Wikileaks4india का खुलासा ऑपरेशन बजट-EXPOSE INDIABULLS – Part-1

Investigation

 

 

देश के प्रधानमंत्री का सपना है कि देश भ्रष्टाचार से मुक्त हो जाए और देश में हर शख्स को रोटी कपड़ा और मकान जैसी मूलभूत सुविधाए मिले…लेकिन, क्या ऐसा हो पा रहा है…और अगर नहीं हो पा रहा है तो इसकी वजह क्या है…क्या ऐसा तो नहीं कि देश में सभी तरह के संसाधान होने के बावजूद भी हम सिर्फ इसलिए दूसरे देशों से पीछे हैं…या यूं कहिए कि सोने की चिड़ियां कहलाने वाला देश महज इस लिए आज भी भूखा सोता है कि देश के भीतर ही कुछ जय चंद ऐसे भी हैं जो देश को भीतर ही भीतर खोखला कर रहे हैं…आज हम विकिलिक्स फोर इंडिया  के माध्यम से आपके सामने वो हकीकत खोलने जा रहे हैं…जिसे देखने सुनने और समझने के बाद….आप ये मान जाएंगे कि अगर देश की शीर्ष एजेंसिया चाहे तो आज भी हमारा देश फिर से वहीं मुकाम हासिल कर सकता है जिसका सपना देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देख रहे हैं…जी हां…एक विकसित और भ्रष्टाचार मुक्त भारत का….।

 

हर साल देश की सरकार देश का बजट इस उम्मीद पर पेश करती है कि देश की सरकार को बजट पेश करने के बाद….इनकम टैक्स के रूप में जो धन मिलेगा वो विकास के पहिए की रफ्तार को बढ़ाएगा वहीं, 8 नवंबर की नोटबंदी के बाद …देश से माल्या नीरव मोदी और मेहुल चौकसी इसलिए भाग निकले क्योंकि उन्हें पता था…कि अगर देश में ज्यादा दिन और रहे तो जेल जाना निश्चित है…क्योंकि इन जयचंदों के खाते इडी, इनकम टैक्स विभाग और सरकार के पास पहुंच चुके थे…यहां तक की सरकार के हाथ इनकी गिरेवान तक पहुंचने ही वाले थे…जिसकी भनक लगते ही…ये देश से फरार हो गए…और सरकार ने इनके खिलाफ एक्शन लेते हुए ना सिर्फ इनकी संपत्तियां जब्त की…बल्कि इनके खिलाफ वो एक्शन भी लिया जिसके बाद …अब मेहुल चौकसी, विजय माल्या और नीरव मोदी सरकार से ये गुहार लगा रहे हैं कि वो अपने ऊपर चल रही कार्रवाही के तहत सुनवाई के लिए तैयार है…।

ये तो रही…उन जयचंदों की बात और इन जयचंदों के माध्यम से देश के बजट पर पड़ने वाले असर की…विकिलिक्सफोर इंडिया आज आपके सामने वो खुलासा करने जा रहा है…जिसके बाद…देश का एक बहुत बड़ा आर्थिक घोटाला होने से ना सिर्फ रूक सकता है…बल्कि आने वाले बजट पर पड़ने वाले असर को कम कर सकता है….और साथ ही आर्थिक घोटाले को अंजाम देने वालों के खिलाफ एक ऐसा एक्शन हो सकता है जिसके बाद देश का बजट ना सिर्फ सुधरेगा बल्कि लाखों करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी पर भी लगाम लगेगी।

हम आपको वो दिखाने और समझाने जा रहे हैं…जिसे देखने के बाद….आप कम से कम ये तो समझ ही जाएंगे कि देश में मौजूद कुछ जयचंद देश के आर्थिक विकास में किस तरह से रोड़ा डाल रहे हैं. वहीं, देश की शीर्ष एजेंसियों से हमारी ये गुजारिश है कि वो इन दस्तावेजों को खंगाले…इनकी जांच करें…और दूध का दूध और पानी का पानी करें…।

