी ऐसा भी है जो इस पूरे ट्रायल के दौरान पुलिस की पकड़ से दूर रहा। आपको बता दें कि इस मामले में कुल 7 आरोपी थे, जिसमें सलमान खान, सैफ अली खान, सोनाली बेंद्रे, नीलम और तब्‍बू शामिल थे।

आपको बता दें कि, काला हिरण के तीनों मामलों में सलमान खान दोषी ठहराए जा चुके हैं। जिसके लिए उन्हें जोधपुर कोर्ट की तरफ से 5 साल की सजा सुना दी गई है। कहने को तो किसी भी वन्य जीव का शिकार करने पर प्रतिबंध है, लेकिन सलमान का यह मामला काला हिरण का होने की वजह से काफी गंभीर हो गया है। इस मामले का इतना सुर्खियों में आने की वजह बताते हुए हम आपको बता रहे हैं कि आखिर काला हिरण से जुड़ा यह मामला इतना अहम क्यों है।

काला हिरण को भारतीय मृग के नाम से भी जाना जाता है। वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो यह जीनस एन्टीलोप में आता है, जो इस वर्ग में आने वाली एकमात्र बची हुई प्रजाति  है और यह भारतीय उपमहाद्वीप में पाई जाती है। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की सूची के मुताबिक काला हिरण संकट-निकट (Near Threatened या NT) श्रेणी में आता है। जिसका मतलब है कि हिरण की इस प्रजाति के निकट भविष्य में संकटग्रस्त हो जाने की उम्मीद है।

भारतीय वन संरक्षण अधिनियम, 1972 के अनुसार जीवों को अलग-अलग दायरे में रखा गया है, जिनमें से काला हिरण अनुसूची-1 में आता है। जिसमें वन्यजीवन को पूर्ण सुरक्षा प्रदान करने के प्रवाधान दिए गए हैं और इसके तहत अपराधों के लिए उच्चतम दंड (3 से 7 साल तक की जेल) निर्धारित हैं। यही वजह है कि सलमान द्वारा शिकार का यह मामला इतना गंभीर हो गया है।

काला हिरण मूलतः भारत, पाकिस्तान और नेपाल में पाया जाता है। काला हिरण की प्रजातियां बांग्लादेश में भी खासतौर से पाई जाती थीं, लेकिन अब वहां यह पूरी तरह  से लुप्त हो गए है। भारत में भी काला हिरण प्रजाति की स्थिति गंभीर बनी हुई है और अब यह संरक्षित क्षेत्रों तक ही सीमित रह गए है।

दरअसल 20वीं शताब्दी में अधिक शिकार किए जाने की वजह से इनकी संख्या में भारी कमी हो गई है। जिसकी मुख्य वजह वनों की कटाई रही, जिससे ये रहवासी इलाकों की ओर जाने को मजबूर हुए और इनका शिकार करना आसान हो गया जिससे सीधे तौर पर इनकी संख्या में तेजी से गिरावट आ गई। बाद में भारत में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 के तहत काले हिरण का शिकार पूरी तरह से अवैध कर दिया गया।

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