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अगर इन 10 कानूनों के बारे में जानते हैं, तो आपकी जिंदगी हो जाएगी आसान

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हमारे देश मे आज भी ऐसे कई कानून है जो शायद कम ही लोगों को पता होंगे। हमारे संविधान ने हमें जो अधिकार और अवसर दिए हैं उन्हें भी प्रमुखता मिल रही है। आज लड़किया भी काफी मेहनत कर रही हैं और अपने करियर को लेकर भी काफी गंभीर हैं। हांलाकि आजकल के दौर में और सब चीजों के मुताबिक मानसिक, शारीरिक और यौन उत्पीड़न, स्त्री द्वेष और लिंग असमानता ज्यादातर लोगों के लिए जीवन का हिस्सा बन गई हैं। ऐसे में लड़कियों को भी भारतीय कानूनों के द्वारा दिए गए अधिकारों के प्रति जागरुकता होनी ही चाहिए साथ ही लड़कियों को समझ होनी चाहिए कि उनकी सुरक्षा के लिए भारत मे क्या- क्या कानून है और किस तरह से वह सुरक्षित है।

1. समान वेतन का अधिकार

देश के लाखों महिला कर्मचारियों  को राहत देने के लिए सर्वोच न्यायालय ने एक बहुत ही जरूरी फैसला दिया है और उसका सभी की ओर से स्वागत भी हुआ है। अदालत ने अपने फैसले में यह कहा था कि सभी महिला कर्मचारियों को पुरूष कर्मचारियों के बराबर वेतन मिलना चाहिए। समान काम के लिए समान वेतन के सिद्धांत पर हर हाल में अमल किया जाना चाहिए। यानी अदालत के मुताबिक महिला कार्यकर्ता भी पुरूष की तरह मेहनत करने पर समान वेतन पाने के हकदार हैं। जस्टिस जे.एस खेहड़ा और न्यायमूर्ति एसए बोबडे की पीठ ने कहा था कि ‘समान काम के लिए समान वेतन’ की बात संविधान के अलग-अलग प्रावधानों को परीक्षण करने के बाद आई है। अगर कोई कर्मचारी दूसरे कर्मचारियों के समान काम करता है और अपनी जिम्मेदारी निभाता है, तो उसे दूसरे कर्मचारियों से कम वेतन नहीं दिया जा सकता। समान काम के लिए समान वेतन के तहत हर कर्मचारी को ये अधिकार है कि वो नियमित कर्मचारी के बराबर वेतन पाए।

अदालत का कहना था कि, हमारी राय में कृत्रिम प्रतिमानों के आधार पर किसी की मेहनत का फल न देना बहुत गलत है। समान काम करने वाले कर्मचारी को कम वेतन नहीं दिया जा सकता। ऐसी हरकत न केवल अपमानजनक है, बल्कि भावनाओं को भी ठेस पहुंचाता है। जाहिर है, अदालत ने अपने फैसले में जो कुछ भी कहा है, वह सब सही भी है। अदालत के इस फैसले से देश भर में अनुबंध पर काम कर रहे उन लाखों महिलाओं के साथ-साथ पुरूष कर्मचारियों को भी काफी लाभ होगा, जिन्हें समान योग्यता होने के बावजूद अपने सहकर्मियों के समान वेतन नहीं मिलता। तो महिलाओं के पास और पुरूषों के पास पूरा अधिकार है कि वह समान वेतन ना मिलने पर अपनी आवाज बुलंद करें।

2. काम पर हुए उत्पीड़न के खिलाफ अधिकार

यह महिलाओं के लिए सबसे लाभदायक और बहुत जरूरी अधिकार है। लेकिन आज के दौर में कई महिलांए इस अधिकार से रूबरू नहीं है। महिलाओं की जिंदगी में काफी उतार-चढ़ाव आते हैं और महिलाओं को मजबूरन यह सब सहना पड़ता है और इसका सबसे बड़ा कारण यही है कि आजकल महिलाओं को कानून ही नहीं पता उन्हें यह नहीं पता कि कौन से अधिकार उनके पास हैं। एक ऐसा ही अधिकार महिलाओं के पास है कि अगर काम के दौरान कोई उनका फायदा उठाता हैं या फिर उन्हें यौन उत्पीड़न करने की कोशिश करता है तो महिला के पास पूरा अधिकार है कि वह यौन उत्पीड़न अधिनियम के अनुसार यौन उत्पीड़न के खिलाफ जाकर अपनी शिकायत दर्ज कर सकती हैं।

