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नोटबंदी के बाद देश में एक और परेशानी, पूरा देश परेशानी में घूम रहा

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वो दिन आज भी लोग नहीं भूल पाए है जब एक ही रात में सारे पुराने नोटों का चलन बंद हो गया था। 8 नवंबर को नोटबंदी के बाद कई लोगों को बड़ी परेशीनियों का सामना करना पड़ा था और गरीबों को तो कई मुशकिलें आई थी चाहे वो खाने की समस्या हो या फिर बच्चों के स्कूल की। लेकिन अब एक बार फिर से नोटबंदी जैसे हालात हो गए है। नोटबंदी के बाद अब फिर से एटीएम और बैंकों में कैश का संकट आ गया है। एटीएम में कैश की कमी होने के पीछे की कई वजह सामने आ रही है। बढ़ते एनपीए ने बैंकों की साख को हिला दिया है।  पैसा निकालने वाले लोगों की संख्या एकाएक बढ़ती जा रही है और 60 फीसदी एटीएम मशीन पर चार गुना लोड बढ़ गया है। इसके अलावा दो हजार के नोटों की बंद छपाई और 200 के नोटों के लिए एटीएम का कैलीब्रेट न होना भी एक बड़ी परेशानी बनता जा रहा है।

घाटे में चल रहे बैंकों को उबारने के लिए हाल ही में सरकार ने फाइनेंशियल रिजॉल्यूशन एंड डिपॉजिट इंश्योरेंस (एफआरडीआई) बिल पेश किया था। इस बिल को संसद में पेश करने की भी तैयारी की गई थी लेकिन बाद में इस पर कोई बात नहीं हुई और मामला शांत पड़ गया था। इस बिल के तहत यह प्रावधान दिया गया है कि अगर कोई बैंक किसी भी वजह से कभी मुश्किलों में फंस जाता है तो जमाकर्ताओं के पैसों से उसे उबारा जा सकता है।

पीएनबी के साथ ही साथ कई बैंकों के घोटाले भी सामने आए थे जिस वजह से इस बात का खतरा बढ़ गया कि कई बैंक वित्तीय संकट में फंस सकते हैं और यही कारण है कि ग्राहक पहले की तुलना में एटीएम से ज्यादा कैश निकालने लगे हैं और एटीएम जल्दी खाली होते जा रहे हैं।

दो हजार के नोटों की छपाई बंद करने से संकट गहराया

आपको बता दें कि पिछले साल मई में दो हजार के नोटों की छपाई बंद कर दी गई थी। इन 2000 के नोटों की जगह पांच सौ और दो सौ रुपए के नोटों का चलन बढ़ाया गया था। दो हजार के नोट की छपाई बंद होने के बाद एटीएम में डाले जा रहे नोटों की वैल्यू कम हो रही है। एसबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया है कि अगर एटीएम को दो हजार के नोटों से भरा जाए तो यूजर्स कम से कम 60 लाख रुपए तक निकाल पाएंगे, लेकिन पांच सौ और सौ के नोटों की क्षमता सिर्फ 15 से 20 लाख रुपए तक ही रह गई है इसलिए एटीएम जल्दी खाली हो रहे हैं।

कालाधन के रूप में जमा हो रहा कैश 

आरबीआई ने अभी तक दो हजार के जितने भी नोट छापे है उनमें से तीस फीसदी नोट बाजार में या फिर बैंक में लौटकर नहीं आए है और इसका मतलब यह है कि नोट तिजोरी में रखे गए है। एक तो नोटों की छपाई बंद होने और मौजूदा करंसी में से दो हजार के नोटों के कालेधन के रूप में जमा होने से समस्या गंभीर हो गई है।

 

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