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महिलाओं का भारत में बढ़ा दबदबा, इस जगह पति है घरेलू हिंसा से परेशान

पुरुष प्रधान समाज से अकसर महिलाओं के साथ मारपीट के कई मामले सामने आते है और इसे एक सामान्य घटना माना जाता है। ऐसे कई मामलें बी होते है जिनमें महिलाएं पुलिस के पास जाकर शिकायत बी नहीं करती चुप चाप सब कुछ सह लेती है। लेकिन अब समाज काफी हद तक बदल चुका है। आंकड़ों के मुताबिक इस बात का पता चलता है कि महिलाओं के हाथों से पिटने वाले पुरुष भी कम नहीं हैं और वह इस पिटाई से कापी परेशान हो गए है जिस वजह से अब पुरुष शिकायत भी करने लगे है।

मध्यप्रदेश में पुलिस को मिली शिकायत के मुताबिक बताया गया है कि राज्य में औसतन हर महीने 200 पति अपनी पत्नियों से पिटते हैं। पिछले चार महीने के आंकड़ों की तरफ चले तो यह पता चला है कि राज्यभर में कम से कम 800 से ज्यादा पतियों ने पत्नियों के हाथों प्रताड़ित किए जाने की शिकायत दर्ज करवाई है। राज्य में अगर अब हम शहरों की बात करें तो शहरों के लिहाज से इंदौर इस मामले में सबसे पहले नंबर पर है। यहां जनवरी से अप्रैल 2018 तक चार महीने में 72 पतियों ने अपनी पत्नियों द्वारा किए जाने वाली पिटाई से परेशान होकर शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई है। इस सूची में दूसरे स्थान पर भोपाल का नाम आता है कियोंकि भोपाल के 52 पतियों ने अपनी पत्नियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है। इस सूची की तरफ अगर ध्यान दे तो पूरे प्रदेश में 802 पतियों ने अपनी पत्नियों पर प्रताड़ना की शिकायत दर्ज करवाई है।

चार महीने में पिटे 800 पति 

यूं तो इस मामले को सामान्य तौर पर देखा जाता है कि घरेलू हिंसा केवल महिलाओं के साथ ही होती है। जबकि ‘बीटिंग हसबैंड इवेंट’ की श्रेणी बनने के बाद तस्वीर का दूसरा रुख भी सामने आता जा रहा है। शर्मा द्वारा बताया गया है कि ‘डायल 100’ ने जनवरी से प्रदेश में ‘बीटिंग हसबैंड इवेंट’ और ‘बीटिंग वाइफ इवेंट’ की श्रेणी को घरेलू हिंसा की श्रेणी से पूरी तरह अलग कर दिया। नतीजा यह निकल कर सामने आया है कि जनवरी 2018 से अप्रैल तक की अवधि में ‘डायल 100’ के प्रदेश स्तरीय नियंत्रण कक्ष में 802 पति घर में अपनी पिटाई की पुलिस के पास जाकर शिकायत दर्ज करवा चुके हैं।

बदलते वक्त के साथ महिलाओं में प्रतिरोध की क्षमता बढ़ी 

घरेलू हिंसा का हर रूप बहुत ही निंदनीय है, लेकिन बदलते समय के साथ समाज में भी कई तरह के बदलाव देखे जा रहे है। सदियों से अस्तित्व और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहीं महिलाएं अब तालीम, प्रचार माध्यमों और कानूनी अधिकारों की जानकारी के चलते प्रतिरोध करने लगी हैं।

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