1980 में 2 सीटों से शुूरुआत करने वाली BJP ने आज 282 सीटों पर खिलाया कमल

6 अप्रैल 1980 के बॉम्बे और आज मुंबई में आज की ही शाम को एक नई पार्टी का जन्म हुआ था। छोटे से शुरुआत करने वाली यही पार्टी आने वाले समय में देश की सियासत को पूरी तरह से बदलने जा वाली थी। भारतीय जनता पार्टी की शुरुआत आज के दिन ही 1980 में हुई थी। उस दौरान पार्टी के अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी थी। 1951 के समय में संघ का बदला हुआ रुप कही जाने वाली बीजेपी के पहले राष्ट्रीय अधिवेशन में ही अटल ने एक भविष्यवाणी की थी।

अटल ने उस शाम कहा था, ‘मैं भारत के पश्चिमी घाट को मंडित करने वाले महासागर के किनारे खड़े होकर यह भविष्यवाणी करने का साहस करता हूं कि अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा।’

अटल के इस एलान के 34 सालों बाद  2014 में देशभर में कमल इस तरह खिला कि फिर बीजेपी ने कभी मुड़कर नहीं देखा। 34 सालों बाद रफ्तार पकड़ने वाली बीजेपी ने केंद्र से लेकर 21 राज्यों पर में अपने दम पर कमल खिला दिया। आज मोदी और शाह की जोड़ी ने बीजेपी को इस मुकाम पर पहुंचाया है जिसका सपना खुद अटल ने भी नहीं सोचा होगा।

बीजेपी ने अपने 38 सालों के सफर में 4 युग देखें हैं – अटल युग, आडवाणी युग, अटल-आडवाणी युग और मोदी-शाह युग। इन 4 अलग अलग समय का सफर तय कर आज बीजेपी ने भारतवर्ष के नक्शे को केसरिया में बदल दिया है। आज बीजेपी का स्थापना दिवस है। इस मौके पर हम बीजेपी से जुड़ी कुछ खास जानकारी के बारे में बात करेंगे।

अटल-आडवाणी ने इस तरह किया पार्टी का दिशा निर्देश

इस समय में बीजेपी में अटल बनाम आडवाणी के बहुत चर्चे थे। बीजेपी ने भी सत्ता तक पहुंचने के लिए गठजोड़ का रास्ता अपनाया और इसके लिए अटल का चेहरा सामने किया। साल 1996 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 161 सीटें मिलीं और आजादी के बाद पहली बार कांग्रेस पार्टी के नहीं बल्कि किसी दूसरी पार्टी की सरकार बनने जा रही थी। इस जीत के बाद वाजपेयी ने पीएम का पद संभाला यह सरकार महज 13 दिनों तक ही चली और गिर गई।

वाजयेपी ने इस्तीफा देने से पहले पहले लोकसभा में अपना बेहस प्रसिद्ध भाषण दिया। इस समय दूरदर्शन के इतिहास में भी पहली बार किसी कॉन्फिडेंस मोशन को लाइव दिखाया गया था। वाजपेयी ने भविष्यवाणी की, कि कोई भी सरकार स्थाई नहीं बनेगी। उनकी यह भविष्यवाणी भी सही साबित हुई। इस बीच दो सरकारें (देवेगौड़ा और गुजरात) बनीं और गिरीं। 1998 में मध्यावधि चुनाव कराए गए और सहयोगी के साथ एनडीए बना बीजेपी ने चुनाव लड़ा और पार्टी अपने दम पर ही 182 सीटें जीत सबसे बड़ी पार्टी बन गई और सहयोगियों के साथ वाजपेयी ने फिर सरकार बना ली।

राज्यों में एक के बाद एक जीत पर 2004 में केंद्र सरकार हाथ से निकली

वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में राज्यों में बीजेपी ने विस्तार किया। 2002 में गुजरात के अलावा 2003 में छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनी थी। बीजेपी ने पूरे जोश के साथ इंडिया शाइनिंग का नारा दिया, लेकिन पार्टी के लिए यह जरुरत से ज्यादा साबित हो गया। 2004 के चुनाव में पार्टी को बुरी तरह हार मिली। बीजेपी को 136 सीटें मिलीं वहीं कांग्रेस की अगुवाई में यूपीए की सरकार ने देश की सत्ता संभाली।

2014 में की जबरदस्त वापसी

2014 के चुनावों के लिए मोदी को पार्टी का अहम चेहरा बनाया गया, जहां मोदी ने भी हर जगह धुंआधार प्रचार किया। जनता से अच्छे दिनों के वादे किए गए। सबका साथ, सबका विकास लोगों की जुबान पर दिया गया। मोदी ने देश से 300 से अधिक सीटें मांगी। देश ने 300 तो नहीं लेकिन 282 सीटें देकर 1984 के बाद फिर से बहुमत के साथ बीजेपी को सरकार बनाने का मौका दिया।

 

2 पार्टी वाली बीजेपी 2014 में अकेले अपने दम पर सत्ता पर काबिज हो गई। मोदी ने एक बार फिर अपने नेतृत्व में पार्टी की ताकत को साबित किया। ब्रैंड मोदी ने बीजेपी को वह दिया जो अटल-आडवाणी की जोड़ी भी नहीं दे पाई थी। चुनावों में जीत के बाद पीएम बने मोदी ने कहा कि इस जीत के कैप्टन राजनाथ सिंह थे और मैन ऑफ द मैच अमित शाह। यह एक तरह से बीजेपी में मोदी-शाह युग की शुरुआत थी, जिसके दौरान बीजेपी ने कई सफलता की सीढ़ियां चढ़ी।

असंभव को संभव करती मोदी-शाह की जोड़ी

मोदी-शाह की जोड़ी ने बीजेपी के लिए हर एक असंभव चीज को भी संभव कर दिखाया है। आज अगर राजनीतिक दलों के हिसाब से भारत का नक्शा देखा जाए तो तस्वीर भगवा ही नजर आती है। हालांकि 2014 के बाद से हुए लोकसभा के अधिक उपचुनावों में बीजेपी को हार मिली है। गुजरात में भी कांग्रेस ने बीजेपी को कड़ी चुनौती दी थी।

मई में कर्नाटक विधानसभा के चुनाव होने हैं और 2019 के लोकसभा से पहले राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में भी चुनावी मैदान देखने को मिलेगा। विपक्ष दलितों, अल्पसंख्यकों के मुद्दे को लेकर हमलवार है। बैंकिंग घोटाले और किसानों के मुद्दों को लेकर मोदी सरकार घिरती आई है। ऐसे में बीजेपी के सामने चुनौती है कि वह 2019 में भी ब्रैंड मोदी को कैसे बनाए रख पाएगी। यह मोदी-शाह युग के लिए भी एक बड़ी परीक्षा है।

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