सवर्ण आरक्षण बिल को मंजूरी मिलने के बाद पीएम मोदी ने जाहिर की अपने मन की बात

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मोदी सरकार ने चुनावों से ठीक पहले सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने का फैसला लेकर मानों देशभर में गहमगहमी फैला दी है। वहीं दोनों सदनों से भी इस पर पेश किए विधेयक पर सांसदों ने भी अपनी मंजूरी दे दी है। मोदी के इस फैसले से अब सामान्य वर्ग के आर्थिक रुप से पिछड़े लोगों को शिक्षा व रोजगार में आरक्षण देने की बात कही गई है। इस प्रावधान के लिए ऐतिहासिल संविधान संशोधन विधेयक को मंजूरी भी मिल गई है। दोनों सदनों के बाद अब इस बिल को राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा, जहां से हस्ताक्षर मिलने के बाद यह बिल प्रभावी हो जाएगा। बता दें कि उच्च सदन में 165 मतों का समर्थन और महज 7 मत विरोध में डाले जाने के बाद से ही इसे सदन की मंजूरी मिल गई है।

इस दौरान भारतीय जनता पार्टी सहित एनडीए में शामिल तमाम पार्टियां इस बिला को अपना समर्थन देते हुए इसे समाज की जरूरत बता रही हैं। वहीं विपक्षी पार्टियों ने इस बिल की टाइमिंग और इसके पीछे सरकार की मंशा पर काफी सवाल खड़े किए हैं।

केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने विधेयक पर चर्चा के दौरान उन्होंने जवाब देते हुए, इसे सरकार का एक ऐतिहासिक कदम बताया है। उन्होंने कांग्रेस पार्टी के साथ अन्य विपक्षी पार्टियों से पूछा कि जब उन्होंने सामान्य वर्ग को आर्थिक आधार पर आरक्षण दिये जाने का अपने घोषणापत्र में वादा किया था तो वह वादा किस आधार पर किया गया था? क्या उन्हें यह नहीं मालूम था कि ऐसे किसी कदम को अदालत में चुनौती दी जा सकती है?

राज्यसभा में बिल पेश होने से पहले मंगलवार को लोकसभा में इस आरक्षण विधेयक पर काफी लंबी बहस चली है। जिसके बाद सभी पार्टियों ने इसका समर्थन किया है। आपको बता दें कि बिल के समर्थन में 323 वोट डाले गए जबकि महज 3 ही वोट इसके खिलाफ थे। वहीं राज्यसभा में संख्याबल कम होने के बाद भी यह उच्च सदन में भी पास हो गया है। जिसके बाद पीएम मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने इस पर अपनी खुशी जाहिर की है।

आरजेडी नेता मीसा भारती ने आरक्षण बिल पर अपनी राय देते हुए कहा है कि, यह राजनीतिक स्टंट है, सरकार ने साढ़े चार साल में कुछ नहीं किया। बिल को जिस तरह से इन लोगों ने लाया और सवर्णों को झूनझूना दे दिया है, जो हिलेगा लेकिन आवाज नहीं करेगा। उन्होंने अपने इस बयान से साफ तौर पर इस बिल के विरोध में आवाज उठाई है।

कुछ विपक्षी दलों ने जहां मोदी के इस विधेयक को लोकसभा चुनाव से कुछ पहले का एक हथियार बताया तो वहीं इस विधेयक के न्यायिक समीक्षा में टिक पाने को लेकर भी आशंका जताई जा रही है। हालांकि सरकार का दावा है कि, कानून बनने के बाद यह न्यायिक समीक्षा की अग्निपरीक्षा में भी खरा उतरेगा क्योंकि इसे संविधान संशोधन के जरिये लाया गया है। केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए इसे सरकार का एक ऐतिहासिक कदम बताया है।

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