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जब 45 सालों तक जमा किए सिक्कों को बैंक लेकर पहुंचा ये आदमी, कर्मचारी नौकरी छोड़ने के लिए हुए तैयार, जानिए वजह

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बचपन में हम सभी लोगों को सिक्के जमा करने के शौक होता है। इस तर का जुनून कई बार चढ़ता है और उतरता है। अकसर देखा जाता है कि इस तरह के शौक हमें बचपन में चढ़ते है और बड़े होते-होते खत्म हो जाते है। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी है जिनका ये शौक बड़े होने के बाद भी खत्म नहीं होता। आज ऐसा ही एक मामला हम आपके सामने लेकर आए है जिसे पढ़ने के बाद आप हैरान रह जाएंगे और सोच में पड़ जाएंगे कि ऐसा भी कभी हो सकता है।

एक इंसान को चिल्लर जमा करने का शौक ऐसा चढ़ा जो 45 तक खत्म ही नहीं हुआ। आज हम इसी इंसान के बारे में आपको बताने जा रहे है जिस इंसान ने अपने सिक्के जमा करने के शौक को कभी मरने नहीं दिया। इस इंसान ने करीब 45 साल तक चिल्लर जमा किए और इन चिल्लरों को कई बैरल्स में भरकर रखा। फिर 45 सालों के बाद इस इंसान ने इस सभी सिक्कों को बैंक में जमा करने का मन बना लिया।

असल में आज जिस इंसान के बारे में हम आपको बताने जा रहे है वह भारत के नहीं है बल्कि लूसियाना के रहने वाले है और इस इंसान का नाम ओथा एंडर्स है। इन्होंने 45 साल तक चिल्लर जमा किए और फिर उन्हें एक दिन बैंक में जमा करने का फैसला कर लिया। ऐसे ही चिल्लर इकटठा करते हउए उन्होंने कम से कम 12 बैरल्स पूरी तरह से भर लिए थे और जब वह उन सिक्कों को बैंक में जमा करवाने गए तो बैंक वालों के होश उड़ गए। उनकी किसमत काफी अच्छी थी क्योंकि जब वह चिल्लर बैंक में जमा कराने गए तो बैंक वाले पुरानी करंसी भी जमा करने के लिए तैयार हो गए। लेकिन सभी लोग हैरान तब हुए जब उन्होंने 12 बरल्स में जमा चिल्लर गिनना शुरु कर दिया। बैंक वालों को चिल्लर गिनने में कम से कम 5 घंटे का समय लगा।

सबसे हैरानी वाली बात तो यह थी कि जब चिल्लर बैंक में जमा कराने की बारी आई तो कुछ कर्मचारी नौकरी छोड़ने के लिए भी तैयार हो गए थे। आपने कभी चिल्लर जमा किए होंगे तो ज्यादा से ज्यादा 1000 रुपये जमा किए होंगे। लेकिन जब इस इंसान के चिल्लर गिनने के बाद किमत लगाई गई तो वह करीब 3.5 लाख रुपये बनी। ओथा इन सिक्कों की कीमत जानकर खुद भी हैरान रह गए थे और बैंक कर्मचारियों के तो वैसे ही होश उड़ गए थे।

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