3. नाम न छापने का अधिकार

अगर कोई महिला यौन उत्पीड़न के खिलाफ अपनी आवाज उठाती है और अगर उन्हें अपना नाम नहीं छपवाना है तो उनके पास इस चीज का पूरा अधिकार है कि वह अपना नाम छिपा सकती है। यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को नाम न छापने देने का अधिकार है क्योंकि नाम सामने आने से कई महिलाओं की जिंदगी खराब हो जाती है। अपनी गोपनीयता की रक्षा करने के लिए यौन उत्पीड़न की शिकार हुई महिला अकेले अपना ब्यान किसी महिला पुलिस अधिकारी की मौजूदगी में या फिर जिलाधिकारी के सामने दर्ज करा सकती है और अपना नाम छिपा सकती है।

4. घरेलू हिंसा के खिलाफ अधिकार

आजकल के समय मे महिलाएं घरेलू हिंसा जैसे अत्याचार से भी गुजरती है जो कि बिल्कुल भी सही नहीं है और साथ ही एक अपराध भी है। ये अधिनियम मुख्य रूप से पति, पुरुष, लिव इन पार्टनर या रिश्तेदारों द्वारा एक पत्नी, एक महिला, लिव इन पार्टनर या फिर घर में रह रही किसी भी महिला जैसे मां या बहन पर की गई घरेलू हिंसा से सुरक्षा करने के लिए बनाया गया है। अगर ऐसी कोई भी शिकायत किसी भी महिला को होती है तो वह बेझिझक अपनी शिकायत दर्ज करा सकती हैं।

5. मातृत्व संबंधी लाभ के लिए अधिकार

मातृत्व लाभ कामकाजी महिलाओं के लिए सिर्फ एक सुविधा नहीं बल्कि ये उनका सबसे बड़ा अधिकार भी है। मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत एक नई मां प्रसव के बाद तीन महीनें तक महिलाओंं के वेतन में कोई भी किसी भी तरह की कटौती नहीं की जाती और उसके बाद वह फिर से काम शुरू कर सकती हैं।

6. कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ अधिकार

भारत के हर नागरिक का ये सबसे बड़ा कर्तव्य है कि वह एक महिला को उसके मूल अधिकार ‘जीने के अधिकार’ का अनुभव करने दें। गर्भाधान और प्रसव से पूर्व पहचान करने की तकनीक (लिंग चयन पर रोक) अधिनियम (PCPNDT) कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ अधिकार देता है।

7. मुफ्त कानूनी मदद के लिए अधिकार

यह अधिकार महिलाओं को सुरक्षित करने के लिए बनाया गया है। इस अधिकार के तहत बलात्कार की शिकार हुई किसी भी महिला को मुफ्त कानूनी मदद पाने का पूरा अधिकार है। स्टेशन हाउस आफिसर (HSO) के लिए ये बहुत जरूरी है कि वह विधिक सेवा प्राधिकरण (Legal Services Authority) को वकील की व्यवस्था करने के लिए सूचित करें।

8. रात में गिरफ्तार न होने का अधिकार

एक महिला को सूरज डूबने के बाद और सूरज उगने से पहले गिरफ्तार नहीं किया जा सकता, किसी खास मामले में एक प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही ये संभव है, वरना किसी भी लड़की को कोई भी पुलिस अधिकारी शाम 6 बजे के बाद और सुबह 6 बजे से पहले गिरफ्तार नहीं कर सकता यह अधिकार केवल महिलाओं के लिए ही बनाया है। आम तौर पर यह अधिकार महिलाओं के लिए इसलिए बनाया गया है क्योंकि पहले ऐसी शिकायते सामने आई थी की पुलिस अधिकारियों ने महिला को गिरफ्तार करके उनके साथ बाल्तकार किया और इन शिकायतों के चलते न्यायालय ने यह अधिकार महिलाओं के हक में रख दिया।

9. गरिमा और शालीनता के लिए अधिकार

इस अधिकार के तहत किसी मामले में अगर आरोपी एक महिला है तो, उसपर की जाने वाली कोई भी चिकित्सा जांच प्रक्रिया किसी महिला द्वारा या किसी दूसरी महिला की उपस्थिति में ही की जानी चाहिए।

10. संपत्ति पर अधिकार

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत नए नियमों के आधार पर अपने पिता की संपत्ति पर महिला और पुरुष दोनों का बराबर का हक है। लिंग के नाम पर भेदभाव नहीं किया जाएगा। अगर ऐसा कुछ होता है तो महिला को पूरा अधिकार है अपना हक मांगने का। इतना हीं नही अपने पति की संपत्ति पर भी महिला का पूरा अधिकार होता है।

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