Wikileaks4india का खुलासा ऑपरेशन बजट Indiabulls Exposed Part-2

Investigation

विकिलिक्स फोर इंडिया देश की उन इंवेस्टिगेशन जर्नलिज्म को स्थापित करने वाली संस्था है…जिसने ऑपरेशन डीडीसीए. ऑपरेशन बेबी और ऑपरेशन गाय करके देश के आम आदमी के सरोकार को सरकार के सामने ना सिर्फ रखा बल्कि इंवेस्टिगेशन के वो मापदंड भी स्थापित किए जिनके आधार पर पत्रकारिता की नींव रखी गयी है.

 

विकिलिक्स फोर इंडिया ने इन्ही स्थापित मापदंडों को ध्यान में रखते हुए…ऑपरेशन बजट को अंजाम दिया है…ऑपरेशन बजट के तहत आपने पहली किस्त में देखा की कैसे देश की एक गैर बैंकिंग फायनेंस कंपनी ने देश के आम लोगों का पैसा अपने निजी फायदे के लिए उन लोगों के हाथों में सौंपा जो लोन लेने की परिपाटी पर ही फिट नहीं बैठते….

 

और अब हम आपको देश के उस नटवरलाल के बारे में बताने जा रहे हैं….जिसका पूरा परिवार इस षणयंत्र में शामिल हैं…और इसने अपने शातिराना दिमाग से उस षड़यंत्र को अंजाम दिया जिसे बैंकिंग की भाषा में मिस एप्रोपियेशन ऑफ फंड कहा जाता है…जिसका मतलब होता है…अमानत में ख्यानत…यानी ये वो अपराध है…जो अगर एक गैर बैंकिंग फायनेंस कंपनी अपनी स्वार्थ की पूर्ति के लिए करती है तो उसका असर ना सिर्फ देश के बजट पर बल्कि आम लोगों के जीवन पर भी पड़ता है.

 

और अब चलिए…हम आपको इस नटवर लाल का खुलासा परत दर परत करते हैं…. हम आपको बतायेंगे कि कैसे एक इंजिनियर बैकग्राउड का ग्रेजुएट देश की इकनॉमी से खेल रहा है…और कैसे देश के बड़े बड़े इकनॉमी के धुरंधरों को मात दे रहा है….इस एक शातिर दिमाग खिलाड़ी ने देश की इकनॉमी को ऐसे अपने बुने मकड़जाल में फंसाया है कि अब देश के वित्त मंत्री को ये सोचना होगा कि आखिर इस मकड़जाल को समझा कैसे जाए और इस मकड़जाल से देश के लोगों का पैसा कैसे निकाला जाए.

 

और चलिए अब हम आपको परत दर परत बताते हैं…देश के उस सबसे बड़े नटवरलाल की हकीकत जिसके सामने विजय माल्या, नीरव मोदी. मेहुल चौकसी भी छोटे दिखाई देने लगेंगे…ये वो नटवरलाल है जिसका मकड़जाल तोड़ने के लिए देश की शीर्ष एजेंसियों को भी सोचना होगा कि इस मकड़जाल को तोड़ा कैसे जाए.

तो चलिए….अब हम आपके सामने खोलने जा रहे हैं वो हकीकत जिसका इंतजार आप कर रहे हैं…..

 

जी हां, इंडिया बुल्स देश की वो नामचीन कंपनी जिसका मालिक है…समीर गहलोत….वो समीर गहलोत जिसका रसूख राजनीति के गलियारों में भी है और बिजनेस की दुनिया में भी….. दिल्ली IIT से मैकेनिकल इंजीनियरिंग करने के बाद समीर गहलोत ने ऑनलाइन ट्रेडिंग में हाथ अजमाया लेकिन, उसमें समीर गहलोत को ज्यादा कामयाबी नहीं मिली

 

….लेकिन, यहां से समीर गहलोत को एक बात समझ में आ गयी कि देश में भरोसे का खेल सबसे फायदे का सौदा है…क्योंकि बुल्स एंड बीयर की फाइट में उन्हें बुल्स सबसे ज्यादा पसंद आया और साथ ही ये अहसास भी हो गया कि बुल्स की ताकत से वो बाजार में वो कोहराम मचा सकते हैं और वो मकड़जाल बुन सकते हैं…जिसे समझने के लिए देश की शीर्ष जांच एजेंसियों की नाक में दम आ जाएगा.

