आगामी लोकसभा चुनाव में राजनीतिक पार्टियों की होगी हालत खराब! जानें वजह…

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देश में इस साल लोकसभा चुनाव होने वाले हैं जिसे लेकर सभी राजनीतिक पार्टियों ने अपनी कमर कस ली है। सभी पार्टियां अपनी-अपनी जीत का दावा कर रही हैं। कई पार्टियों ने तो बीजेपी को सत्ता से बेदखल करने के लिए गठबंधन भी कर लिया है।  हाल ही में यूपी की दो सबसे बड़ी धुर विरोधी पार्टियां रहीं बसपा और सपा ने हाथ मिला लिया है। वहीं अब ऐसी खबरें भी सामने आ रहीं हैं कि बिहार में आजेडी-बसपा के साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ने का विचार बना रही है। बुआ-बबुआ के एक साथ आने पर बीजेपी को काफी हद तक यूपी में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

आपको बता दें कि हाल ही में पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में  बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा। बीजेपी को राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ में हार का स्वाद चखना पड़ा और इस हार की कई वजहे सामने आईं।  दरअसल, मतदाताओं ने नोटा के विकल्प को तमाम क्षेत्रीय दलों से ज्यादा अहमियत दी थी। छत्तीसगढ़ चुनाव में सर्वाधिक 2.1 प्रतिशत वोट नोटा के खाते में गए। जबकि मिजोरम में नोटा का प्रतिशत सबसे कम (0.5 प्रतिशत) दर्ज किया गया। चुनाव वाले राज्यों में नोटा का मत प्रतिशत आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी सहित अन्य क्षेत्रीय दलों से अधिक दर्ज किया गया था।

आंकड़े पर नजर डालें तो पता चलता है कि 2013 में नोटा लागू होने के बाद से मार्च 2018 तक सभी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में 1.33 करोड़ से ज्यादा वोट नोटा को मिले हैं। इस बार हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में 15 लाख से ज्यादा वोट नोटा को दिए गए हैं।

अब देखना ये होगा कि लोकसभा चुनाव में नोटा का क्या आंकड़ा होगा। क्या लोकसभा चुनाव में भी मतदाता राजनीतिक पार्टियों को वोट देने से ज्यादा नोटा दबाना पसंद करेंगे।

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