लोकसभा चुनाव से पहले कर्मचारियों को मोदी सरकार का तौहफा, बदला 27 साल पुराना ये नियम

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लोकसभा चुनाव में कुछ ही महीने बचे हैं। सभी राजनीतिक पार्टियों बीजेपी को हराने के लिए कोई कमी नहीं छोड़ रही हैं। तो वहीं, बीजेपी भी जनता को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। हाल ही में बीजेपी ने यूपी में इतिहास का सबसे बड़ा बजट पेश किया था और अब केंद्र सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। दरअसल, सरकार की ओर से कर्मचारियों के शेयरों और म्यूचुअल फंडों में निवेश के खुलासे की लिमिट बढ़ा दी है। अब यह लिमिट बढ़कर कर्मचारियों के छह महीने के मूल वेतन के बराबर होगी।

बता दें कि इस संबंध में कार्मिक मंत्रालय की ओर से जानकारी देते हुए कहा गया कि मंत्रालय ने इस बारे में केंद्र सरकार के सभी विभागों को आदेश जारी किया है। बता दें कि सरकार के इस फैसले के बाद करीब 27 साल पहले की मौद्रिक सीमा नियम में बदलाव होगा। पिछले नियमों के मुताबिक ग्रुप ए और ग्रुप बी के अधिकारियों को शेयरों, प्रतिभूतियों, डिबेंचरों या म्यूचुअल फंड योजनाओं में एक कैलेंडर साल में 50 हजार रुपए से अधिक का लेनदेन करने पर उसका ब्यौरा देना होता था। वहीं, ग्रुप सी और ग्रुप डी के कर्मचारियों के लिए यह लिमिट 25 हजार रुपए थी।

अधिकारियों के मुताबिक सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद सरकारी कर्मचारियों के वेतन में इजाफा हुआ है। ऐसे में लिमिट की सीमा बढ़ाने का फैसला लिया गया है। प्रशासनिक अधिकारी ट्रांजेक्शन पर निगाह रख सकें इसके लिए सरकार ने कर्मचारियों को ब्योरा साझा करने का प्रारूप जारी किया है।

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