कार्रवाई के डर से गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने दिया इस्तीफा!

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गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल मे हुई 63 लोगों की मौत ने सबको सदमे में डाल दिया है और मौत का कारण आक्सीज्न की कमी ही बताई जा रही है। पहले जहां एक तरफ रेल दुर्घटना के बाद रेल मंत्री ने इस्तीफे दे दिया था और उसके बाद 24 घंटे में 63 मासूम लोगों की मौत के बाद नैतिकता सिर्फ प्रिंसिपल डॉ. राजीव मिश्र के इस्तीफे तक सीमित रह गई है। यह भी देखने वाली बात है कि कार्रवाई भी बस प्रिंसीपल पर हुई जिन्होंने इस्तीफा दिया है। विभाग के जिम्मेदार अफसर और नेताओं ने इस दिशा में ना तो नैतिकता की जरूरत समझी और ना ही कोई कार्रवाई की गई।




 

गोरखपुर हादसे के बाद तमाम देश मे सिर्फ इसी हादसे के उपर बात चल रही है। अब चाहे कोई कितने भी बहाने बनाए लेकिन मौतें तो हुई है और यह सच नहीं छुप सकता। लेकिन ये मौतें बड़े अफसरों और मंत्रियो को नैतिकता की याद दिलाने में असमर्थ रही है। जहां एक तरफ सारा देश बच्चों की मौत से दुखी है तो वहीं दूसरी तरफ नैतिकता सिर्फ मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. राजीव मिश्र के इस्तीफे पर सिमट गई है। डॉ. राजीव मिश्र को भी शायद अंदाजा हो गया था की पूरी कार्रवाई की गाज उन्हीं पर गिर सकती है इसलिए उन्होंने पूरी कार्रवाई से पहले ही चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक अपना प्रिंसीपल पद से इसतिफा दे दिया। उनकी नैतिकता भी विभाग से इस्तीफे तक नहीं पहुंची थी, बस प्रिंसिपल पद ही छोड़ा था। हालांकि बाद में उन्हें निकाल दिया गया था। अब उनके खिलाफ जांच होगी और फिर हमेशा की तरह बाहर, जो हमेशा ही होता रहा है। वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर ने खुल कर कह रहे हैं कि नैतिकता के आधार पर चिकित्सा शिक्षा मंत्री व स्वास्थ्य मंत्री दोनों को भी अपना पद छोडऩे चाहिए। पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्रीप्रकाश जायसवाल भी यही कह रहे है कि अब नैतिकता नहीं बेशर्मी पर फोकस है। अगर हिम्मत है तो मंत्री पद छोड़ें और शासन के जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।




 

गोरखपुर मेडिकल कालेज में ऑक्सीजन गैस पूरी तरह से ना देने का मसला सामने आ रहा है। चिकित्सा शिक्षा विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक इस मामले में लखनऊ के अफसरों की भी बहुत बड़ी गलतियां सामने आ रही है। जब यह सारी घटना हुई थी तो आनन-फानन धन जारी हुआ। इससे भी स्पष्ट है कि यदि ढिलाई की पूरी जांच हो जाए तो शासन स्तर पर भी तमाम अफसरों पर काफी सवाल उठ सकते है।




 

खबरों की माने तो शासन स्तर पर गोरखपुर मेडिकल कालेज के कामकाज में एक मैडम के हस्तक्षेप की भी चर्चा काफी जोरो शोरो से हो रहीं है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने सीधे तौर पर बताया है कि एलोपैथी विधा से इतर अन्य विधा की एक डॉक्टर गोरखपुर मेडकिल कालेज प्रशासन के एक वरिष्ठ दायित्वधारी की पत्नी हैं और कामकाज में उनकी बहुत ज्यादा दखलअंदाजी रहती है। मेडकिल कालेज में आपूर्ति के लिए जिम्मेदार ठेकेदारों व दुकानदारों आदि तक से मैडम मिलती रहती थीं। इसकी जानकारी शासन स्तर तक भी लोगों को थी लेकिन गोरखपुर मे यह हादसा होने की वजह से कोई भी अपना मुह नहीं खोल रहा था।

 

अब गौर करने वाली बात यह है कि इस घटने के काफी घंटो बाद सीएम योगी मिडीया के सामने पहुंचे। या तो योगी मिडीया से बचने की कोशिश मे है या फिर बात कुछ और है। और दूसरा सवाल यहा भी उटता है कि नितीश कुमार के स्तीफा देने से पहले टवीट करने वाले प्रधानमंत्री मोदी का अब तक कोई टवीट नही आया है। शायद मोदी भी इस घटना से बचने की कोशिश कर रहे है।

 

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