जयललिता पुण्यतिथि : बड़ी शौकिया मिजाज की जयललिता, जानें क्यों

JAILALITHA DEATH ANNIVERSARY HER LUXURY LIFE

साउथ फिल्मों की एक्ट्रेस और तमिलनाडु की मुख्यमंत्री रह चुकी जयललिता की आज पहली पुण्यतिथि है। 24 फरवरी, 1948 को मांडया जिले के पांडवपुरा तालुक के मेलुरकोट गांव में जन्मी जयललिता की पूरी जिंदगी की कहानी बेहद अलग रही है। उन्होंने एक रॉयल जिंदगी जी, ऐसा कहा गया है कि उनके पास 10 हजार से ज्यादा साड़ियां और 750 जोड़ी के करीब चप्पलें थीं।

सबसे अलग था जयलिलता का अंदाज

जयललिता हमेशा अपने रॉयल में नजर आयी हैं। जब वह साउथ की फिल्मों में काम करती थीं उस दौरान भी वो शाही जिंदगी जिया करती थी। उनका खाना हमेशा घर से ही आता था। साउथ फिल्मों में वह अपने समय की सुपर स्टार थी। जयललिता के राजनीति में कदम रखने के बाद भी उनके रॉयल अंदाज में कोई बदलाव नहीं आया। आम लोग ही नहीं बल्कि बड़े-बड़े लोग भी उनके पैर छूते थे।

खबरे हैं कि जब उनकी घर में छापा पड़ा था तो उनके पास दस हजार साड़ियां और 750 जोड़ी जूते अलमारियों में रखे मिले थे। अपने एक्टिंग करियर के समय वह किताबें हमेशा अपने पास ही रखती थी जब उन्हें टाइम मिलता तब वो ये किताबें पढ़ा करती थी। उनके घर में एक बहुत बड़ी लाइब्रेरी है, जहां वो अपना खाली समय अपनी पसंदीदा किताबें पढ़ने में बिताती थीं। ऑस्कर वाइल्ड, बर्नाड शॉ, सिडनी शेल्डन, डेनियल स्टील, पर्ल एस. बक और जेम्स हेडली चेज उनके पंसदीदा लेखकों में से एक हैं।

साल 1995 की सितंबर को जयललिता ने अपने गोद लिए बेटे सुधाकरन की शादी की थी। इस शादी का खर्चा ही पूरा 75 करोड़ रुपए आया था। इस शादी के लिए चेन्नई में 20 हेक्टेयर (50 एकड़) की जगह इस्तेमाल की गई थी। इस शादी में 1,50,000 लोग शामिल हुए थे। शादी की सजावट का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शादी के मंदिर से 5 किलोमीटर की दूरी तक सड़क पर गुलाब के फूल बिछाए गए थे। पूरी शादी में खाने के इंतजाम पर ही 2 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। इस वजह से ये शादी गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है।​

जयललिता को गठिया की समस्‍या रही है, इसलिए उनके लिए सागौन की लकड़ी की बनी खास कुर्सी डिजाइन की गई थी। यह कुर्सी दिल्‍ली स्थित तमिलनाडु भवन में रखी रहती थी। दिल्‍ली दौरे के दौरान जयललिता जहां-जहां जाती थी, कुर्सी भी उनके लिए वहां ले जाई जाती थी। चाहे फिर उनकी विज्ञान भवन में मीटिंग हो, संसद की लाइब्रेरी या फिर राष्‍ट्रपति भवन। दिल्‍ली में उनकी मुलाकात के कार्यक्रमों के बाद यह कुर्सी वापस तमिलनाडु भवन भेज दी जाती थी।

जयललिता को लिखने का भी बहुत शौक था। वह अपनी एक डायरी में हमेशा कुछ न कुछ लिखती रहती थीं। एक तमिल पत्रिका ‘थाई’ में भी लंबे समय तक वे एक कॉलम लिखती रहीं। इसमें वह अपनी निजी जिंदगी के बारे में लिखती थीं। उन्होंने तमिल में एक नॉवेल भी लिखा है। आपको बता दें कि जयललिता को 5 भाषाएं आती थीं। वह अंग्रेजी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और हिंदी में बोल सकती थीं। इसके साथ वे क्लासिकल डांस में भी करती थीं।

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