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वित्त मंत्री ने बताया कि क्यों नहीं दी गई मिडल क्लास को टैक्स में छूट

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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने साल 2018-19 के बजट में मिडल क्लास को कोई राहत नहीं ही है जिसके चलते सरकार सवालों के घेरे में आ गई है।। इन सवालों का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि उन्होंने अलग-अलग तरीकों से छोटे करदाताओं को राहत दी है। जेटली ने अपने कार्यकाल में दी गई विभिन्न राहतों का जिक्र करते हुए कहा कि ये जरूरी नहीं कि मध्य वर्ग के लोगों को राहत देने के लिए टैक्स स्लैब ही बदलें।

सिर्फ भारत में 5% का टैक्स स्लैब

जेटली ने कहा कि छोटे टैक्सपेयर्स को टैक्स के दायरे में लाने के लिए पिछले साल 2.5 लाख से 5 लाख रुपये वाले स्लैब पर टैक्स की दर 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत की थी। जेटली ने कहा कि 5 प्रतिशत का स्लैब दुनिया के सिर्फ हमारे ही देश में हैं। ये दुनिया का न्यूनतम टैक्स स्लैब है। विभिन्न मीडिया घरानों के प्रतिनधियों के साथ ओपन हाउस मीटिंग में वित्त मंत्री ने कहा कि हमने 50, 60, 70 हजार रुपये महीना आमदनी वाले छोटे कर दाताओं को राहत देने के लिए ये अलग-अलग तरीके अपनाए है। हमने इन तरीकों से उनकी जेब में ज्यादा पैसे डालने की कोशिश की है। छोटे करदाताओं को राहत देने के लिए ये जरूरी नहीं है कि टैक्स स्लैब को ही बदलें।

पहले 2 लाख था, 3 लाख कर दिया टैक्स फ्री

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि भारत में टैक्स वसूलना और टैक्स पेयर्स की तादाद बढ़ाना एक गंभीर चुनौती है। इसलिए उनके पिछले चार-पांच बजट का पूरा हिसाब-किताब करने पर ये पता चलेगा कि करीब-करीब सभी बजट में छोटे टैक्स पेयर्स को चरणबद्ध तरीके से राहत दी गई है। उन्होंने कहा कि जब मैं वित्त मंत्री बना तो टैक्स छूट की सीमा 2 लाख रुपये थी। मैंने इसे 3 लाख रुपये कर दिया है। दरअसल, दो साल बाद मैंने कहा कि अगले 50 हजार रुपये के लिए आपको कोई टैक्स नहीं देना है। तो छोटे टैक्स पेयर्स के लिए टैक्स छूट की प्रभावी सीमा 3 लाख रुपये हो गई।

क्या है जेटली का मतलब?

दरअसल, अरुण जेटली का कहना है कि उन्होंने टैक्स छूट का स्लैब 2 लाख से बढ़ाकर 2.50 लाख कर दिया और 2017-18 के बजट में 3.5 लाख तक की सालाना आमदनी वालों को टैक्स में 2,500 रुपये की छूट दे दी है। ऐसे में 3 लाख रुपये तक की कमाई वालों को टैक्स से पूरी तरह मुक्ति मिल गई क्योंकि 2.50 लाख रुपये की कमाई टैक्स फ्री है। बाकी के 50 हजार रुपये पर 5 प्रतिशत से 2,500 रुपये का जो टैक्स लगता है वो फ्री हो गया। ऐसे में 3 लाख रुपये तक की आमदनी टैक्स फ्री हो गई जबकि 3.5 लाख तक की सालाना आमदनी पर आपको 2500 रुपये का टैक्स देना पड़ेगा।

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