वहीं, हकीकत ये भी है कि महज दस साल में समीर ने इंडिया बुल्स को देश की सबसे बड़ी ऑनलाइन और रिटेल ब्रोकरेज फर्म बना दिया है. आज इंडिया बुल्स एक बड़े समूह के रूप में कार्य कर रहा है, जिसमें वित्त जगत के अलावा रियल एस्टेट, ऊर्जा, हाउसिंग फाइनेंस प्रमुख हैं. 1.2 बिलियन डॉलर की नेट वर्थ के साथ फोर्ब्स ने उन्हें भारत के 100 में और दुनिया के 1,000 सबसे अमीरों की सूची में शामिल किया है.

 

 

तो ये तो रहा समीर गहलोत का तारूफ….अब हम आपके सामने वो हकीकत दिखाते हैं…जिसके बाद आपको ये कम से कम पता चल जाएगा…कि वाकई समीर गहलोत वो व्यक्ति है जिसके खिलाफ सरकारी एजेंसियों को जागना होगा…नहीं तो देर होने पर देश को माल्या, नीरव औऱ मेहुल चौकसी के बाद समीर गहलोत को भी कहीं खोजना ना पड़े.

 

और ऐसा हम क्यों कह रहे हैं…उसकी वजह ये है कि समीर गहलोत की कंपनी वो एनवीएफसी…है जिसपर  करोड़ों रुपये के हेरफेर का आरोप हाल ही में लगा है…और ये वो एनवीएफसी भी है…जिसकी पोल हम ऑपरेशन बजट में खोल रहे हैं….. वहीं हम आपको ये भी बता दें कि डीएलएफ की 55 कंपनियों को….तकरीबन 2500 करोड़ रुपये का लोन इंडिया बुल्स ने दिया.

 

और हैरान करने वाली बात ये है कि डीएलएफ की 55 कंपनियों में से 23 का नेगेटिव नेटवर्थ है…और इंडिया बुल्स फायनेंस लिमिटेड ने ये जानते हुए की डीएलएफ की ये 23 कंपनियां लोन लेने की परिपाटी पर खरी उतरती बावजूद इसके इन्हें लोन दिया. वहीं, 47 कंपनियों का चार्ज फाइल नहीं किया गया.  यानी इंडिया बुल्स ने कायदे कानूनों को ताक पर रखकर डीएलएफ की कंपनियों को लोन दे दिया.

 

और चलिए…अब आपको वाटिका ग्रुप की जानकारी दिए देते हैं…और साथ ही ये भी बता देते हैं कि वाटिका ग्रुप और इंडिया बुल्स के बीच का रिश्ता क्या है? और क्यों वाटिका पर इंडिया बुल्स इतना मेहरबान हुआ…और क्यों इंडिया बुल्स ने देश के लोगों का पैसा उन हाथों में सौंपा जिनका इतिहास ही धोखाधड़ी जालसाजी से जुड़ा हुआ है.

 

