बीजेपी सरकार के इस बड़े फैसले को सुप्रीम कोर्ट में मिली चुनौती, अब क्या करेंगे पीएम मोदी

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मोदी सरकार द्वारा हाल ही में आर्थिक रुप से कमजोर सवर्ण जाति के लोगों को 10 फीसदी आरक्षण दिए जाने वाले फैसले पर काफी बवाल देखने को मिला। लेकिन एक लंबी बहस के बाद संसद के दोनों सदनों में इस विधेयक को मंजूरी मिली है और संविधान संशोधन कर इसे अब लागू किए जाने की योजना है। लेकिन इस विधेयक पर एक और नया बवाल खड़ा हो गया है, जहां इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। गैर सरकारी संगठन यूथ फॉर इक्वेलिटी और कौशल कांत मिश्रा ने अपनी याचिका में इस विधेयक को निरस्त करने का अनुरोध करते हुए कहा है कि, एकमात्र आर्थिक आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता।

कौशल कांत ने अपनी याचिका में कहा है कि, ‘इस विधेयक से संविधान के बुनियादी ढांचे का उल्लंघन होता है क्योंकि सिर्फ सामान्य वर्ग तक ही आर्थिक आधार पर आरक्षण सीमित नहीं किया जा सकता है और 50 फीसदी आरक्षण की सीमा लांघी नहीं जा सकती।’

आपको बता दें कि, राज्यसभा ने बुधवार को 124वें संविधान संशोधन विधेयक को सात के मुकाबले 165 मतों से पारित किया है। वहीं सदन ने विपक्षी सदस्यों के पांच संशोधनों को अस्वीकार कर दिया। बता दें कि इससे पहले, मंगलवार को लोकसभा में भी काफी बहस के बाद इसे समर्थन हासिल हुआ जिससे यह पारित हो गया था। आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए आरक्षण का यह प्रावधान अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गो को मिलने वाले 50 फीसदी आरक्षण से अलग होगा। जिसे लेकर अब देशभऱ में नई बहस छिड़ गई है।

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