ये वो दस्तावेज हैं…जो पब्लिक डॉमेन में भी है…और बतौर पत्रकारिता का धर्म निभाते हुए….विकिलिक्स फोर इंडिया ने एक लंबी रिसर्च के बाद…इन दस्तावेजों को हासिल किया है…और हम देश की शीर्ष जांच एजेंसियों से यहां ये भी पूछना चाहेंगे…कि जब विकिलिक्सफोर इंडिया इन दस्तावेजों तक पहुंच सकता है…तो फिर जांच एजेंसियां यहां तक क्यों नहीं पहुंच पाई…। साथ ही सवाल ये भी है कि आखिर वो कौन सी वजह है कि जांच एजेंसियां इस मामले पर अभी तक आंखें मूंदे बैठी हैं…। क्या वो एक और विजय माल्या, मेहुल चौकसी और नीरव मोदी प्रकरण होने का इंतजार कर रही है।

बतौर पत्रकारिता का धर्म निभाते हुए और इस बात को जानने और समझने के बाद कि हम ये भी जानते हैं कि अगर आज हमने अपना धर्म नहीं निभाया तो देश का भविष्य हमारी आने वाली पीढ़ी को इस घोटाले का असर झेलना होगा….यानी इन आर्थिक घोटालो का असर साल दर साल बजट पर पड़ेगा  और यही वजह है कि हम इस घोटाले के परत दर परत खोल रहे हैं….और अपनी जान की बाजी लगाकार अपना पत्रकारिता का धर्म निभा रहे हैं…।

देश का नामचीन बैंक यस बैक जिसके प्रमोटर हैं….। राणा कपूर इनकी पत्नी का नाम है बिंदु राणा कपूर…और देश की एक गैर बैंकिंग फायनेंस कंपनी ने  इन्हें इसलिए लोन दे दिया ताकि उन्हें अपनी निजी कंपनियां एवं गैर बैंकिंग फायनेंस कंपनी को फायदा यस बैंक से मिल सके…यानी यस बैंक के प्रमोटर की पत्नी की कंपनियों को इसलिए फायदा पहुंचाया गया ताकि रिवर्स में यस बैंक से फायदा मिल सके…आईये अब आपको दिखाते हैं…इस नामचीन गैर बैंकिंग फायनेंस कंपनी ने यस बैंक के प्रमोटर की पत्नी बिंदु राणा को किस तरह से लोन दिया….और ध्यान देने वाली बात ये भी है कि ये वो कंपनियां हैं..जिन्हें लोन मिलना मुश्किल होता ..यानी * ये कंपनियां हैं रैब इटरप्राइजेस प्राइवेट लिमिटेड, विलिस अवॉडी प्राइवेट लिमिटेड, इमेजिन रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड, बिलिस हैविटेट प्राइवेट लिमिटेड

और इन कंपनी पर मालिकाना हक बिंदु राणा कपूर का है….। इन कंपनियों को कुल 1535 करोड़ रुपये का लोन मिला…। जिसका ऑफिस का पता ….15वीं मंजिल, टावर टू ए, वन इंडिया बूल्स सेंटर सेनापति बापत मार्ग, लोउर परेल, मुंबई सिटी एवं 40 नंवर , अमृता शेरगिल मार्ग नई दिल्ली – 110003 है.

जी हां,,,यस बैंक  के परमोटर राणा कपूर की वाइफ विन्दु राणा कपूर का इन कंपनियों में मालिकाना हक है उन्हें लोन दिया गया 1535 करोड़ रुपये का और लोन का चार्ज एमसीए में फाइल नहीं हुआ यानी मिनिस्टरी ऑफ कॉरपोरेट अफेयर में फाइल नहीं हुआ।

और वहीं हम आपको ये भी बता दें कि

राधा, राखी औऱ रोशनी बिंदु राणा की बेटियां हैं…इनका भी अलग अलग कंपनियों में मालिकाना हक है. जिन्हें कुल 604 करोड़ रुपये का लोन दिया गया.

