Press "Enter" to skip to content

बीजेपी के इस प्रस्ताव को मिला अखिलेश का समर्थन, तो अकाली दल नहीं देगा साथ…

Spread the love

इस वक्त राजनीतिक दल लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने के मत पर बंटे हुए नजर आ रहे हैं। चार राजनीतिक दलों ने इस कदम पर अपना समर्थन दिया है तो वहीं 9 दल इसके पूरी तरह से खिलाफ है। हालांकि सत्ताधारी बीजेपी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे पर विधि आयोग की तरफ से आयोजित परामर्श प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया है।

एक साथ चुनाव कराने के मुद्दे पर 2 दिनों के परामर्श प्रक्रिया के अंत में एनडीए के सहयोगी दल शिरोमणि अकाली दल के अलावा, एआईएडीएमके, सपा और टीआरएस ने इस विचार पर अपना समर्थन प्रकट किया है। तो वहीं बीजेपी के सहयोगी दल गोवा फॉरवर्ड पार्टी ने इस विचार का विरोध किया है, तो तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, द्रमुक, टीडीपी, भाकपा, माकपा, फॉरवर्ड ब्लॉक और जेडीएस ने भी इसका विरोध किया है। सपा, टीआरएस, आप, द्रमुक, तेदेपा, जदएस और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक ने विधि आयोग से मुलाकात की और अपने-अपने विचार रखे है।

सपा का प्रतिनिधित्व राम गोपाल यादव ने किया है और सपा ने इस विचार का समर्थन किया है। अगर एकसाथ चुनाव 2019 में हुआ तो उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की बीजेपी सरकार का कार्यकाल छोटा होगा और आम आदमी पार्टी के नेता आशीष खेतान ने विधि आयोग से कहा कि एक साथ चुनाव लोगों को एक सरकार बनाने से दूर रखने की एक ‘चाल’ है क्योंकि अगर दोनों चुनाव साथ हुए तो सदनों का कार्यकाल बढ़ाया जाएगा।

वहीं तेलंगाना के मुख्यमंत्री एवं टीआरएस प्रमुख के. चंद्रशेखर राव ने विधि आयोग को दिए एक लिखित जवाब में कहा है कि उनकी पार्टी देश में एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव कराये जाने का समर्थन करती है।

More from State PoliticsMore posts in State Politics »

Be First to Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.