वाटिका ग्रुप

इंडिया बुल्स ने वाटिका की 51 कंपनियों को तकरीबन 4300 करोड़ रुपये का लोन स्वीकृत किया…इनमें से अधिकतम कंपनियों की पेड अप कैपिटल एक लाख की है…यानी ये कंपनियां इस लिए खड़ी की गयी ताकि  इन्हें विचौलिया बनाकर और दूसरी कंपनियों को लाभ पहुंचाया जा सके… यानी षणयंत्र  का वो गंदा खेल खेला गया जिसमें बैंकिंग और आम आदमी के पैसों का गलत इस्तेमाल तो हुआ ही…साथ ही इंडिया बुल्स हाउसिंग फायनेंस लिमिटेड ने अपनी पोजिशन रसूख और राजनैतिक कनेक्शन का भरपूर इस्तेमाल किया…. वहीं, चौंकाने वाली बात ये भी है कि  इंडिया बुल्स के मालिक अपनी निजी कंपनियों में जिसका नाम कर्कीनोस कंस्ट्रक्सन प्राइवेट लिमिटेड एवं इंडिया बेस्ट वाए प्राइवेट लिमिटेड है ….उसमें 400 करोड़ की भारी भरकम राशि वाटिका की….अन्य कंपनी जिसका नाम एगनिस डेवल्पर्स है….उनसे 0.01 प्रतिशत सालाना ब्याज पर कीकबैक के रूप में लिया….यानी इस बार भी इंडिया बुल्स ने वहीं, पुराना पैटर्न अपनाया जो वो अन्य कंपनियों में यूज करता रहा है…एक फिक्स पैटर्न इंडिया बुल्स लगातार दोहराता रहा है…और वित्तीये संस्थानों की आंखों में धूल झोंकता रहा है…

 

और अब बात करते हैं…अगली कंपनी की….

 

सलीन कंस्ट्रक्शन लिमिटेड कंपनी

इस कंपनी के 100 प्रतिशत शेयर इंडिया बुल्स रियल एस्टेट लिमिटेड (लिस्टेट) पास हैं…जिनका प्रमोटर भी समीर गहलोत है. इस कंपनी को भी इंडिया बुल्स ने लोन दिया है…साल 2017-2018 में और वो अनसिक्योर लोन है…साथ ही इस लोन का विवरण और चार्ज फाइल नहीं किया गया है. और जबकि इन दोनों कंपनियों में रिलेटिड पार्टी डिसक्लोजर होना चाहिए.  दूसरा ये कंपनी उन बेनिफेश्यरी में से हैं…जिसे हुडको ने लैंड अलॉट किया था…और हुडको ने 22.062 एकड़ लगभग 23 एकड़ के आसपास जो सेक्टर 103 गुड़गांव में है…लैंड दिया……वहीं, ये लैंड पर एप्रूव डेवल्प प्लान…. टाउन एंड कंट्री प्लान  उस समय की भूपेन्द्र हुड्डा सरकार ने पास किया वहीं चौंकाने वाली बात ये भी है कि भूपेन्द्र हुड्डा के बेटे दीपेन्द्र हुड्डा समीर गहलोत के रिश्ते नाते से साडू भाई भी हैं.

और जो जमीन मिली और जिसपर अप्रूवल मिला इन दोनों ही एंट्री के डेटा में फर्क है….वहीं, इस मामले में फर्स्ट अलॉट मेंट को तबज्जो नहीं दी गयी… और जो लैंड को डेवल्प किया गया….वो विद्यांचल ने लैंड डेवल्प किया है…जिसका सीधा कनेक्शन इंडिया बुल्स से है.

 

एयरमिड डेवल्पर्स लिमिटेड

ये कंपनी चलती है…एम 62-63 फर्स्ट फ्लोर कनॉट प्लेस नई दिल्ली और ये भी इंडिया बुल्स रियल एस्टेट की 100 फीसदी मालिकाना हक वाली कंपनी है. इसके एक डायरेक्टर का नाम है….प्रेम प्रकाश मृद्धा,  इस कंपनी को भी हरियाणा कांग्रेस के समय में हुडको ने लेंड दिया था और उसमें भी एयरमिड डेवल्पर्स शामिल है. इसको 24.01 एकड़ का लैंड दिया गया है…और ये 106 सेक्टर गुरुग्राम में मौजूद है…लाइसेंस नंबर 80 है.इसका भी सीधा कनेक्शन इंडिया बुल्स से है.