और वो कंपनियां है

मोर्गन क्रेडिट प्राइवेट लिमिटेड, डोइट क्रियेशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड एवं डोइट अर्बन वेंचर इंडिया प्राइवटे लिमिटेड इन पैसों का इस्तेमाल बिंदु राणा कपूर और उनकी बेटियों ने निजि प्रॉपर्टी होटल स्कूल स्टार्टअप एवं अन्य निजि व्यवसाय में लगाया।

और गैर बैकिंग फायनेंस कंपनी ने इन्हें लोन क्यो दिया और किस आधार पर दिया….इसका खुलासा उक्त गैर बैंकिंग फायनेंस कंपनी ने नहीं किया ..वहीं, यस बैक के सीधे जुड़े लोगों की कंपनियों को फायदा पहुंचाया और बदले में यस बैंक ने 2009 से लेकर 2018 -2019 तक साल दर साल हजारों करोड़ों रुपये का लोन वापसी में लोन देने वाली कंपनी के मालिक की निजि कंपनियों को दिया.

और जिन कंपनियों को यस बैंक ने बदले में लोन दिया वो हैं…

बॉबीनार इन्फ्रास्ट्रक्टर प्राइवेट लिमिटेड इनको दिया 310 करोड़

कैशा माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड इनको 190 करोड़ रुपये दिया

पैडिया सॉफ्ट इनफो प्राइवेट लिमिटेड – 100 करोड़ 2015 – 16 में और 50 करोड़ दिया 2017-2018 में

विश्वामुखा प्रॉपर्टी लिमिटेड इनको 170 करोड़ 2015-16 में दिया

गोमिनी प्रॉपर्टी प्राइवेट लिमिटेड इन्हें दिया 2015 – 16 में 200 करोड़ और 2017 – 18 में दिया 115 करोड़

चक्रिका प्राइवेट लिमिटेड इन्हें दिया 2015-16 में  200 करोड़ रुपये दिया

पाइडिया कोर्न कनेक्शन प्राइवेट लिमिटेड इनको 2014 में दिया 203 करोड़  फिर 2015 में दिया 120 करोड़ और फिर 2016 में दिया 85 करोड़ कुल 408 करोड़ रुपये दिया गया

ट्यूपेला लैंड प्राइवटे लिमिटेड इसको दिया 125 करोड़  2013 में दिया और फिर 2016 में 250 करोड़ रुपये दिए कुल 375 करोड़ रुपये लोन के रूप में दिए

ट्यूपेला कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को 2013 में 85 करोड़ रुपये दिया और 2016 में 250 करोड़ रुपये दिया कुल 335 करोड़ रुपये दिये गए

एयरमिड एविएशन प्राइवेट लिमिटेड को 2015 में दिया 245 करोड़

तो ये वो पैसा है या यूं कहें कि लोन है जो अलग अलग कंपनियों को दिया गया वहीं अगर आरोप की बात की जाए तो

पहला आरोप- एमसीए में…बिंदु राणा कपूर की उक्त कंपनियों का चार्ज फाइल नहीं किया गया….यानी मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर में लोन का चार्ज फाइल नहीं हुआ है

दूसरा आरोप – गैर बैंकिंग फायनेंस कंपनी के मालिक एवं बिंदु राणा कपूर बिलिस एग्री एंड इको टूरिज्म प्राइवेट में 14 मई 2010 से लेकर 2 अगस्त 2013 तक बोर्ड में रहे हैं। यानी मैनेंजमेंट का पार्ट रहे हैं।

तीसरा आरोप – बिंदु राणा कपूर ने अपनी सालाना रिपोर्ट 2017 – 18 में गैर बैंकिग फायनेंस कंपनी का नाम जिससे उन्होंने लोन लिया है उनकी जानकारियां छुपाई हैं। ये वो जानकारियां हैं जो कंपनी एक्ट के हिसाब से बतानी चाहिए थी.

