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WEF से पहले आई भारतीय अर्थव्यवस्था की एक चिंताजनक रिपोर्ट

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पिछले साल देश के कुल धन में 73 फीसदी का योगदान भारत के एक फीसदी अमीरों की आबादी का था। लेकिन इस बार आय में असमानता की एक चिंताजनक तस्वीर जारी किए गए एक सर्वे से सामने आई है। बाकि देशों की लगभग आधी आबादी 67 करोड़ की जनसंख्या गरीब है। सर्वे में कहा गया है कि इनकी आय में मात्र एक फीसद की बढ़ोत्तरी हुई है। दावोस के सालाना विश्‍व आर्थिक मंच की शुरुआत में इंटरनेशनल राइट्स ग्रुप ऑक्सफैम आवर्स के द्वारा ये सर्वे किया गया है। इस सम्‍मेलन के लिए पीएम नरेंद्र मोदी रवाना भी हो चुके हैं।

WEF में होगी आय असामनता पर चर्चा

सर्वे के अनुसार, दुनियाभर में ये स्थिति काफी भयावह है। दुनियाभर में संकलित कुल आय में 82 फीसदी योगदान अमीरों का है जबकि 3.7 अरब की आबादी का इसमें कोई हाथ नहीं है। सर्वे की ये रिपोर्ट अभी इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि दावोस में शुरु होने जा रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में ‘बढ़ती आय’ और ‘लिंग असामनता’ पर चर्चा होना अहम माना जा रहा है। पिछले साल की रिपोर्ट में ये बात सामने आई थी कि भारत के एक फीसद अमीरों की आबादी देश के कुल धन का 58 फीसदी उत्पन्न करते हैं, जो वैश्विक स्तर पर 50 फीसदी से भी ज्यादा है। लेकिन इस साल की रिपोर्ट ये दर्शाती हैं कि एक फीसद अमीरों की आय में पिछले साल से 20.9 लाख करोड़ से बढ़ोत्तरी हुई है।

रिवॉर्ड वर्क नॉट वेल्थ’ सर्वे ने कहा- हर 2 दिन में बन रहा एक अरबपति

‘रिवॉर्ड वर्क नॉट वेल्थ’ नाम से जारी एक सर्वे में कहा गया है कि जिस तरह से वैश्विक अर्थव्यवस्था में अमीरों का ही योगदान है, जबकि सैकड़ों मिलियन की गरीब आबादी किसी तरह बस अपना जीवन काट कर रही है। साल 2017 की रिपोर्ट में ये बात सामने आई थी कि हर दो दिन में एक अरबपति बन रहा है। 2010 से ही अरबपतियों का धन 13 फीसदी की दर से बढ़ा है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में अमीरों की आय के जितना धन कमाने में मिडिल क्लास के लोगों को 941 साल का समय लग सकता है।

CEOs के वेतन में 60 प्रतिशत कटौती का समर्थन

दावोस में आयोजित होने जा रहे वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम में भाग लेने जा रहे पीएम मोदी से ऑक्सफैम इंडिया ने अपील की है कि वो भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सभी को मौका दें न कि सिर्फ कुछ भाग्यशाली लोगों को। इसी कड़ी में देश में अधिक नौकरियां पैदा करने की बात की गई है। सर्वे में अमेरिका, ब्रिटेन और भारत जैसे देशों में सीईओ के वेतन में 60 प्रतिशत कटौती का भी समर्थन किया है। भारत के बारे में कहा गया है कि पिछले साल 17 नए अरबपति बने जिसके साथ ही इनकी संख्या बढ़कर 101 हो गई।

अरबपतियों की बढ़ती संख्या असफल अर्थव्यवस्था का संकेत

ऐसा कहा गया है कि भारत में अरबपतियों की संपत्ति में 20.7 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोत्तरी हुई है, जो किसी भी राज्य की शिक्षा बजट का 85 प्रतिशत धन है। ऑक्सफैम इंडिया के सीईओ निशा अग्रवाल ने कहा है कि ये चिंताजनक है कि भारत में आर्थिक विकास का लाभ कुछ ही लोगों के हाथों में है। अरबपति की संख्या में बढ़ोत्तरी एक संपन्न अर्थव्यवस्था का संकेत नहीं है, बल्कि ये असफल आर्थिक व्यवस्था का एक लक्षण है। उन्होंने कहा है कि बढ़ता विभाजन लोकतंत्र को कमजोर करता है और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है। उन्होंने ये भी बताया कि दस अरबपतियों में से 9 पुरुष है जो लैंगिक भेदभाव को भी दिखाता है। भारत में केवल चार महिला अरबपति है जिसमें से तीन को विरासत में मिली है।

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