पुलवामा आतंकी हमला: शहीद जवानों के शवों की पहचान के लिए अपनाए गए ऐसे-ऐसे तरीके, सुनकर भर आएंगीं आपकी आंखें

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जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में हुए आतंकी हमले में सीआरपीएफ से 44 जवान शहीद हो गए हैं। हमले में शहीद जवानों के शवों की ऐसी हालत थी कि उनकी पहचान करना भी मुश्किल था। हमले की तस्वीरों को देखकर अंदाज़ लगाया जा सकता है कि धमाका कितना भयंकर हुआ होगा। जब तिरंगे में लिपटे 44 जवानों से शव उनके घर भेजे गए। शवों को देखकर सभी के मन में गुस्सा है सभी का खून खौल रहा है। शवों की ऐसी हालत थी कि जवानों की पहचान भी नहीं की जा रही थी।

इस हमले में शवों की हालत बेहद खराब थी। जवानों के शरीर के टुकड़ों को इकट्ठा करना भी मुश्किल था। कहीं हाथ पड़ा हुआ था तो कहीं आंतें। जवानों के बैग कहीं, तो शरीर के टुकड़ें कहीं। हमले के बाद इलाका किसी युद्ध भूमि से कम नहीं लग रहा था। जवानों के शरीर के कुछ टुकड़ों और सामानों को एक साथ इकट्ठा करने के बाद इनकी पहचान का काम शुरू किया गया। जानकारी के मुताबिक जवानों के आधार कार्ड, आईडी कार्ड और कुछ अन्य सामानों से शहीदों की पहचान की गई।

कुछ जवान अपना आईडी कार्ड, पैन कार्ड साथ लेकर गए थे। जिससे उनकी पहचान की गई थी। कई जवान घर जाने के लिए छुट्टी का आवेदन लिखकर आए थे। इस आवेदन को उन्होंने अपने बैग या जेब में रखा हुआ था। इसी के आधार पर उनकी पहचान की गई। शवों की शिनाख्त के कुछ मामले तो बेहद दर्द भरे हैं। जिसे सुनकर की आंसू आ जाएं। जी हां, कई जवानों के बैग उनसे अलग हो गए थे। ऐसे में उनकी पहचान उनके हाथ पर बंधी घड़ियों से हुई। हमले में बचे जवानों ने इन घड़ियों से अपने शहीद साथियों की पहचान की। कई जवान अपने पॉकेट में पर्स लेकर चल रहे थे। ये पर्स उनकी पहचान का आधार बना। इन तमाम कोशिशों के बाद भी कुछ शवों के पहचान करने में काफी परेशानी हुई।

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