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जानें कैसे कर्नाटक चुनाव में जीत के बाद बीजेपी की राह 2019 चुनाव के लिए हो जाएगी आसान

कर्नाटक विधानसभा चुनाव को लेकर अलग ही उत्साह हर जगह देखने को मिल रहा है। बीजेपी का कमल इस बार कर्नाटक में भी खिलता हुआ नजर आ रहा है। कर्नाटक चुनाव की मतगणना के शुरुआती रुझानों में बीजेपी को 117 और कांग्रेस को 63 सीटों पर बढ़त मिलती हुई नजर आ रही है। वहीं अगर जेडीएस की बात करे तो जेडीएस को फिलहाल 40 सीटों पर बढ़त मिल रही है। बीजेपी इस बार कर्नाटक चुनाव में बहुमत की तरफ बढ़ती हुई नजर आ रही है। ऐसे में कई राजनीतिक विशेषज्ञों ने अपनी राय देते हुए कहा है कि यह चुनाव बीजेपी के लिए 2019 का रासता और भी आसान बनाने में काफी सहायक सिद्ध होगा। इन नतीजों के पार्टी के लिए दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।

1. मिशन 2019 के आगाज के लिए अहम

कर्नाटक चुनाव में अब भी लोगों के अंदर जोश बरकरार है और जल्द ही 2019 लोकसभा चुनाव का आजाग भी होने वाला है। इसके साथ ही ऐसा भी माना जा रहा है कि कर्नाटक चुनाव के नतीजों से पहले ही बीजेपी ने 2019 लोकसभा चुनाव की तैयारियां भी शुरू कर दी थी। पार्टी ने कांग्रेस के 48 साल बनाम बीजेपी के 48 महीने का एक नारा भी जारी कर दिया है। इससे पहले गुजरात में चुनावी मुकाबला देखने को मिला था जो काफी मुश्किल था लेकिन बीजेपी ने उन चुनाव में भी जीत हासित की थी, इसके बाद कर्नाटक की जीत बीजेपी के लिए 2019 से पहले किसी सेमीफाइनल से कम नहीं होगी। आने वाले समय में बीजेपी की रणनीति मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों में उतरने की भी है और कर्नाटक के नतीजों से इन चुनावों में भी असर पड़ेगा।

2. ब्रांड मोदी पर फिर जोर

कर्नाटक चुनाव में अपनी जीत हासिल करने के बाद बीजेपी का गुजरात मॉडल कांग्रेस के कर्नाटक मॉडल के सामने और भी ज्यादा मजबूत दिखाई देगा। सबसे पहले बीजेपी ने 2014 के लोकसभा चुनावों में बंपर जीत हासिल की थी उसके बाद से ही ब्रांड मोदी का सफल अभियान लगातार जारी है। कम से कम देश के 20 राज्यों में बीजेपी और सहयोगी दलों की सरकारें हैं। बीजेपी ने इससे पहले पूर्वोत्तर के राज्य त्रिपुरा में वाम गढ़ पर कब्जा जमाने के बाद पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई और अब ब्रांड मोदी की अहम परीक्षा कर्नाटक में है।

3. विपक्ष की धार होगी कमजोर

गुजरात चुनाव के समय से ही कांग्रेस बीजेपी पर लगातार हमला कर रही है और बीजेपी भी तमाम मुद्दों पर घिरी हुई है। कर्नाटक में कांग्रेस और ज्यादा मुखर हुई क्योंकि इस बार वह अपने दुर्ग में लड़ाई लड़ रही थी। कर्नाटक की तरफ से राहुल गांधी के साथ ही साथ तमाम विपक्षी दल एकजुट होकर मोदी सरकार की नीतियों पर निशाना साधने में जुटे हुए है और बीजेपी सिर्फ बचाव और जवाबी मुद्रा में दिखाई दे रही थी। यह भी एक वजह है कि कर्नाटक में जीत 2019 के चुनावी रण से पहले बीजेपी के लिए संजीवनी साबित हो सकती है।

4. दक्षिण भारत पर बीजेपी-संघ की नजर

आपको बता दें कि 2008 के चुनाव में येदियुरप्पा के चेहरे को आगे करने के बाद बीजेपी ने कर्नाटक का रण जीत दक्षिण भारत में भी अपना खाता खोल चुका था। इस बार फिर से एक बार येदियुरप्पा पर भरोसा कर उन्हें इस रण में भी आगे कर दिया है। इस बार येदियुरप्पा कार्ड के साथ मोदी मैजिक का भी जोर था। अमित शाह का मिशन 120 उन दक्षिणी और पूर्वोत्तर के राज्यों की सीटों पर ही केंद्रित है जहां बीजेपी 2014 में जीत हासिल नहीं कर सकी थी लेकिन संभावनाएं अच्छी बनी थी। कर्नाटक का चुनाव इस रणनीति का भविष्य तय करने के लिए सबसे अहम साबित होगा।

5. कांग्रेस मुक्त भारत का नारा और बुलंद होगा

बीजेपी का शुरू से ही भारत को कांग्रेस मुक्त बनाने का सपना था और कर्नाटक का रण देखने के बाद ऐसा लग रहा है कि मोदी का स्वच्छ भारत अभियान चले न चले स्वच्छ कांग्रेस अभियान जरूर चल रहा है। कांग्रेस मुक्त भारत के नारे के लिहाज से कर्नाटक के नतीजे काफी अहम हैं।

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