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मोदी ने दिखाया 56 इंच का सीना, पाकिस्तान ने भारत के सामने टेके घुटने रखा ये प्रस्ताव…

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साल 2016 सर्जिकल स्ट्राइक के 2 साल बाद आखिरकार पाकिस्तान, भारत के सामने घुटने टेकने के लिए मजबूर हो ही गया। पाकिस्तान को ये बात बहुत अच्छे से पता है कि भारत अब काफी ताकतवर हो चुका है और उसे कई देशों का साथ मिल चुका है। पाकिस्तान जहां ये बात समझ चुका है कि भारत से पंगा लेना अब उसके लिए काफी नुकसानदायक हो सकता है और इसी डर के साथ पाकिस्तान ने अपनी हार मानते हुए पहली बार भारत के सामने शांति की पेशकश रखी है।

दरअसल, भारत और पाकिस्तान की सेना 15 साल पुराने संघर्ष विराम समझौते का पूरी तरह पालन करने पर सहमत हो गई है। बता दें कि मंगलवार शाम 6 बजे दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच हॉटलाइन पर बात हुई और बातचीत के दौरान पाक ने संघर्ष विराम समझौते का प्रस्ताव रखा, पाकिस्तान के इस समझौते को भारत ने स्वीकार कर लिया है। 29 सितंबर 2016 को हुए सर्जिकल स्ट्राइक के बाद यह पहला मौका है, जब दोनों देशों की सेना संघर्ष विराम के पालन पर सहमत हुई हैं।

एक दिन पहले ही सीजफायर उल्लंघन पर सुषमा ने दिया था कड़ा बयान

– विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सोमवार को ही पाकिस्तान, डोकलाम, भारत-चीन संबंध, रोहिंग्या और विजय माल्या के प्रत्यर्पण जैसे मसलों पर मीडिया के कई सवालों के जवाब दिए थे। विदेश मंत्री ने पाकिस्तान से विस्तृत बातचीत पर कहा कि, ‘जब सरहद पर जनाजे उठ रहे हों तो बातचीत की आवाज अच्छी नहीं लगती।’

जम्मू में सभी सेक्टर में पाकिस्तान ने हफ्ते भर पहले की थी एकसाथ गोलाबारी

– जम्मू क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तान की तरफ से पिछले बुधवार को भी संघर्ष विराम का उल्लंघन किया गया था। कठुआ, सांबा और आरएसपुरा की बस्तियों और चौकियों पर मोर्टार दागे गए। 24 घंटों में यहां 7 नागरिकों की मौत हो गई थी और बीएसएफ के 5 जवानों समेत 35 लोग जख्मी हुए थे।

पाक ने इस साल 908 बार तोड़ा संघर्ष विराम

– पाकिस्तान इस साल अब तक 908 बार संघर्ष विराम का उल्लंघन कर चुका है। रिहायशी इलाकों पर गोलाबारी के चलते पिछले दिनों सीमावर्ती इलाकों के एक लाख से ज्यादा लाेगों को घर छोड़कर भागना पड़ा था। इन घटनाओं में सुरक्षाबलों के 18 जवानों सहित 43 लोगों की जान जा चली गई थी। तो वहीं साल 2017 में भी पाकिस्तान ने 860 बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया था।

कश्मीर में ‘सीजफायर’ नहीं, बल्कि ‘सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन’: राजनाथ

– इधर लखनऊ में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को रमजान के महीने में सुरक्षाबलों द्वारा ऑपरेशन नहीं करने को लेकर कहा था कि, ‘सेना हाथ बांधकर नहीं बैठी है। कश्मीर में ‘सीजफायर’ नहीं है बल्कि ‘सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन’ है।’

– मोदी सरकार के चार साल की उपलब्धियां गिनाते हुए राजनाथ ने स्पष्ट करते हुए कहा था कि, ‘यह युद्धविराम नहीं था, बल्कि रमजान को देखते हुए सेना ने ऑपरेशन को रोक दिया था, लेकिन इसमें साफ्तौर पर कहा गया था कि किसी भी आतंकी गतिविधि के होने पर हम ऑपरेशन दोबारा शुरू करेंगे। हमने अपने सुरक्षाबलों के हाथ नहीं बांध रखे हैं। हमारे सुरक्षाबलों ने हमला होने पर 5 आतंकियों को मार गिराया है।’

उग्रवाद की घटनाओं में कमी आई

– राजनाथ ने ये भी कहा था कि, ‘देश के पूर्वोत्तर में दो दशक में उग्रवाद में 85 फीसदी कमी आई है। सुरक्षाकर्मियों और आम नागरिकों की मौत के मामले में 96 फीसदी की कमी आई है और नक्सलवाद की घटनाओं में भी कमी आई है।’

– गृहमंत्री राजनाथ के मुताबिक, ‘नक्सलवाद 2013 में 76 जिलों तक था जो 2018 तक 58 जिलों में सीमित रह गया है। हमने क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम बनाया, जिसकी विदेश में भी तारीफ हुई। 2010-2013 में 471 आतंकी मारे गए थे।’

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