2019 के लिए बीजेपी ने खेला कश्मीर में मास्टर स्ट्रोक…

बीजेपी ने आज अचानक से देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। जम्मू-कश्मीर में 3 साल से चल रही बीजेपी और पीडीपी गठबंधन की सरकार से आज बीजेपी ने अपना समर्थन वापस ले लिया है। जिस कारण महबूबा मुफ्ती को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ गया है। बीजेपी की तरफ से महासचिव और प्रदेश प्रभारी राम माधव ने प्रेस कॉन्फ्रेंंस कर इस बात का ऐलान किया है।

इससे पहले बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने जम्मू कश्मीर के नेताओं से मुलाकात की और सुबह पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी मिले और जम्मू कश्मीर का जायजा लिया है। बीजेपी ने जब ये अचानक ऐलान किया तो पूरे राजनीतिक गलियारे में हलचल मच गई थी। सभी दलों की तरफ से बयान आने लगे, लेकिन सभी ने अगली सरकार बनाने से वहां पर मना कर दिया है। जिससे साफ हो गया है कि अब जम्मू कश्मीर में राज्यपाल का शासन लगने वाला है।

अगर कश्मीर में राज्यपाल का शासन आता है तो इसका सीधा मतलब हो जाता है कि जम्मू कश्मीर में केंद्र सरकार का ही दबदबा रहेगा और मोदी सरकार की तरफ से सभी वो फैसले लिए जा सकते हैं जो वो गठबंधन सरकार में रहते हुए नहीं ले पा रहे थे। अगर अमित शाह के इस फैसले को 2019 के तराजू में तोल कर देखें तो इसके अलग सियासी मायने लिकल कर सामने आते हैं।

दरअसल रमजान के महीने में केंद्र सरकार की तरफ से जो संघर्ष विराम का फैसला महबूबा मुफ्की के कहने पर लिया गया था। उस दौरान जम्मू कश्मीर में आतंकियों ने जिस तरह से प्रदेश में हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया है, उससे बीजेपी सरकार पर आतंकियों के खिलाफ नर्मी बरतने के सवाल उठे थे। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और उनकी पार्टी की तरफ से बार-बार जम्मू कश्मीर में सरकार के विफल होने का भी आरोप लगाया गया था।

आपको बता दें कि जम्मू कश्मीर भारत की अखंडता का एक बड़ा प्रतीक है और वहां की हर गतिविधि पूरे देश की राजनीति को भी प्रभावित करती है। देश भर के लोगों की भावनाएं जम्मू कश्मीर से सीधे जुड़ती हैं। इसलिए बीजेपी ने आज समर्थन वापस लेने का एलान करते वक्त ये आरोप लगाया कि राज्य में आतंकवाद और अतिवाद बढ़ गया है, ऐसे में राज्य और राष्ट्रहित में हमने ये फैसला लिया है।

लोकसभा चुनाव में अब सिर्फ 10 महीने ही बचे हैं। आतंकवाद पर नरम रुख रखने पर बीजेपी की राष्ट्रीय आकांक्षा को नुकसान पहुंचा सकती थी, क्योंकि वो यही आरोप सत्ता से बाहर रहने पर हमेशा बहुत आक्रामक अंदाज में कांग्रेस पर लगाती रही है। प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी को ये संदेश देना था कि उनका रुख आतंक पर नरम नहीं है और वो राष्ट्रीय संप्रभुता और एकता से कोई समझौता नहीं कर सकती है।

इसके लिए एक मौका चाहिए था और युद्ध विराम की समय पूरा होने से पहले ही गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने इस मुद्दे पर अहम अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की, उसके बाद प्रधानमंत्री के साथ उनकी बैठक हुई और उन्होंने उन्हें पूरे हालात की जानकारी दी। लेकिन इस फैसले के बाद से बीजेपी और मोदी सरकार पूरी तरह से अपने फैसले ले सकते हैं और आतंकवाद के खिलाफ कड़े कदम उठा कर 2019 के लिए एक संदेश दिया जा सकता है। वहीं इस तरह से सरकार छोड़ कर बीजेपी ने 2019 के लिए जनता को संदेश दिया है कि वो देश की सुरक्षा के लिए सरकार छोड़ने को भी तैयार है।

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