जानिए…सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले पर कही ये बड़ी बातें….

News

रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई कर रही संविधान पीठ ने कहा कि यह विवाद दो धर्मों की पूजा अर्चना से जुड़ा हुआ है। लिहाजा इसे कोर्ट द्वारा नियुक्त मध्यस्थ के जरिये सुलझाने की पहल की जानी चाहिए। पीठ ने कहा था कि मुख्य मामले की सुनवाई 8 हफ्ते के बाद होगी तब तक आपसी समझौते से विवाद को सुलझाने का एक प्रयास किया जा सकता है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मामले में मध्यस्थता को लेकर अपना फैसला सुरक्षित रखा है। मध्यस्थता के सवाल पर रामलला विराजमान और हिन्दू महासभा ने विरोध जताया था, जबकि मुस्लिम पक्ष और सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कहा था कि वो आपस में बातचीत करने को तैयार हैं। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ कर रही है।

हिंदू महासभा की ओर से वकील हरिशंकर जैन ने मध्यस्था का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि अगर कोर्ट में पार्टियां मान जाती हैं, तो आम जनता इस समझौते को नहीं मानेगी। इस पर जस्टिस एसए बोबडे ने कहा है कि आप सोच रहे हैं कि किसी तरह का समझौता करना पड़ेगा कोई हारेगा, कोई जीतेगा। मध्यस्थता में हर बार ऐसा नहीं होता है। उन्होंने कहा कि ये भावनाओं से जुड़ा मसला है, इसलिए हम चाहते हैं कि बातचीत से हल निकले। कोई उस जगह बने या बिगड़े निर्माण को या इतिहास को पहले जैसा नहीं कर सकता है। इसलिए स्थिति बातचीत से ही सुधर सकती है।

जस्टिस बोबडे ने कहा कि बाबर ने जो किया हम उसे ठीक नहीं कर सकते हैं, अभी जो हालात हैं हम उस पर बात ही करेंगे। अगर कोई केस मध्यस्थता को जाता है, तो उसके फैसले से कोर्ट का कोई लेना देना नहीं है। यह सिर्फ जमीन का मामला नहीं है, बल्कि भावनाओं से जुड़ा हुआ भी है। दिल, दिमाग और भावनाओं का मामला है। इसलिए कोर्ट चाहता है कि आपसी बातचीत से इसका हल निकले। जस्टिस बोबडे ने कहा कि जो पहले हुआ हमारा कोई नियंत्रण नहीं। हम इस विवाद में अब क्या है उस पर बात कर रहे हैं। हम देश की बॉडी पॉलिटिक्स के असर को जानते हैं। ये दिल दिमाग और हीलिंग का मसला है। जस्टिस बोबडे ने हिंदू महासभा से कहा कि आप कह रहे हैं कि समझौता फेल हो जाएगा। आप प्री जज कैसे कर सकते हैं?

हिंदू महासभा ने कोर्ट में कहा कि इस केस को मध्यस्थता के लिए भेजा जाए। इससे पहले नोटिस जरूरी है। यही कारण है कि हिंदू महासभा इसका विरोध कर रहा है। उन्होंने कहा कि क्योंकि ये हमारी जमीन है। इसलिए हम मध्यस्थता के लिए तैयार नहीं हैं। इस पर जस्टिस अशोक भूषण ने कहा है कि इस मामले में अगर पब्लिक नोटिस दिया गया तो मामला वर्षों तक चलेगा, ये मध्यस्थता कोर्ट की निगरानी में होगी। जस्टिस बोबडे ने कहा कि पक्षकारों द्वारा गोपनीयता का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ सिंह ने कहा कि यह केवल पार्टियों के बीच का विवाद नहीं है, बल्कि दो समुदायों को लेकर विवाद है। हम मध्यस्थता के माध्यम से लाखों लोगों को कैसे बांधेंगे? यह इतना आसान नहीं होगा। हम पक्षों को प्रतिनिधि के तौर पर मानेंगे। मध्यस्थता सहमति के आधार पर होगी।

वहीं, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि हम मामले में जल्द फैसला सुनाना चाहते हैं। उन्होंने मामले में पक्षकारों से मध्यस्थों को नाम सुझाने को कहा है। हिंदू पक्ष ने कहा कि मान लीजिए की सभी पक्षों में समझौता हो गया तो भी समाज इसे कैसे स्वीकार करेगा? इस पर जस्टिस बोबडे ने कहा कि अगर समझौता कोर्ट को दिया जाता है और कोर्ट उस पर सहमति देता है और आदेश पारित करता है। तब वह सभी को मानना ही होगा। वहीं, जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि कोर्ट का फैसला एक बाध्यकारी चरित्र है। मध्यस्थता में हम कैसे लोगों को बाध्यकारी बना सकते हैं।

Leave a Reply