चौथा आरोप – गैर बैंकिंग फायनेंस कंपनी ने जो भी पैसा बिंदु राणा की कंपनियों को लोन के रूप में दिया है….उसका कोई ईएमआई नहीं बांधी गयी…..और एक बुलैट पेयमेंट में पैसा वापस करने की बात कही गयी…वो भी 60 महीने के बाद पैसा देने की बात कही गयी..। और ये आमतौर की प्रैक्टिस में देखा नहीं जाता है।

तो ये वो पहली कंपनी है…जिसे एक तरफ इस गैर बैंकिंग फायनेंस कंपनी ने फायदा पहुंचाया और बदले में यस बैंक से फायदा प्राप्त किया…यानी एक तरफ यस बैंक के प्रमोटर की पत्नी और बेटियों की कंपनियों को गैर बैंकिंग फायनेंस केंपनी ने फायदा पहुंचाया वहीं…बदले में यस बैंक से रिवर्स फायदा भी प्राप्त किया…जिसका मतलब ये भी है कि गैर बैंकिंग फायनेंस कंपनी ने सरकार की आंखों में धूल झोंककर बैंक के प्रमोटर की पत्नी को लोन दिया और बदले में अपनी नीजि कंपनियों के लिए यस बैंक से लोन ले लिया..।

और चलिए अब आपको एक दूसरी फाइल का जिक्र करते हुए….आपको बताते हैं कि दूसरी फाइल में क्या है।

हरीश फवियानी जो एक एनआरआई हैं…और पेज थ्री सेलेब्रेटी हैं….। इनका रसूख इतना है कि जहां जाते हैं…वहां अपने रसूख का जलवा तो बिखेरते ही हैं…साथ ही इस बात का दावा भी करते हैं कि ये एक बहुत बड़े इन्वेस्टर हैं…।

तो चलिए परत दर परत हम इनकी हकीकत आपके सामने खोलते हैं..।

हरीश फवियानी जिनकी चार कंपनियां हैं….जिन्हें तकरीबन 130 करोड़ रुपये का लोन मिला…जिनका नाम है…ट्रांस पैसेफिक बिजनेस सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड, अमेरिकॉप बिजनेस सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड, अमेरिकॉर्प कैपिटल प्राइवेट लिमिटेड जिनका समान्य पता । 1607, 16वीं मंजिल लोधा सुप्रीमस, ओपोजिट कमाला मिल्स कंपाउड, सेना पति बापत मार्ग लोउर परेल, मुंबई। एवं चिन्नई बिजनेस पार्क प्राइवेट लिमिटेड जिसका पता …न्यू नंबर 57 सैकेंड फ्लोर बजूला रोड. टी नगर. चिन्नई है.

अब 130 करोड़ रुपये में से एक कंपनी जसौल इंवेस्टमेंट ने तकरीबन 100 करोड़ रुपये के तीन कंपनियों के शेयर खरीदें….और चौकाने वाली बात ये रही कि ये वो शेयर हैं…जो उस गैर बैंकिंग फायनेंस कंपनी के हैं..जिसने हरीश फवियानी को लोन दिया..। यानी एक तरफ इस उक्त गैर बैंकिंग फायनेंस कंपनी ने ये भी दावा किया था कि उनकी गैर बैंकिंग फायनेंस कंपनी में पहली बार एक एनआरआई इंवेस्टर एक बिलियन यानी 100 करोड़ का इंवेस्टमेंट करेगी…इस खबर के बाद…उक्त गैर बैंकिंग फायनेंस कंपनी के शेयरों में उछाल भी आया…वहीं, चौंकाने वाली बात ये भी है कि एक रास्ते गैर बैंकिंग फायनेंस कंपनी ने हरीश फवियानी को ही 130 करोड़ रुपये का लोन दिया…और बदले में हरीश फवियानी ने 100 करोड़ रुपये के शेयर इस गैर बैकिंग फायनेंस कंपनी एवं दो समूह कंपनी के खरीदे।

और बचे 30 करोड़ रुपये हरीश फवियानी की कंपनी ने उस गैर बैंकिंग फायनेंस कंपनी के मालिक की निजी कंपनियों ( गैर मालिक के 100 परसेंट ओन सब्सड्री कंपनी के नाम हैं…मैगवर्ड रियल एस्टेट, ईएमयू कन्सट्रक्शन, मरीन बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड) के डिवेंचर्स लिए गए वो भी 0.01 प्रतिशत की ब्याज पर।

