जानिए… मोदी के बयानों को लेकर मीडिया सही या फिर राज्यवर्धन सिंह राठौर

Politics

देश की राजनीति में लोकसभा चुनावों से पहले ही कई दिलचस्प मोड़ देखने को मिल रहे हैं। आय दिन किसी न किसी मुद्दे पर सत्ताधारी पार्टी और विपक्षी पार्टियां आमने सामने होती नजर आती हैं। हालांकि चुनावों से पहले खुद की छवि को बेहतर बनाकर जनता के सामने पेश करना हर पार्टी का एकमात्र मकसद है। वहीं हाल ही की बात करें तो 2018 विधानसभा चुनावों में बीजेपी को पांचों राज्यों में हार का सामना करना पड़ा था। जिसके बाद से मोदी लहर हो या फिर शाह की चाणक्य नीति हर किसी पर सवाल उठने लगे थे। वहीं कांग्रेस शानदार प्रदर्शन के साथ नए जोश में नजर आई।

लेकिन अब नए साल का आगाज होने के साथ ही कुछ नए सिरे की राजनीति देखने को मिल रही हैं। दरअसल हम बात कर रहे हैं 1 जनवरी यानी सोमवार को प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए इंटरव्यू की। जहां पीएम मोदी ने सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर जीएसटी, राम मंदिर व नोटबंदी जैसे हर जरुरी मुद्दे पर अपनी बात रखी। अब मोदी के जवाब हो और सियासत में बयानबाजी न हो ऐसा तो हो ही नहीं सकता। लेकिन यहां बात सियासी बयानों की नहीं बल्कि खुद मीडिया पर भी सवाल उठाया गया है।

दरअसल मोदी सरकार में मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने पीएम मोदी की बातों को मीडिया द्वारा पेश करने के तरीकों पर सवाल उठाए हैं। जिस तरह मोदी ने राम मंदिर पर अध्यादेश लाने की बात कही या फिर किसानों की कर्जमाफी को अन्य पार्टियों द्वारा दिया जा रहा लॉलीपॉप बताया अब इसे लेकर ही बातें बनाई जा रही हैं। जहां राज्यवर्धन सिंह राठौर ने इस बात को ट्विटर पर उठाया है।

अपने ट्विटर पर राज्यवर्धन सिंह राठौर ने लिखा है, नरेंद्र मोदी ने कहा- मंदिर पर जब सारे लीगल ऑप्शन खत्म हो जाएंगे तो अध्यादेश लाएंगे। मीडिया ने खबर लिखा- मंदिर पर अध्यादेश नहीं लाएंगे।, नरेंद्र मोदी ने कहा- कांग्रेस ने कर्जमाफी के नाम पर किसानों को लॉलीपॉप थमाया है। मीडिया ने लिखा मोदी ने कहा- किसानों की कर्जमाफी लॉलीपॉप है।

राज्यवर्धन राठौर अपने इस ट्वीट से सीधेतौर पर मोदी के बयानों का बचाव करते हुए मीडिया पर सवाल खड़े कर रहे हैं। उनका कहना यही जाहिर करता है कि मीडिया ने अपने हिसाब से पीएम मोदी के बयानों को आधा अधूरा पेश किया है, जो जनता तक पहुंचना किसी गलतफहमी से कम नहीं है।

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