जानिए क्यों अगले चुनाव में कांग्रेस की सरकार बनना है ना-मुमकिन

कर्नाटक में जैसे जैसे विधानसभा चुनाव की तारीख नजदीक आती जा रही है, जैसे-जैसे मतदान के दिन करीब आते जा रहे है वैसे-वैसे सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी के हाथ से सत्ता भी फिसलती हुई नजर आ रही है। ऐसा हम इस वजह से भी कह सकते है क्योंकि, जो हालात बन रहे हैं और पिछले कुछ हफ्तों की जो तस्वीरें उभर कर सामने आई है, उसके मुताबिक मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की किसान और गरीब विरोधी अय्याश छवि और राहुल गांधी के ढुलमुल नेतृत्व से प्रदेश की जनता तो काफी दुखी है साथ ही पार्टी के कार्यकर्ता भी कांग्रेस से काफी नाराज हैं। इसके अलावा भी कई ऐसी वजह सामने आ रही हैं, जिनसे यह बात साफ है कि कांग्रेस पार्टी का एक बार फिर से सत्ता में आना मुश्किल ही नहीं बल्कि ना-मुमकिन है।

सिद्धारमैया की अय्याश छवि पड़ेगी कांग्रेस पर भारी

आपको बता दें कि कांग्रेस सरकार द्वारा बनाए गए कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की छवि एक अय्याश नेता के रूप में बन गई है। पांच सालों में सरकार के काम से जनता बेहद खफा है। साथ ही सिद्धारमैया ने जनता की गाढ़ी कमाई को दोनों हाथों से अपने ऐशो-आराम पर ही उड़ाया है।

किसानों की अनदेखी से ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस के खिलाफ लहर

कर्नाटक में जब से कांग्रेस सत्ता में है तब से अभी तक कांग्रेस ने किसानों के लिए कुछ भी नहीं किया है। किसानों को न ही उनकी फसल के लिए उचित मूल्य दिया जाता है और न ही सरकार की तरफ से कोई भी मदद दी जाती है। कर्जा लेने के लिए राज्य के सभी किसान साहूकारों और संस्थानों पर ही निर्भर हैं। इतना ही नहीं कर्नाटक में खुदकुशी करने वाले किसानों की संख्या में बढ़ोतरी इस बात की गवाही खुद चीख-चीख कर देती है कि राज्य में किसान अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं। इन्हीं सब खास और बड़ी वजहों से गांव के इलाकों में कांग्रेस के खिलाफ क्रोध की लहर है और यह कांग्रेस को दोबारा सत्ता में आने से रोकने के लिए काफी है।

हिंदुओं को बांटने की रणनीति से कांग्रेस को नहीं होगा फायदा

सिद्धारमैया की कर्नाटक सरकार ने राज्य में आज तक विकास के लिए कुछ भी नहीं किया है और ऐसा भी कुछ नहीं हुआ जिससे राज्य के लोग कांग्रेस को वोट दें। इसीलिए सिद्धारमैया ने भी चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस की फूट डालो और राज करो की राजनीति को अपनाया है। अगर हम कांग्रेस की बांटने वाली राजनीति की बात करे तो कांग्रेस सरकार ने एक तरफ मुस्लिम तुष्टिकरण को हवा दी और दूसरी तरफ हिंदुओं को बांटने के लिए चाल चली। लेकिन हिंदुओं को बांटने की यह रणनीति कांग्रेस को उल्टी पड़ती हुई दिखाई दे रही है, क्योंकि राज्य की जनता में यह संदेश जा चुका है कि कांग्रेस पार्टी सिर्फ सत्ता पाने के लिए यह कर रही है।

टिकट बंटवारे में वंशवाद से कांग्रेस के आम कार्यकर्ताओं में नाराजगी

यह बात तो सभी लोग अच्छे से जानते है कि किसी भी पार्टी की जीत पाने के लिए उसके कार्यकर्ताओं का जोश और उत्साह की जरूरत होती है। कांग्रेस पार्टी के खुद के कार्यकर्ता ही चुनाव से पहले हाईकमान की हरकतों की वजह से कांग्रेस से बेहद नाराज हैं। पिछले दिनों टिकट बंटवारे में कांग्रेस ने राहुल गांधी से प्रभावित होकर नेताओं के बेटे-बेटियों को जमकर टिकट बांटे हैं। जिस वजह से राज्य के तमाम जिलों में टिकट की उम्मीद लगाए उम्मीदवारों ने कांग्रेस की इस नीती के खिलाफ जमकर विरोध-प्रदर्शन भी किया था।

चुनाव पूर्व सर्वे में कांग्रेस को नुकसान

कर्नाटक चुनाव की ओर रुख करें तो भारतीय जनता पार्टी सत्ता धारी कांग्रेस की पार्टी से काफी आगे निकलती हुई दिखाई दे रही है। यह हाल तो राज्य में तब है जब अभी खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रचार की शुरुआत भी नहीं की है। मीडिया द्वारा किए गए एक चुनाव पूर्व सर्वे के मुताबिक बीजेपी की लोकप्रियता में जबरदस्त बढोत्री हुई है। पिछले चुनाव में बीजेपी के 19.9 प्रतिशत वोट मिले थे, वहीं इस बार 35 प्रतिशत वोट मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।

प्रचार में प्रधानमंत्री मोदी के उतरने के बाद बदलेगा माहौल

मतदान होने से तीन हफ्ते पहले ही कर्नाटक में कांग्रेस के खिलाफ माहौल बन कर तैयार हो चुका है। आपको शायद याद होगा, कुछ हफ्तों पहले पीएम मोदी ने कर्नाटक में रैली कर सिद्धारमैया पर ‘सीधा रुपैया सरकार’ कह कर हमला बोला था। जल्द ही पीएम मोदी की चुनावी रैलियां होने वाली हैं और उनका मुकाबला करने की हैसियत कांग्रेस में दिखाई नहीं दे रही है। यानी इस बार चुनाव में कांग्रेस पार्टी की सत्ता बचना मुश्किल नजर आ रहा है।

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