यानी उक्त गैर बैंकिंग फायनेंस कंपनी ने एक साजिश के तहत हरीश फवियानी के चेहरे को अपने उन शेयर धारकों को बरगलाने के लिए यूज किया जिन्होंने उक्त गैर बैंकिंग फायनेंस कंपनी के शेयर्स में पैसा डाला था. ताकि शेयर मार्किट में उक्त गैर बैंकिंग फायनेंस कंपनी के शेयर्स में एक तरफ उछाल आया वहीं, गैर बैंकिंग फायनेंस कंपनी ने हरीश फवियानी को पैसा देकर रिवर्स में अपनी ही निजी एवं गैर बैंकिंग कंपनियों में पैसा लगवाया।

यानी हरीश फवियानी को कंपनी ने लोन ही इसलिए दिया ताकि वो वापसी में उक्त गैर बैंकिंग फायनेंस कंपनी एवं निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाए।

 

अब फाइल नंबर – 3

गैर बैंकिंग फायनेंस कंपनी ने तीन कंपनियों को लोन दिया…जो भारत के जाने माने रियल एस्टेट ग्रुप डीएलएफ की हैं…इनका नाम है…। कोर्टस बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड. मलायका बिल्डर्स और तीसरी है…नजा बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड …। इन तीन कंपनियों ने..गैर बैंकिंग फायनेंस कंपनी के मालिक की निजी हक वाली ईएमयू रियलकॉन प्राइवेट लिमिटेड को…66 करोड़ का पिरीफेरेंस शेयर के रूप में दिया

यानी एक तरफ पब्लिक के पैसों से डीएलएफ की तीन कंपनियों को लोन दिया इसके अलावा इन्होंने तकरीबन 2000 करोड़ रुपये डीएलएफ की 51 अन्य कंपनियों को भी दिया……

और उसमें से 66 करोड़ अपनी ही बनाई हुई एक कंपनी में लोन के तौर पर वापस ले लिया. साथ ही साथ इन सारे डॉक्यूमेंट्स की जानकारी एमसीए से पूरी तरह से छुपाई गयी. फायनेंस की भाषा में इसे किक बैक कहा जाता है…जो गैर कानूनी है.

यानी पब्लिक के पैसे को इस तरह से घुमाकर अपना निजी इंवेस्टमेंट बना लिया. और ईएमयू रियलकॉन प्राइवेट लिमिटेड जो गैर बैंकिंग फायनेंस कंपनी के मालिक की निजी कंपनी है उसने सीसीडी इश्यू किए (…यानी कम्पलसिरी कंवर्टेवल डिवेंचर. यानी कम्पलसिरी कंवर्टेवल डिवेंचर वो होते हैं…जो कुछ समय के बाद….इक्विटी शेयर के रूप में बदल जाते हैं…) और गैर बैंकिंग फायनेंस कंपनी के मालिक की अन्य कंपनियों में पहुंचा दिया। और वहीं हम आपको ये भी बताना चाहेंगे कि सीसीडी का अर्थ होता है कि डिवेंचर्स अनिवार्य रूप से  इक्विटि में तब्दील हो जाएंगे….परंतु इन सीसीडी के शर्तों की बात मानी जाए तो इनमें इक्विटि में परिवर्तित करने का विकल्प भी दिया हुआ है….। जो कि आपस में एक विरोधाभास पैदा करता है।

इसे फायनेंस जगत में बिंडो ड्रेसिंग कहा जाता है। ये विंडो ड्रेसिंग इसलिए की गयी है कि इसपर ब्याज दर न्यूनतम रखा जाए और इनकम टैक्स बचाया जा सके।

जी हां..ये वो पहेली है…जो परत दर परत ही खुलेगी…अभी खुलासे और भी हैं…..ये तो शुरुआत है….।

विकिलिक्स फोर इंडिया टीम

 

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