अब इंश्योरेंस कंपनियां करेंगी इन खास बिमारियों का भी इंश्योरेंस…

आज कल हर जगह हर चीज का इंश्योरेंस किया जाता है। फिर चाहे वो गाड़ी हो, मोटर साइकिल हो या फिर इंसान। हर चीज की इंश्योरेंस हो रही है और इंश्योरेंस कंपनियां मोटा पैसा भी बना रही है।

आपको बता दें कि इंश्योरेंस सेक्टर के नियम-कायदे को तय करने वाली संस्था इंश्योरेंस रेग्युलेटरी ऐंड डिवेलपमेंट अथॉरिटी (इरडा) ने इंश्योरेंस कंपनियों को मानसिक बीमारियों का भी मेडिकल इंश्योरेंस पॉलिसी बनाने का फैसला किया है। कुछ समय में ये इंश्योरेंस कम्पनियां अपने नियम में बदलाव कर इसे लागू कर देगी।

इरडा ने भी ये कहा है कि मानसिक बीमारी को भी शारीर की बाकी बीमारियों की तरह ट्रीट किया जाएगा। संस्था की तरफ से मानसिक बीमारियां और उनसे जुड़े मिथ और बाकी चीजों कों गलत समझा जाता है। हमारा यह कदम उनके लिए है जो मानसिक रूप से बीमार है और समाज में उन्हें गलत नजर से देखा जाता है।

इंश्योरेंस कंपनियां का कहना यह है कि मानसिक रोगियों के लिए एक ब्रह्मास्त्र की तरह काम करेगी और मानसिक रूप से जो बीमार है। वो भी इंश्योरेंस में इसका लाभ ले पाएंगे। वैसे तो आम तौर इंश्योरेंस कंपनियां मानसिक बीमारियां को 2-3 साल के बाद कवर करती हैं। इंश्योरेंस कंपनियां यह इरडा मेंटल हेल्थकेयर ऐक्ट 2017 के आधीन करती है।

इरडा ऐक्ट के सेक्शन 21(4) के हिसाब से हर इंश्योरेंस कंपनी को मानसिक रोगियों के लिए मानसिक इंश्योरेंस करना चाहिए। आपको बता दें कि मेंटल हेल्थकेयर ऐक्ट 2017 29-05-2018 से लागू हो गया था।

सिग्ना टीटीके हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी की चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर ज्योति पुनिया का कहना है कि “इससे मानसिक बीमारियों से जूझ रहे लोगों को सम्मानजनक जीवन जीने का मौका मिलेगा। साथी ही उन्होंने कहा कि इससे जागरूकता फैलेगी और मानसिक बीमारियों से पीड़ित लोगों को स्वीकृति मिलेगी।”

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