लोकसभा चुनाव: पहले चरण के मतदान में इन 10 बड़े नेताओं की किस्मत ईवीएम में हुई कैद, पढ़ें पूरी खबर

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देश में 17वें लोकसभा चुनाव का सरूर हर किसी के सिर चढ़कर बोल रहा है। लोकसभा चुनाव सात चरणों में सम्पन्न होंगे। पहले चरण में कल यानी 11 अप्रैल को 20 जिलों की 91 सीटों पर मतदान हुआ। जिसमें ताबड़तोड़ वोटिंग की खबरें सामने आ रहीं हैं। बता दें कि पहले चरण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों समेत देश की अलग-अलग सीटों पर वोटिंग हुई जो राजनीति में अपना अलग ही महत्व रखती हैं।

आज हम अपनी इस खबर में 10 ऐसे बड़े नेताओं के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका भविष्य कल ईवीएम में कैद हो गया।

पहले नंबर पर है बीजेपी सांसद और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी। वह नागपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, कांग्रेस ने नाना पटोले पर अपना दांव लगाया है। 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां से गडकरी ने 2.84 लाख मतों से जीत दर्ज की थी। कल नितिन गडकरी का राजनीतिक भविष्य ईवीएम में बंद हो गया। अब 23 मई को नतीजों के सामने आने के बाद ही पता चलेगा कि नागपुर की जनता ने उनको अपना संसद में प्रतिनिधित्व करने का एक और मौका दिया है या नहीं।

दूसरे नंबर पर हैं गौतमबुद्धनगर से बीजेपी सांसद और केंद्रीयमंत्री महेश शर्मा… बीजेपी ने एक बार फिर महेश शर्मा पर विश्वास जताते हुए उन्हें गौतमबुद्धनगर से उम्मीदवार घोषित किया है। महेश शर्मा को उम्मीदवार बनाये जाने से पहले ऐसी खबरें आ रहीं थी कि गौतमबुद्धनगर की जनता उनसे नाराज है इस वजह से बीजेपी आलाकमान उनकी जगह गृहमंत्री राजनाथ सिंह को गौतमबुद्धनगर से चुनावी मैदान में उतार सकती है। लेकिन यह सारी बातें अफवाह साबित हुईं और महेश शर्मा को गौतमबुद्धनगर से प्रत्याशी घोषित किया गया। कल गौतमबुद्धनगर में मतदान हुआ और उनकी किस्मत ईवीएम में कैद हो गई। अब जब 23 मई को ईवीएम खुलेंगे तो पता चलेगा कि उनकी किस्मत में हार है या जीत।

तीसरे नंबर पर हैं ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआइएमआइएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी। ओवैसी हैदराबाद लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में उतरे हैं। 2004 से लगातार तीन बार ओवैसी यहां से सांसद चुने जा रहे हैं। कल उनकी लोकसभा सीट पर वोटिंग हुई जिसकी नतीजे 23 मई को सामने आएंगे। अब देखना यह होगा कि क्या ओवैसी चौथी बार हैदराबाद लोकसभा सीट से जीत दर्ज कर पाते हैं या नहीं।

चौथे नंबर पर हैं गाजियाबाद से बीजेपी सांसद और केंद्रीयमंत्री वीके सिंह। वीके सिंह इस बार फिर गाजियाबाद लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में उतरे हैं। वीके सिंह को दमदार नेता माना जाता है। गाजियाबाद में कल  63 फीसदी मतदान हुआ और वीके सिंह की किस्मत ईवीएम में बंद हो गई। अब 23 मई को देखना होगा कि वीके सिंह चुनावी दंगल में विपक्षी पहलवान को पटखनी देकर जीत हासिल कर पाते हैं या नहीं।

पांचवे नंबर पर बात करेंगे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बड़े जाट नेता चौधरी अजीत सिंह की। अजीत सिंह पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अति महत्वपूर्ण सीट मुजफ्फरनगर से चुनाव लड़ रहे हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में यहां से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संजीव बालियान ने जीत दर्ज की थी, लेकिन सपा-बसपा-रालोद का महागठबंधन होने के कारण इस बार लड़ाई जातीय समीकरण में उलझ गई है। इस बार अजित सिंह ने अपनी पारंपरिक सीट बागपत छोड़कर बीएसपी-एसपी और आरएलडी गठबंधन की ओर से मुजफ्फरनगर सीट को चुना है। इस सीट पर इन दोनों दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर है। अब देखना होगा कि क्या इस बार अजित सिंह महागठबंधन से जुड़कर चुनाव जीत पाते हैं या नहीं?