 

अथिना इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड

ये कंपनी भी इंडिया बुल्स रियल एस्टेट लिमिटेड लिस्टेड कंपनी द्वारा 100 प्रतिशत ओन्ड कंपनी है. और इस कंपनी को भी तकरीबन 180 करोड़ रुपये का लोन 2017-2018 में मिला. और इस लोन का भी सालाना रिपोर्ट में जिक्र नहीं है…और एमसीए में चार्ज फाइल नहीं है…अथिना इन्फ्रास्ट्रक्चर के ऊपर 2016-17 में इनकम टैक्स द्वारा सर्च भी किया जा चुका है… और अभी भी इसका मैटर इनकम टैक्स सेटलमेंट डिपार्टमेंट के पास विचाराधीन है. इस कंपनी को भी हरियाणा सरकार के समय हुडको ने 19.86 एकड़ जमीन दी थी जो सेक्टर 110 गुरुग्राम में मौजूद है.

 

एटरनल प्रोजेक्टस प्राइवेट लिमिटेड

ये कंपनी 296 फोरेस्ट लेन नेब सराय नई दिल्ली में स्थित है. और ये वो पता है जहां से इंडिया बुल्स और समीर गहलोत की अन्य कंपनियां रजिस्टर्ड हैं…इस कंपनी के पूर्व निदेशक समीर गहलोत के माता और पिता हैं. जिनका नाम बलवान सिंह गहलावत और कृष्णा गहलावत है…और कृष्णा गहलावत हरियाणा सरकार में मंत्री रह चुकी हैं. इस कंपनी को भी हरियाणा कांग्रेस सरकार के दौरान हुडको से 5.88 एकड़ जमीन सेक्टर 105 गुरुग्राम में लाइसेंस मिला.

 

जुवनटस एस्टेट लिमिटेड

इस कंपनी के भी 100 परसेंट शेयर इंडिया बुल्स रियल एस्टेट लिमिटेड (लिस्टेड) कंपनी के पास हैं. जुवनटस एस्टेट लिमिटेड को 2017-18 में अनसिक्योरड लोन मिला. और इसमें रिलेटिड पार्टी डिसक्लोजर नहीं किया गया…एवं एमसीए में भी चार्ज फाइल नहीं किया गया.

इस कंपनी को भी हुडको ने उस समय जमीन दी जब हरियाणा में कांग्रेस की सरकार थी…उस समय 34.229 एकड़ लैंड दी गयी. इसका लाइसेंस नंबर है…246 है…और ये जमीन सेक्टर 104 गुरुग्राम में है. और जुवनटस एस्टेट लिमिटेड के ऊपर भी इनकम टैक्स की सर्च हो चुकी है.

 

कोर्डिया ग्रुप

इस कंपनी को इंडिया बुल्स ने लोन दिया…और कोर्डिया ग्रुप की तीन एलएलपी हैं…सबसे पहली ए सी रियल्टी स्पेसेज  एलएलपी इसको मिला 19.50 करोड़ जिसका पता है. सॉलिटियर बर्ल्ड लेबल 8 एस नंबर 36/1/1 अपोजिट रिजेंसी क्लासिक मुंबई बैगलोर हाईवे वनैर पुणे

 

दूसरी कंपनी है विल्ट टू रियल्टी एलएलपी इसको मिला 450 करोड़ रुपये का लोन

तीसरी कंपनी है महालुंगी लैंड डेवल्पर्स एलएलपी इसको मिला 740 करोड़ रुपये

टोटल तीनों कंपनियों को मिला तकरीबन 1200 करोड़ रुपये

सबसे पहले तीनों कंपनियों का ई-मेल अकाउंट कॉमन है. जिसका ई-मेल अकाउंट है

account@chordiagroup.co.in

 

आरोप

विल्ट टू रियल्टी ने इंडिया बुल्स को 50 करोड़ रुपये की प्रोफेशनल फीस दी है. इस बात का डिसक्लोजर विल्ट टू रियल्टी एलएलपी ने अपने सालाना अकाउंट बुक में नहीं किया है.

