रूठों को मनाने के काम में जुटी मायावती, बीजेपी के लिए बढ़ सकता है खतरा

चुनाव आने वाले है और रोज ही अलग-अलग तरह से राजनीतिक घमासान देखने को मिल रहा है। लेकिन फिलहाल अभी सभी राजनीतिक दल बीजेपी को हराने के लिए कड़ी से कड़ी योजना बनाने की कोशिश कर रहे है। पहले लोकसभा चुनाव में हार और फिर विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करने के बाद अब बसपा प्रमुख मायावती के पास अपनी पार्टी की इज्जत बचाने का एक मात्र सहारा 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव ही है। लिहाजा देखा जा रहा है कि बसपा प्रमुख मायावती वापसी करने में और अपना बेहतरीन प्रदर्शन करने में कोई भी कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती है, जिसकी वजह से बसपा में लगातार बैठकों का दौर भी जारी है।

आपको बता दें कि बीते रविवार को बसपा के राष्ट्रीय सचिव आरएस कुशवाहा की अध्यक्षता में भाईचारा बैठक का आयोजन किया गया था। बसपा की इस बैठक में पूरे प्रदेश से कई कोऑर्डिनेटर ने भी हिस्सा लिया। सूत्रों के मुताबिक बताया गया है कि बसपा की इस बैठक के पीछे की मुख्य वजह सिर्फ आने वाले लोकसभा चुनाव में बसपा पार्टी को मजबूती देना है और भाईचारे की बात करके बसपा के पुराने वोट बैंक को दोबारा से विश्वास में लेना है। इतना ही नहीं इस बैठक में परंपरागत वोट के साथ ही साथ मुस्लिम और ब्राह्मणों को भी अपने पाले में करने की एक खास योजना बनाई गई है।

2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव बसपा के लिए बहुत ही जरूरी साबित होने वाले है। ये जानकर आपको काफी हैरानी होगी कि पिछले लोकसभा चुनाव में बसपा को एक भी सीट नसीब नहीं हुई थी, वहीं कई बार सत्ता में रहने वाली बसपा पार्टी को पिछले विधानसभा चुनाव में सिर्फ 19 सीटों से ही संतोष करना पड़ा था। अभी कुछ समय पहले ही फूलपुर और गोरखपुर उपचुनाव में समाजवादी पार्टी को बसपा प्रमुख मायावती द्वारा समर्थन दिया गया था जिसके बाद दोनों सीटों पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के जीतने से सपा और बसपा गठबंधन के रास्ते पूरी तरह से साफ हो गए है।

इसके साथ ही बसपा की एक रणनीति यह भी है कि बसपा इस बार सपा का सहारा लेकर एक बार फिर से उत्तर प्रदेश में अपनी पार्टी को मजबूती के साथ खड़ा करना चाहती है। एक वजह ये भी है कि ऐसे में 2019 में होने वाले चुनाव बसपा के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित होने वाले है। हर बार के चुनाव की तरह इस बार भी बसपा की अपने पारंपरिक वोट को अपने पाले में करना चाहती है, लेकिन इस बार ऐसा करना बसपा के लिए काफी मुश्किल होगा क्योंकि पिछले कुछ दिनों में बीजेपी ने दलितों के बीच अपनी काफी अच्छी धाक जमा रखी है। हालांकि इसमें कोई दो राय नहीं है कि आज भी प्रदेश में दलितों की सबसे बड़ी नेता बहन कुमारी मायावती को ही माना जाती है।

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