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सुप्रीम कोर्ट, आधी रात और चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के बीच का ये अजीब इत्तेफाक आपको भी चौंका देगा…

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कर्नाटक में सरकार बनाने को लेकर चल रही खींचतान के बीच ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। बहुधवार देर रात को कांग्रेस की तरप से सुप्रीम कोर्ट में तुरंत सुनवाई के लिए अर्जी दी गई जिसे चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने स्वीकार कर लिया था। ऐसा देश के इतिहास में दूसरी बार हुआ है कि कोर्ट ने इस तरह से आधी रात को सुनवाई की हो।

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट, आधी रात और चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के बीच में एक खास कनेक्शन है। आपको बता दें कि देश के इतिहास में 2 बार सुप्रीम कोर्च आधी रात को खुला है और दोनों बार दीपक मिश्रा की अहम भूमिका रही है। कर्नाटक मामले में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कांग्रेस की अर्जी को स्वीकार किया और आधी रात को तीन जजों की बेंच को नियुक्त किया।

वहीं साल 2015 में याकुब मेमन वाले मामले में दीपक मिश्रा की अगुवाई में तीन जजों की बेंच ने फैसला सुनाया था। यानी की देश में 2 बार आधी रात को सुप्रीम कोर्ट खुली और दोनों ही बार दीपक मिश्रा इस प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाते हुए नजर आए है।

कर्नाटक में ये रही भूमिका

कर्नाटक में राज्यपाल की तरफ से बीजेपी को सरकार बनाने के लिए न्यौता देने के खिलाफ कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। कांग्रेस की इस मांग पर मुख्य न्यायधीश ने सोच विचार करने के बाद आधी रात को अदालत लगाने का फैसला किया। देर रात को 1 बजे चीफ जस्टिस ने तीन जजों की बेंच को चुना और इस मामले की सुनवाई 2 बज कर 10 मिनट पर शुरु हुई। जो कि सुबह 5:30 बजे तक चली थी। इस बेंच में जस्टिस एके सीकरी, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एसए बोबडे शामिल थे। इसके अलावा कांग्रेस की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी, बीजेपी की तरफ से मुकुल रोहतगी और केंद्र सरकार की तरफ से एटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने पक्ष रखा।

याकुब मेमन मामला

इससे पहले 29 जुलाई 2015 को पहली बार आधी रात को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खुला था। मुंबई बम धमाकों के दोषी याकुब मेमन की याचिका, सुप्रीम कोर्ट, गवर्नर और राष्ट्रपति से खारिज होने के बाद फांसी से ठीक पहले आधी रात को मशहूर वकील प्रशांत भूषण समेत 12 वकील चीफ जस्टिस के घर पहुंचे थे। उन्होंने याकुब मेमन की फांसी पर रोक लगाने की मांग की थी। इसके बाद तत्कालीन चीफ जस्टिस एच एल दत्तू ने वर्तमान चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई में तीन जजों की बेंच बनाई थी और देर रात को ही जज सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और मामले की सुनवाई की। गौरतलब है कि तीन जजों की बेंच ने याकुब की फांसी की सजा को बरकरार रखा था।

ये भी है इत्तेफाक

आपको बता दें कि चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के अलावा इन दोनों मामलों में एक समानता और भी है। दोनों सुनवाई में जहां चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अहम भूमिका रही है। तो वहीं एक समानता ये भी रही है कि दोनों मामलों में आधी रात को अदालत लगी, देर रात तक सुनवाई लेकिन फैसले में कोई बदलाव नहीं किया गया न तो याकुब मेमन के फैसले में कोई बदलाव आया था और न कोर्ट की तरफ से कर्नाटक मामले में कोई बदलाव किया गया था।

 

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