 

आरोप

जो लोन मिला है विल्ट टू रियल्टी एलएलपी को वो बात उसने अपनी सालाना रिपोर्ट में छुपाई है.

विल्ट टू रियल्टी ने जो डिलोइट जो ग्लोवल सीए लेवल की फर्म है. उसे दिया है…ये अमाउंट क्यों दिया गया इसकी जानकारी कंपनी ने नही दी है.

एसी रियल्टी स्पेश एलएलपी और विल्ड टू लिव टू एलएलपी ने दोनों ही एलएलपी ने एमसीए में अपना चार्ज फाइल नहीं किया है.

 

कर्कीनोस कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड

कर्कीनोस कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड पर 100 परसेंट मालिकाना हक है ईएमयू कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड का. ईएमयू कंस्ट्रक्शन पर 100 प्रतिशत मालिकाना हक है मगवर्ट रियल एस्टेट लिमिटेड और मगवर्ट पर शत प्रतिशत मालिकाना हक है समीर गहलोत का. इस कर्की नोस प्राइवेट लिमिटेड को 200 करोड़ रुपये का एक अमाउंट मिला मैसर्स एगनिस प्राइवेट डेवल्पर्स प्राइवेट लिमिटेड से. जिसके मालिक है वाटिका ग्रुप. और एगनिश डेवल्पर्स प्राइवेट लिमिटेड को इंडिया बुल्स हाउसिंग लिमिटेड से लोन मिला.

 

आरोप

740 करोड़ की सिक्योरिटी डिपोजिट 2016-17 में लॉग टर्म लोन दिखाया. जो अकाउटिंग स्टैंडर्ड और कंपनी एक्ट के नियम के मुताबिक रॉन्ग क्लासिफिकेशन माना जाता है. कंपनी के पास कोई एसेट नहीं है. इंवेस्टमेंट को छोड़कर. सिक्योरिटी डिपोजीत का जो पैसा है वो पूरी तरीके से मनी लॉन्डिग कहा जा सकता है…और कर्ज की नियम शर्तों को छुपाने के प्रयोग में लाया गया है. जो पैसा हेरफेर से बनाया गया उसको इंडिया बुल्स रियल एस्टेट के शेयर खरीदने में लगा दिया गया. इसके साथ साथ कार्कीनोज कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने कुछ इंवेस्टमेंट डिवेंचर के रूप में किया है. जो की सीसीडी नेचर के डिवेंचर्स हैं. जिसका जिक्र पहले भी किया जा चुका है.

 

इंडिया बेस्टवाय प्राइवेट लिमिटेड

इस कंपनी में मालिकाना हक दिव्या एस गहलोत का है. जो कि समीर गहलोत की पत्नी हैं. इस कंपनी को 200 करोड़ रुपये का लोन मिला है. मैसर्ज एगनस डेवल्पर्स प्राइवेट लिमिटेड जिसका मालिक वाटिका ग्रुप है.

 

इस अमाउंट को डिवेंचर्स को सब्सक्राइब करने के लिए इस्तेमाल किया गया है. और जो सिक्योरिटी मिली है वो इंडिया बेस्ट वाय ने उसको अपनी बुक्स ट्रेड रिसिवल बताया है जबकि कंपनी में इस तरह की कोई भी ट्रेड रिसिवल नहीं है. सिर्फ और सिर्फ हाइपोथिकेशन की डीड दी गयी है.

एगनेस डेवल्पर्स प्राइवेट लिमिटेन ने इंडिया बुल्स हाउसिंह से लोन लिया है और अपनी बुक्स ऑफ अकाउंट पर एमसीए पर चार्ज फाइल नहीं किया है.

