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स्टमक इनफेक्शन को हल्के में न ले, सावधानी नहीं बरती तो भुगतने पड़ सकते हैं भयंकर नतीजे

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आज के हमारी बदलती खान पान की आदतों के चलते हर दूसरे व्यक्ति का पेेट निकलना एक आम बात सी हो गई है। जिससे शरीर में स्टमक इनफेक्श के चांस ज्यादा बढ़ जाते हैं। आपको बता दें कि स्टमक इनफेक्श ऐसी बीमारी होती है जिसमें डायजेस्टिव सिस्टम में इनफेक्शन होने के साथ ही सूजन व कई तरह की परेशानियां हो जाती हैं। अगर स्टमक इनफेक्शन बढ़ जाए तो आपको दस्त, उल्टियां, जलन व ऐंठन जैसी गंभीर परेशानियां हो सकती हैं।

आपको बता दें कि स्टमक इनफेक्शन यानी पेट में होने वाला संक्रमण बच्चों, बुजुर्गों व कमजोर व्यक्तियों को जल्दी होने वाली बीमारी होती है। जो कि ज्यादातर गंदा खाना और गंदा पानी पीने से होती है। स्टमक इनफेक्शन ज्यादातर नोरोवायरस, रोटावायरस, ऐस्ट्रोवायरस, कैम्पिलोबैक्टर नाम के बैक्टिरीया से होते हैं। खाने पीने की चीजों के जरीये ये आपके शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और 4 से 48 घंटों के अंदर पूरे शरीर में फैल जाते हैं।

गर्मियों में ज्यादा होता है स्टमक इनफेक्शन

गर्मी बढ़ने के साथ ही स्टमक इनफेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है। इन बैक्टिरीया को पनपने में इस मौसम में ज्यादा मदद मिलती है। वहीं गर्मियों में देखा जाए तो कटे फल व सब्जियां, खाने पीने की बाकी चीजें जल्दी खराब हो जाती है। खाने पीने की चीजों में बैठकर मख्की व मच्छर इन बैक्टिरीया को एक जगह से दूसरी जगह ले जाते हैं जिससे उन खाद्य पदार्थों को खाने से हमारे अंदर भी बैक्टिरीया चले जाते है जिससे शरीर में इनफेक्शन चला जाता है।

जान लें बीमारी के क्या हैं लक्षण

भूख कम लगना,पेट में दर्द होना, दस्त लग जाना, जी मिचना जाना, उल्टियां आते रहना, ठंड लगना, स्किन में जलन महसूस होना, पसीना ज्यादा आना, बुखार चढ़ जाना, जोड़ों में दर्द व अकड़न महसूस होना, मसल्स में दर्द होना, शरीर में कमजोरी के साथ वजन कम हो जाना।

इस तरह करें इलाज

स्टमक फ्लू हो जाने पर ध्यान देना बहुत जरुरी है क्योंकि यही इनफेक्शन अगर बढ़ जाए तो किसी की जान भी जा सकती है। इसलिए आप ऐसा होने पर मरीज को लिक्विड यानी तरल पदार्थ ज्यादा पिलाना शुरु कर दें। इसके साथ ही ओआरएस का घोल पिलाना बिल्कुल न भूलें। घर पर होने वाली इन देखभाल के साथ ही डॉक्टर के पास जरुर जाएं।

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