छठे नंबर पर बात करेंगे सहारनपुर सीट से चुनाव लड़ रहे उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष इमरान मसूद की। इमरान मसूद एक बार फिर चुनावी मैदान में उतरे हैं। 2014 में उनको हार का सामना करना पड़ा था। बता दें कि इमरान को पश्चिमी उत्तर प्रदेश का कद्दावर नेता माना जाता है। इमरान साल 2014 लोकसभा चुनाव से ही सुर्खियों में बने हुए हैं। दरअसल, साल 2014 में इमरान मसूद का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वह नरेंद्र मोदी की बोटी-बोटी करने की बात कहते नजर आ रहे थे। इस वीडियो के मीडिया में वायरल होने के बाद जमकर बवाल मचा था जिसके बाद इमरान मसूद की गिरफ्तारी भी हुई थी। बता दें कि पिछले दिनों सहारनपुर चुनावी रैली के दौरान सीएम योगी ने कांग्रेस प्रत्याशी इमरान मसूद को पाकिस्तान के आंतकी अजहर मसूद का मामा बताया था। इस बयान के बाद सहारनपुर में सियासी बयानबाजी तेज हो गई थी।

सातवें नंबर है डॉक्टर सत्यपाल सिंह। सत्यपाल सिंह बागपत से मौजूदा बीजेपी सांसद हैं और उनपर एक बार फिर बीजेपी ने भरोसा जताते हुए यहां से टिकट दिया है। सत्यपाल सिंह की किस्मत भी कल ईवीएम में कैद हो गई। अब तो 23 मई को जब चुनावी नतीजे आएंगे तो पता चलेगा कि सत्यपाल सिंह को हार नसीब होती है या फिर जीत। बता दें कि सत्यपाल सिंह ने साल 2014 में ही बीजेपी का दामन थामा था। उससे पहले वह मुंबई के पुलिस कमिश्‍नर थे। मोदी सरकार में वह केंद्रीय मंत्री हैं और साफ छवि के नेता माने जाते हैं।

आठवें नंबर पर हैं वरिष्ठ कांग्रेस नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत। हरीश रावत नैनीताल सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार बनाए गए हैं। वह उत्तराखंड के कद्दावर नेताओं में शुमार किए जाते हैं। 11 अप्रैल को उनकी लोकसभा सीट पर भी वोटिंग हुईं है। अब 23 मई को देखना होगा कि हरीश रावत नैनीताल सीट पर जीत का परचम लहरा पाते हैं या नहीं।

नौवें नंबर पर हैं कभी मायावती के खासमखास रहे नसीमुद्दीन सिद्दकी। नसीमुद्दीन इस बार कांग्रेस के टिकट पर बिजनौर से चुनाव लड़ रहे हैं। नसीमुद्दीन मुस्लिमों के बड़े चेहरे के रुप में जाने जाते हैं। नसीमुद्दीन सिद्दकी की लोकसभा सीट पर भी 11 अप्रैल को वोटिंग हुईं। अब ये तो 23 मई को ही पता चलेगा कि क्या नसीमुद्दीन मायावती से अलग होकर जीत का स्वाद चखने में कामयाब हो पाते हैं या नहीं?

दसवें नंबर पर चौधरी अजीत सिंह के बेटे जयंत चौधरी। जयंत… अजीत सिंह के बेटे होने के साथ-साथ राष्ट्रीय लोकदल के उपाध्यक्ष भी हैं। जयंत इस बार बागपत से चुनावी मैदान में हैं। 11 अप्रैल को उनकी लोकसभा सीट पर भी वोटिंग हुई। जिसके नतीजे 23 मई को आएंगे।

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