Know What is One Belt One Route of China- Wikileaks4india Report

4.4 अरब लोगों को रोजगार का लालच देकर चंगुल में फंसा रहा है ड्रैगन!

चीन दुनिया के सबसे बड़े आर्थिक गलियारे ‘वन बेल्ट, वन रूट’ परियोजना को लेकर 14 और 15 मई को एक शिखर सम्मेलन आयोजित कर रहा है। इसमें 29 देशों के राष्ट्राध्यक्षों, 70 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों, दुनिया भर के 100 मंत्रिस्तरीय अधिकारियों, विभिन्न देशों के 1200 प्रतिनिधिमंडलों को आमंत्रित किया गया है। हालांकि सूत्रों की मानें तो भारत इस सम्मेलन में शामिल नहीं हो सकता है। लेकिन इसमें अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के हिस्सा लेने से भारत पर दबाव बन रहा है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ‘वन बेल्ट, वन रूट’ यानी न्यू सिल्क रूट परियोजना शिखर सम्मेलन में इसका एजेंडा पेश करेंगे।

 

चीन ने आर्थिक मंदी से उबरने, बेरोजगारी से निपटने और अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए ‘वन बेल्ट, वन रूट’ परियोजना को पेश किया है। चीन ने एशिया, यूरोप और अफ्रीका को सड़क मार्ग, रेलमार्ग, गैस पाइप लाइन और बंदरगाह से जोड़ने के लिए ‘वन बेल्ट, वन रूट’ के तहत सिल्क रोड इकोनॉमिक बेल्ट और मैरीटाइम सिल्क रोड परियोजना शुरू की है।

 

इन गलियारों से जाल बिछाएगा चीन

इसके तहत छह गलियारे बनाए जाने की योजना है। इसमें से कई गलियारों पर काम भी शुरू हो चुका है। इसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) से गुजरने वाला चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा भी शामिल है, जिसका भारत कड़ा विरोध कर रहा है। भारत का कहना है कि पीओके में उसकी इजाजत के बिना किसी तरह का निर्माण संप्रभुता का उल्लंघन है। कुछ दिन पहले ही चीन ने भारत को शामिल करने के लिए चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का नाम बदलने पर भी राजी हो गया था लेकिन बाद में इससे पलटी मार गया।

 

न्यू सिल्क रूट के नाम से जानी जाने वाली ‘वन बेल्ट, वन रूट’ परियोजना के तहत छह आर्थिक गलियारे बन रहे हैं। चीन इन आर्थिक गलियारों के जरिए जमीनी और समुद्री परिवहन का जाल बिछा रहा है।

1.चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा

2. न्यू यूराशियन लैंड ब्रिज

3. चीन-मध्य एशिया-पश्चिम एशिया आर्थिक गलियारा

4. चीन-मंगोलिया-रूस आर्थिक गलियारा

5. बांग्लादेश-चीन-भारत-म्यांमार आर्थिक गलियारा

6. चीन-इंडोचाइना-प्रायद्वीप आर्थिक गलियारा

 

दुनिया के 60 फीसदी लोगों पर राज करेगा चीन

चीन अपनी इस महत्वाकांक्षी परियोजना के जरिए दुनिया की 60 फीसदी आबादी यानी 4.4 अरब लोगों पर शिकंजा कसने की कोशिश कर रहा है। वह इनको रोजगार देने का लालच दे रहा है। उसने इस परियोजना को लेकर अपनी नीतियां भी स्पष्ट नहीं की है। वह कभी-भी अपने वादे से मुकर सकता है और इन देशों की प्राकृतिक संपदा का दोहन करके आर्थिक लाभ कमा सकता है। ऐसे में इसके भावी परिणाम बेहद गंभीर साबित हो सकते हैं। इन देशों के लोग भविष्य में चीन के गुलाम बन कर रहे जाएंगे। चीन का रिकॉर्ड रहा है कि वह बिना स्वार्थ के कोई काम नहीं उठाता है। खासकर विदेशी निवेश को लेकर उसका रिकॉर्ड बेहद खराब रहा है।

 

दुनिया के 65 देशों की सरकार को भी लालच

चीन ने वन बेल्ट वन रूट परियोजना को अंजाम देने के लिए ना सिर्फ 65 देशों की जनता को बरगला रहा है। बल्कि वह इन देशों की सरकारों को भी लालच दे रहा है। चीनी मीडिया का कहना है कि इस परियोजना के इन देशों की सरकारों को 1.1 अरब डॉलर टैक्स मिलेगा। इससे इनकी आय में इजाफा होगा। साथ ही बेरोजगारी कम होगी। फिलहाल भारत के सभी पड़ोसी देश इसमें फंसते नजर आ रहे हैं। खासकर नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और म्यांमार इस चीनी जाल में फंसते नजर आ रहे हैं। पाकिस्तान पहले ही इसकी मंजूरी दे चुका है। भविष्य में चीन इन देशों में आर्थिक नियंत्रण करने के बाद सत्ता में भी दखल बढ़ाने में कामयाब हो सकेगा।

 

अलग-थलग पड़े PAK के लिए राहत

चीन और पाकिस्तान एक-दूसरे को अपने सबसे करीबी दोस्त मानते हैं। चीन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हर मुद्दे पर पाकिस्तान के साथ खड़ा रहता है। चाहे फिर आतंकवाद का मसला हो या फिर कूटनीतिक। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद सरगना मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंधित सूची में शामिल कराने की भारत की कोशिश पर चीन का अड़ंगा इस बात का उदाहरण हैं। ऐसे में यह परियोजना पाकिस्तान के लिए फायदेमंद साबित हो रही है। दुनिया में अलग-थलग पड़े पाकिस्तान को अब चीन के रहमोकरम पर खुद को आगे बढ़ा पाने का मौका मिलेगा जो भारत के लिए घातक है।

 

अमेरिका ने भी लिया यू-टर्न

‘वन बेल्ट, वन रूट’ परियोजना शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने से इनकार करने वाले अमेरिका ने भी यू-टर्न ले लिया है। अब उसने इस शिखर सम्मेलन में शामिल होने का फैसला लिया है। अमेरिकी फैसले से भारत पर भी इसमें शामिल होने का दबाव बढ़ गया है। चीन ने भारत पर दबाव बनाने के लिए ही अमेरिका को इसमें शामिल होने के लिए राजी किया है। फिलहाल देखना यह है कि भारत इसके लिए क्या कदम उठाता है?

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