अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस : ‘शरीर से नहीं मन से होती है दिव्यांगता’

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आज 3 दिसंबर को अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस मनाया जा रहा है। दिव्यांगजनों में हौसला बढ़ाने के लिए इस मौके पर बीते बुधवार को दिव्यांगों के लिए कुछ खास प्रतियोगिताओं का आयोजन एकलव्य खेल मैदान में किया गया। जिसमें पहले दिन अस्थिबाधित दिव्यांगों के लिए बैसाखी दौड़, ट्रायसाइकिल दौड़, रस्सी कूद की प्रतियोगिता हुई, जिनमें श्रवण बाधितार्थ स्कूल (सुनने वाले असमर्थ), सार्थक स्कूल, एक्जेक्ट फाउंडेशन डांडेसरा, दृष्टिबाधितों (देख न सकने वाले) के लिए लंबी दौड़, मटका फोड़, , शांति मैत्री चरमुड़िया के 168 बच्चे शामिल हुए।

आरएसएस के इंद्रेश कुमार ने इस खास मौके पर संयुक्त राष्ट्र से अंतर्राष्ट्रीय विक्लांगता दिवस को अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस बनाने का प्रस्ताव भेजा और कहा कि इससे वह भी अन्य लोगों द्बारा बेहतर समझे जाएंगे। उन्होंने कहा कि भारत में दिव्यांगजन लोगों की काफी संख्या है और यह कदम उनके आत्मविश्वास के लिए बेहतर साबित होगा। इससे उन्हें ईमानदारी, गर्व और हीन भावनओं से ऊपर उठने का एक अच्छा मौका मिलेगा। साल 2016 में संसद में पारित ‘विक्लांगता अधिनियम 2016’ में संशोधन करके 7 तरह से बढ़ाकर 21 प्रकार की विक्लांगता शामिल की गई।

शरीर से नहीं, मन से होती है दिव्यांगता

चाणक्यपुरी स्थित विश्व युवक केंद्र में सार्थक एजुकेशनल ट्रस्ट द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम ‘द डायवरसिटी’ को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान लेखक व प्रबंधन सलाहकार एमबी अथरेया ने कहा कि ‘दिव्यांगता शरीर से नहीं बल्कि मन से होती है’। इसलिए दिव्यांगजनों को अपने आत्मविश्वास को बढ़ाकर समाज का हिस्सा बनना चाहिए। साथ ही उन्होंने दिव्यांग बच्चों को मुख्यधारा के साथ जोड़ने के लिए की जाने वाली कोशिशों की भी बात कही।

सिविल सर्विसेस की परीक्षा में टॉप करने वाली ईरा सिंघल का दिया उदाहरण

उन्होंने कहा कि एक्सेस इंडिया द्वारा देश के सरकारी संस्थानों और कार्यालयों को दिव्यांगजनों के लिए बेहतर बनाया जा रहा है। उन्होंने कार्यक्रम में दिव्यांगजनों को प्रेरित करते हुए कहा कि यदि वे सच्ची मेहनत और लगन से कार्य करेंगे तो सफलता जरुर मिलेगी। इस मौके पर सार्थक सलाहकार बोर्ड के सदस्य लव वर्मा ने अरुणिमा सिन्हा का उदाहरण देते हुए कहा कि ‘अरुणिमा को एक रेल हादसे के बाद अपना एक पैर गंवाना पड़ा था। इसके बाद भी उन्होंने एवरेस्ट पर चढ़ाई की।’ सार्थक एजुकेशनल ट्रस्ट के सलाहकार बोर्ड के सदस्यों ने वहां मौजूद दिव्यांगजनों से बात की और उनके जीवन में आ रही परेशानियों के बारे में पूछा। साथ ही उन्हें इन दिक्कतों को खत्म करने के तरीकों के बारे में भी बताया। इस कार्यक्रम में दिव्यांग बच्चों ने फैशन शो और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सभी दर्शकों का मन मोह लिया।

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