नहीं रहे सचिन तेंदुलकर को ‘क्रिकेट का भगवान’ बनाने वाले कोच रमाकांत आचरेकर, सदमे में क्रिकेट जगत

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मुंबई के एक छोटे से बच्चे को क्रिकेट का भगवान बनाया, विनोद कांबली, प्रवीण आमरे, अजीत अगरकर और रमेश पोवार जैसे दिग्गज खिलाड़ी को खेल सिखाया। ना जाने कितने बच्चों को क्रिकेट के गुर सिखाये। जी हां हम बात कर रहे हैं। क्रिकेट के भगवान को क्रिकेट सिखाने वाले कोच रमाकांत आचरेकर की।

आपको बता दें कि रमाकांत आचरेकर का 87 साल की उम्र में निधन हो गया है। लेकिन आज हम आपको कुछ ऐसी बातें बताने जा रहे हैं, जिसे सुनकर आप यकीन नहीं करेंगे। क्या आप जानते हैं सचिन को क्रिकेट का भगवन बनाने के लिए कोच ने उन्हें थप्पड़ तक मारा है।

कैसे हुआ निधन ?

दरअसल, साल 2013 में आये एक स्ट्रोक के बाद उनका चलना फिरना बंद हो गया था और व्हीलचेयर पर ही रहे और मंगलवार 2 जनवरी साल 2019 की शुरुआत में ही उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। जब सचिन को ये बात पता चली तो उन्हें काफी धक्का लगा और अपने कोच के निधन के बाद सचिन ने एक इमोशनल ट्वीट भी किया। ट्वीट में सचिन ने लिखा कि आचरेकर सर की मौजूदगी से स्वर्ग में भी क्रिकेट समृद्ध होगा।

इसके साथ ही साथ सचिन तेंदुलकर ने कहा, ‘दूसरे स्टूडेंट की तरह मैंने भी क्रिकेट की ABCD आचरेकर के मार्गदर्शन में ही सीखी। मेरे जीवन में उनके योगदान को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। उन्होंने वह नींव रखी, जिस पर मैं खड़ा हूं।’ सचिन ने कहा, ‘मैं पिछले महीने आचरेकर और उनके कुछ छात्रों से मिला और उनके साथ समय बिताया। हमने पुरानी यादें साझा कीं और बहुत खुश हुए। मुझे आचरेकर सर ने सीधे बल्ले से खेलना और सादा जीवन जीना सिखाया। हमें अपने जीवन से जोड़ने और खेल के गुर सिखाने के लिए धन्यवाद। ‘ उन्होंने कहा, ‘आचरेकर आप हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे।’

एक ऐसा थप्पड़, जिसने हमेशा के लिए बदल दी सचिन तेंदुलकर की जिंदगी

जिसका बल्ला कभी दुनिया के सबसे बेहतरीन गेंदबाजों की बखिया उधेड़ता था, कभी उसके गाल पर उसके कोच ने थप्पड़ मारा था। जी  हां यकीन करना थोड़ा मुश्किल है। लेकिन ये बात सच है कभी कोच ने सचिन के ऊपर भींहाथ उठाया था। तो आइये जानते हैं क्या थी वो वजह जिस वजह से सचिन को खाना पड़ा था थप्पड़:-

दरअसल बात ये है कि  एक बार वानखेड़े स्टेडियम में हैरिस शील्ड टूर्नामेंट का फाइनल खेला जा रहा था। तब सचिन 14 से कम उम्र के थे, और वो इस टूर्नामेंट का हिस्सा नहीं थे। मगर सब कुछ जानते हुए भी वो अपनी प्रैक्टिस छोड़कर मैच देखने वानखेड़े स्टेडियम में गए। मगर किस्मत को उस दिन कुछ और ही मंजूर था और वो रमांकांत आचरेकर से टकरा गए। बस फिर क्या था। सचिन को वहां देख कर उनके कोच आग बबूला हो गए और जड़ दिया सचिन को एक करारा थप्पड़। उस दिन सर ने सचिन से कहा कि दूसरों के लिए तालियां बजाने से बेहतर है खुद इस काबिल बनों कि लोग तुम्हारे लिए तालियां बजाएं। खड़े होकर दूसरों को देखने के बजाय इस लायक बनो कि लोग तुम्हें देखने आएं।”

सचिन को कभी वेल प्लेड नहीं कहते थे आचरेकर सर

क्रिकेट को अलविदा कह चुके सचिन के नाम लगभग सरे रिकार्ड्स हैं, लेकिन कभी भी उन्हें वेल प्लेड सुनने का मौका नहीं  मिला। दरअसल बात ये है कि कोच आचरेकर को तारीफ करना पसंद नहीं था। लेकिन वो हमेशा चाहते थे कि दुनिया सचिन की तारीफ करे।

जब आचरेकर ने सचिन-कांबली पर चिल्लाते हुए कहा था डिक्लेयर

साल 2013 में एक इंटरव्यू में  विनोद कांबली ने एक बात का खुलासा किया था कि एक बार कोच आचरेकर ने सचिन और उन्हें खूब डांटा था और पारी घोषित करने के लिए कहा था। लेकिन हमने ऐसा नहीं किया था जिस वजह से वो हम पर चिल्ला रहे थे। आपको याद दिलादे कि ये वही पारी थी, जिसमे सचिन-कांबली ने 664 रन बनाये थे।

सचिन के पास कई फील्डर लगाते थे आचरेकर

कोच सचिन के आसपास फील्डर्स फौज खड़ी कर देते थे। सचिन को उन फील्डर्स के बीच संभली हुई बल्लेबाजी करनी होती थी और अपना विकेट भी बचाना होता था।

विकेट बचाने पर मिलता था एक रुपए का सिक्का

सचिन तेंदुलकर इस किस्से का जिक्र ना जाने कितनी बार कर चुके हैं। सचिन बताते हैं कि 80 के दशक में जब वह ट्रेनिंग के लिए जाते थे तो आचरेकर स्टंप के ऊपर एक रुपए का सिक्का रख देते थे। उस सिक्के को पाने के लिए वह शर्त रखते थे कि जो सचिन को आउट करेगा, यह सिक्का उसे मिलेगा। और सचिन अगर आउट नहीं हुए तो सिक्का उनका हो जाएगा। तेंदुलकर ने इस तरह से 13 एक रुपए के सिक्के जीते है और इन्हें आज भी सहेज कर अपने पास रखा हुआ है।

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