 

इल्जाम ये है कि हेरफेर के पैसों को समीर गहलोत ने प्रिफेंस शेयर खरीदने में खर्च किया और कर्ण भूमि एस्टेट की शेयर खरीदें गए…और हैरान करने वाली बात ये है कि कर्ण भूमि एस्टेट समीर गहलोत की ही कंपनी है. जिसमें 602.30 करोड़ का तकरीबन अमाउंट एकत्र किया गया. मतलब 990 रुपये पर शेयर प्रिमियम इस पैसे को इंडिया बुल्स रियल एस्टेट के शेयर खरीदने में लगा दिया गया वाया 100 परसेंट ऑन सब्सिडी कृतिका इन्फास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड  समीर गहलोत की ही कंपनी है. इसके साथ साथ 160 करोड़ रुपये इवेस्ट किए गए इंडिया बुल्स फार्मासुटिकल प्राइवेट लिमिटेड के शेयर खरीदने पर. इस पैसे से समीर गहलोत अपनी फार्मा कंपनी को खड़ा करना चाहता है.

 

ये भी बहुत अश्चर्य की बात 7.43 करोड़ रुपये मैसर्स इन्फ्रा कॉर्न प्राइवेट लिमिटेड को शेटल करने के लिए दिए गए. ये वो कंपनी है जिसने अपना एमसीए में कभी भी अपना रिटर्न फाइल नहीं किया है. और एक बोगस और शैल कंपनी है. और एमसीए ने इस कंपनी को स्ट्राइक ऑफ कर दिया है. और इसका पता है 87 बैंगूर एवन्यू ब्लॉक सी कोलकाता वेस्ट बंगाल है. इसके साथ साथ 6.45 करोड़ , 39.97 करोड़ और 45 करोड़ रुपये डिवेंचर्स के रूप में इंवेस्ट किए गए हैं. जो ऑडिटिड फाइनेंससिल स्टेटमेंट में आ तो रहा है लेकिन, किसी भी कंपनी का नाम उसमें नहीं है. इंडिया बेस्ट वाय प्राइवेट लिमिटेड ने डिवेंचर्स की फोर्म में पैसा लगाया और ये एक सीसीडी नेचर के डिवेंचर्स हैं.

 

मायरिना रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड

– ये 100 प्रतिशत सब्सिडरी है ईएमयू कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड की और ईएमयू समीर गहलोत की ही कंपनी है. वाया मैगवर्ल्ड रियल एस्टेट लिमिटेड. इसके स्ट्रक्चर को डायग्राम के रूप में भी समझाया गया है.

इंडिया बुल्स हाउसिंग लिमिटेड ने लोन एडवांस किया है अमेरिकॉप ग्रुप को…जो डिवेंचर्स जसोल इंवेस्टमेंट एंड ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड वो राउड ट्रिपिंग ट्रांजेक्शन है आईवीएचएल की…राउंड ट्रिपिंग ट्राजेक्शन को सीधे तरीके से देखा जा सकता है हरीश फवियानी की एंट्री में…जिसका जिक्र हम पहले भी कर चुके हैं.

 

जी हां, ये एक फेहरिस्त है….समीर गहलोत की जालसाजी और धोखाधड़ी की….जिसने इंडिया बुल्स को ना सिर्फ खड़ा किया बल्कि 20 साल से भी कम समय में तकरीबन एक लाख करोड़ रुपये की कंपनी के रूप में बदल दिया….मार्किट में इंडिया बुल्स ने उन कंपनियों को फायदा पहुंचाया या यूं कहें कि इंडिया बुल्स ने उन कंपनियों को इनडायरेक्ट तरीके से फायदा पहुंचाया जिनसे वो अपनी नीजि स्वामित्व वाली कंपनियों में फायदा ले सकता था… समीर गहलोत ने बैंकिंग सेक्टर की बारीकियों का ऐसा इस्तेमाल किया और ऐसा मकड़जाल स्थापित किया जिसे तोड़ना अब सरकार का काम है…वहीं, हम आपसे ये भी कहना चाहेंगे कि हम ने बतौर पत्रकारिता के मापदंड पर ये खबर आपके बीच में रखी है…और हम यहां ये भी बताना चाहेंगे कि विकिलिक्स फोर इंडिया इन दस्तावेजों की तस्दीक पुख्ता रुप से करता है।

टीम विकिलिक्स

 

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